Barkat Ki Dua पढ़कर रिज़्क़ में बरकत, घर में सुकून और कारोबार में तरक्की हासिल करें

हर मुसलमान अपनी ज़िंदगी में अल्लाह से Barkat Ki Dua करता है। बरकत का मतलब है अल्लाह की तरफ़ से आने वाली ख़ुशी और सुकून, जो थोड़ी चीज़ को भी काफ़ी बना देती है।

रिज़्क़, घर और कारोबार में बरकत न हो तो मेहनत के बावजूद सुकून नहीं मिलता। क़ुरआन और हदीस में नबी मुहम्मद ﷺ ने कुछ ख़ास दुआएं सिखाई हैं जिन्हें पढ़ कर Rizq Me Barkat Ki Dua, Ghar Me Barkat Ki Dua और Karobar Mein Barkat Ki Dua हासिल की जा सकती है।

यह तमाम दुआएं सही हदीस की किताबों से ली गई हैं, ताकि हर मुसलमान भरोसे के साथ इन्हें अपनी ज़िंदगी में शामिल कर सके।

कभी कभी मेहनत पूरी होने के बावजूद घर में ख़ुशियां कम मेहसूस होती हैं, या हाथ में पैसा आते ही ख़र्च हो जाता है। ऐसे मौक़ों पर सबसे पहला काम यह है कि अल्लाह से दुआ की जाए, क्योंकि असल इज़ाफ़ा सिर्फ़ उसके हाथ में है।

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Barkat Ki Dua | बरकत की दुआ

सबसे मशहूर Barkat Ki Dua वही है जो नबी मुहम्मद ﷺ फ़ज्र की नमाज़ के बाद पढ़ते थे। इस दुआ में इल्म, रिज़्क़ और अमल, तीन चीज़ों के लिए अल्लाह से सवाल किया गया है, जो बरकत वाली ज़िंदगी की बुनियाद हैं।

अरबी

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا وَرِزْقًا طَيِّبًا وَعَمَلًا مُتَقَبَّلًا

रोमन तलफ़्फ़ुज़

Allahumma inni as’aluka ‘ilman nafi’an, wa rizqan tayyiban, wa ‘amalan mutaqabbalan.

हिंदी तलफ़्फ़ुज़

अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका इल्मन नाफ़िअन, व रिज़्क़न तैय्यिबन, व अमलन मुतक़ब्बलन।

हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! मैं तुझसे फ़ायदेमंद इल्म, पाकीज़ा रिज़्क़ और क़बूल होने वाले अमल का सवाल करता हूँ।

हवाला: सुनन इब्ने माजा, हदीस 925, हज़रत उम्मे सलमा (रदियल्लाहु अन्हा) से रिवायत। इमाम अल्बानी ने इसे सहीह दर्जा दिया है।

एक और दुआ, माल और औलाद की बरकत के लिए

नबी मुहम्मद ﷺ ने अपने ख़ादिम हज़रत अनस बिन मालिक (रदियल्लाहु अन्हु) के लिए यह दुआ की थी, जब उनकी वालिदा हज़रत उम्मे सुलैम ने नबी ﷺ से उनके लिए दुआ की दरख़्वास्त की।

अरबी

اللَّهُمَّ أَكْثِرْ مَالَهُ وَوَلَدَهُ وَبَارِكْ لَهُ فِيمَا أَعْطَيْتَهُ

रोमन तलफ़्फ़ुज़

Allahumma akthir maalahu wa waladahu, wa barik lahu fi ma a’taitahu.

हिंदी तलफ़्फ़ुज़

अल्लाहुम्मा अक्सिर मालहू व वलदहू, व बारिक लहू फ़ी मा अअ़तैतहू।

हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! इसका माल और औलाद बढ़ा दे, और जो कुछ तू ने इसे दिया है उसमें बरकत दे।

हवाला: सहीह बुख़ारी, हदीस 6334 और 6380।

यह दुआ असल में नबी ﷺ ने हज़रत अनस के लिए ग़ायब के सीगे (third person) में फ़रमाई थी। अगर कोई अपने लिए यह दुआ पढ़ना चाहे तो अल्फ़ाज़ बदल कर इस तरह पढ़ सकता है: “Allahumma akthir mali wa waladi wa barik li fima a’taytani” यानी “ऐ अल्लाह! मेरा माल और औलाद बढ़ा दे और जो कुछ तू ने मुझे दिया है उसमें बरकत दे।” यह तरीक़ा आम तौर पर रायज है, मगर असल हदीस के अल्फ़ाज़ ऊपर वाले ही हैं।

Barkat Ki Dua In English | बरकत की दुआ (अंग्रेज़ी में)

इंग्लिश में इसका सीधा तर्जुमा यह है: “O Allah, I ask You for beneficial knowledge, pure provision, and deeds that are accepted.” यह Barkat Ki Dua In English समझने के लिए काफ़ी है, लेकिन अरबी में ही पढ़ना सबसे बेहतर तरीक़ा है क्योंकि नबी ﷺ ने इसी ज़बान में सिखाया था।

Barkat Ki Dua In Hindi | बरकत की दुआ हिंदी में

जो लोग अरबी पढ़ने में दुश्वारी मेहसूस करते हैं, वह Barkat Ki Dua In Hindi ट्रांसलिटरेशन के ज़रिए भी इसी दुआ को याद कर सकते हैं। ऊपर दिया गया हिंदी रूप ध्यान से पढ़ें और धीरे धीरे ज़ुबानी याद कर लें।

यह दुआ कब और कैसे पढ़ें

फ़ज्र की नमाज़ के सलाम के फ़ौरन बाद यह दुआ पढ़ना सुन्नत तरीक़ा है। इसके अलावा दिन में कभी भी, ख़ास कर सुबह के वक़्त, यह दुआ दोहराई जा सकती है।

दिल से यक़ीन के साथ और ध्यान लगा कर दुआ करना ज़रूरी है। सिर्फ़ अल्फ़ाज़ बोलने से ज़्यादा, उनके मतलब पर ग़ौर करना दुआ को असरदार बनाता है।

क़ुरआन में बरकत बढ़ाने के दो तरीक़े

दुआ के साथ क़ुरआन ने कुछ आमाल बताए हैं जो बरकत को खींच कर लाते हैं। यह तरीक़े हर मुसलमान के लिए आसान हैं और इन्हें रोज़ की ज़िंदगी में शामिल किया जा सकता है।

शुक्र अदा करना

सूरह इब्राहीम की आयत 7 में अल्लाह ने फ़रमाया है कि अगर बंदे शुक्र अदा करें तो वह उन्हें और ज़्यादा अता करेगा, और अगर नाशुक्री करें तो अज़ाब सख़्त है। इसका मतलब यह है कि जो कुछ भी रिज़्क़, घर या कारोबार में मिल चुका है, उसका शुक्र अदा करना ख़ुद एक क़िस्म का अमल है जो और बरकत खींच लाता है।

इस्तिग़फ़ार करना

सूरह नूह की आयत 10 से 12 में हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम को इस्तिग़फ़ार की तालीम देते हैं। वहां बताया गया है कि इस्तिग़फ़ार करने से अल्लाह बारिश भेजता है, माल और औलाद में इज़ाफ़ा करता है और बाग़ात अता करता है। इसी लिए रोज़ अस्तगफ़िरुल्लाह पढ़ना रिज़्क़ की कुशादगी का एक ज़रिया समझा जाता है।

इन दोनों आमाल को ऊपर दी गई दुआ के साथ जोड़ कर पढ़ा जाए तो असर और ज़्यादा मेहसूस होता है। दुआ, शुक्र और इस्तिग़फ़ार तीनों मिल कर एक मुसलमान की ज़िंदगी में सुकून लाते हैं।

Rizq Me Barkat Ki Dua | रिज़्क़ में बरकत की दुआ

Rizq Me Barkat Ki Dua तलाश करने वालों के लिए हदीस में एक और ख़ूबसूरत दुआ मिली है, जिसमें सीधे तौर पर रिज़्क़ का ज़िक्र है।

अरबी

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِي وَوَسِّعْ لِي فِي دَارِي وَبَارِكْ لِي فِي رِزْقِي

रोमन तलफ़्फ़ुज़

Allahumma ighfir li dhanbi, wa wassi’ li fi dari, wa barik li fi rizqi.

हिंदी तलफ़्फ़ुज़

अल्लाहुम्म इग़्फ़िर ली ज़म्बी, व वस्सिअ़ ली फ़ी दारी, व बारिक ली फ़ी रिज़्क़ी।

हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! मेरे गुनाह माफ़ कर दे, मेरे घर को कुशादगी दे और मेरे रिज़्क़ में बरकत दे।

हवाला: जामे अत-तिर्मिज़ी, हदीस 3500, हज़रत अबू मूसा अशअरी (रदियल्लाहु अन्हु) से रिवायत, दर्जा हसन।

यह दुआ एक ही वक़्त में तीन चीज़ें मांगती है: गुनाहों की माफ़ी, घर में कुशादगी और रिज़्क़ में बरकत। इसी लिए इसे सुबह शाम पढ़ना मुफ़ीद समझा जाता है।

रिज़्क़ के लिए हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की दुआ

क़ुरआन में हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की एक छोटी मगर असरदार दुआ भी मिलती है, जो मुश्किल वक़्त में रिज़्क़ मांगने के लिए पढ़ी जा सकती है।

अरबी

رَبِّ إِنِّي لِمَا أَنْزَلْتَ إِلَيَّ مِنْ خَيْرٍ فَقِيرٌ

रोमन तलफ़्फ़ुज़

Rabbi inni lima anzalta ilayya min khairin faqir.

हिंदी तलफ़्फ़ुज़

रब्बि इन्नी लिमा अंज़ल्ता इलय्या मिन ख़ैरिन फ़क़ीर।

हिंदी अर्थ

ऐ मेरे रब! जो भलाई तू ने मेरी तरफ़ उतारी है, मैं उसका मोहताज हूँ।

हवाला: सूरह अल-क़सस, आयत 24।

Ghar Me Barkat Ki Dua | घर में बरकत की दुआ

Ghar Me Barkat Ki Dua के सिलसिले में ऊपर वाली दुआ का वह हिस्सा, “वस्सिअ़ ली फ़ी दारी” यानी “मेरे घर को कुशादा कर,” ख़ास तौर पर घर के लिए ही मांगा गया है। इसी दुआ को घर में बरकत के लिए भी पढ़ा जा सकता है।

इसके साथ एक हदीस में यह भी आया है कि जिस घर में सूरह अल-बक़रा पढ़ी जाती है, उस घर से शैतान दूर भाग जाता है (सहीह मुस्लिम)। इसलिए रोज़ घर में क़ुरआन की तिलावत करना इसके असर को और बढ़ा देता है।

घर में दाख़िल होते वक़्त बिस्मिल्लाह पढ़ना और अहले ख़ाना को सलाम करना भी घरेलू Barkat का ज़रिया है, जैसा कि हदीस में बताया गया है।

Karobar Mein Barkat Ki Dua | कारोबार में बरकत की दुआ

Karobar Mein Barkat Ki Dua के लिए बाज़ार या दुकान में दाख़िल होते वक़्त यह कलमा पढ़ने की तरग़ीब दी गई है।

अरबी

لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، يُحْيِي وَيُمِيتُ، وَهُوَ حَيٌّ لَا يَمُوتُ، بِيَدِهِ الْخَيْرُ كُلُّهُ، وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ

रोमन तलफ़्फ़ुज़

La ilaha illallah wahdahu la sharika lahu, lahul mulku wa lahul hamdu, yuhyi wa yumitu, wa huwa hayyun la yamutu, bi yadihil khairu kulluhu, wa huwa ‘ala kulli shay’in Qadir.

हिंदी तलफ़्फ़ुज़

ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लहू, लहुल मुल्कु व लहुल हम्दु, युह्यी व युमीतु, व हुवा हय्युन ला यमूतु, बि यदिहिल ख़ैरु कुल्लुहू, व हुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर।

हिंदी अर्थ

अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह तन्हा है, उसका कोई शरीक नहीं, बादशाहत और तमाम तारीफ़ें उसी के लिए हैं, वही ज़िंदगी और मौत देता है, वह ज़िंदा है उसे मौत नहीं आती, हर भलाई उसी के हाथ में है, और वह हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है।

हवाला: सुनन इब्ने माजा, हदीस 2235 और जामे अत-तिर्मिज़ी, हदीस 3428। इमाम अल्बानी ने इसे हसन कहा है, हालांकि कुछ उलमा ने इस दुआ की सनद को कमज़ोर बताया है। एहतियात के तौर पर इस दुआ को सिर्फ़ ज़िक्र और तवक्कुल की नीयत से पढ़ें, बिना किसी ख़ास गिनती या वज़ीफ़े की शर्तें लगाए।

बरकत और हिफ़ाज़त के लिए एक और दुआ

कारोबार या किसी भी मुश्किल काम में अल्लाह पर भरोसा रखने के लिए यह दुआ भी पढ़ी जाती है। इसका पहला हिस्सा हदीस की किताबों में कमज़ोर सनद से मिलता है, इसलिए इसे एहतियात के साथ लेना चाहिए। मगर इसका दूसरा हिस्सा ख़ुद क़ुरआन की आयत है, इसलिए वह हिस्सा पूरी तरह सही है।

अरबी

تَوَكَّلْتُ عَلَى الْحَيِّ الَّذِي لَا يَمُوتُ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي لَمْ يَتَّخِذْ وَلَدًا، وَلَمْ يَكُنْ لَهُ شَرِيكٌ فِي الْمُلْكِ، وَلَمْ يَكُنْ لَهُ وَلِيٌّ مِنَ الذُّلِّ، وَكَبِّرْهُ تَكْبِيرًا

रोमन तलफ़्फ़ुज़

Tawakkaltu ‘alal hayyilladhi la yamutu, alhamdu lillahil-ladhi lam yattakhidh waladan wa lam yakun lahu sharikun fil mulki wa lam yakun lahu waliyyum minadh-dhulli wa kabbirhu takbira.

हिंदी तलफ़्फ़ुज़

तवक्कलतू अललहय्या अल्लज़ी ला यमूतू अल्हम्दुलिल्लाहिल्लज़ी लम यत्तखिजु वलादन अवलम यकुन लहू शरीकुन फिलमुल्की वलम यकुन लहू वलीययुम मिनज्जल्ला वकब्बराहु तकबीरा।

हिंदी अर्थ

मैं उस ज़िंदा ज़ात पर भरोसा करता हूँ जिसे कभी मौत नहीं आती। तमाम तारीफ़ अल्लाह के लिए है, जिसने न कोई औलाद बनाई, न बादशाहत में उसका कोई शरीक है, और न किसी कमज़ोरी की वजह से उसे किसी मदद करने वाले की ज़रूरत है, और उसकी बड़ाई खुल कर बयान करो।

हवाला: पहला हिस्सा, “तवक्कलतु अलल हय्यिल्लज़ी ला यमूतु”, इब्ने अस-सुन्नी और तबरानी की किताब अद-दुआ में कमज़ोर सनद से मिलता है। दूसरा हिस्सा सूरह बनी इस्राईल की आयत 111 है, जो क़ुरआन का हिस्सा होने की वजह से ख़ुद साबित है। इसलिए यह दुआ ज़िक्र की नीयत से पढ़ी जा सकती है, मगर इसे किसी ख़ास वज़ीफ़े या मुक़र्रर फ़ायदे के साथ जोड़ कर नहीं पढ़ना चाहिए।

Barkat Ki Dua Ke Fayde | बरकत की दुआ के फ़ायदे

यह दुआ पढ़ने वाले को सबसे पहला फ़ायदा दिल का सुकून मिलता है। जब अल्लाह पर भरोसा बढ़ता है तो कम चीज़ भी काफ़ी मेहसूस होने लगती है।

दूसरा फ़ायदा यह है कि यह दुआ इंसान को हलाल रिज़्क़ की तरफ़ मोड़ देती है। यह दुआ सिर्फ़ पैसा बढ़ाने का ज़रिया नहीं, बल्कि सही राह पर चलने की दुआ है।

तीसरा फ़ायदा घर के मामलात में सुकून और माहौल में ख़ुशी का आना है। जब घर में अल्लाह का ज़िक्र होता है तो वहां की फ़िज़ा बदल जाती है।

चौथा फ़ायदा यह है कि इंसान की मेहनत को सही सर्फ़ होने की तौफ़ीक़ मिलती है। बहुत बार पैसा तो होता है, लेकिन उसका सही इस्तेमाल नहीं हो पाता, और दुआ यही कमी दूर करने में मदद करती है।

पांचवां फ़ायदा सब्र और शुक्र की आदत है। जो शख़्स रोज़ यह दुआ करता है, वह जो कम मिल जाए उसी पर भी राज़ी रहता है और शिकायत से बचता है।

Conclusion | निष्कर्ष

Barkat Ki Dua ज़िंदगी के हर हिस्से में, रिज़्क़, घर और कारोबार में, अल्लाह की मदद मांगने का ज़रिया है। यह तमाम दुआएं हदीस की मालूम किताबों से ली गई हैं और इन्हें यक़ीन के साथ पढ़ना चाहिए।

सिर्फ़ अल्फ़ाज़ पढ़ना काफ़ी नहीं, दिल से अल्लाह पर भरोसा रखना असल चीज़ है। दुआ के साथ शुक्र, इस्तिग़फ़ार और हलाल मेहनत को भी ज़िंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए।

इंशा अल्लाह, सच्चे दिल से की गई Barkat Ki Dua ज़रूर असर दिखाएगी, और अल्लाह रिज़्क़, घर और कारोबार तीनों में ख़ैर अता करेगा।

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? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Barkat Ki Dua कब पढ़नी चाहिए?

फ़ज्र नमाज़ के बाद या सुबह के वक़्त यह दुआ पढ़ना सबसे बेहतर है।

क्या Rizq Me Barkat Ki Dua रोज़ पढ़ सकते हैं?

हां, इसे रोज़ सुबह शाम पढ़ा जा सकता है।

क्या Karobar Mein Barkat Ki Dua सिर्फ़ दुकानदारों के लिए है?

नहीं, कोई भी शख़्स बाज़ार या काम की जगह दाख़िल होते वक़्त यह दुआ पढ़ सकता है।

क्या Barkat Ki Dua In English पढ़ना सही है?

मतलब समझने के लिए इंग्लिश तर्जुमा पढ़ा जा सकता है, लेकिन असल दुआ अरबी में ही पढ़ना बेहतर है।

Ghar Me Barkat Ki Dua के साथ और क्या करना चाहिए?

घर में क़ुरआन की तिलावत और बिस्मिल्लाह का एहतिमाम बरकत को और बढ़ाता है।

बरकत के लिए शुक्र और इस्तिग़फ़ार क्यों ज़रूरी है?

क़ुरआन के मुताबिक़ शुक्र और इस्तिग़फ़ार दोनों रिज़्क़ और बरकत में इज़ाफ़े का सबब बनते हैं।

अगर दुआ के बाद भी हालात न बदलें तो क्या करें?

सब्र के साथ दुआ जारी रखें, क्योंकि अल्लाह का फ़ैसला अपने वक़्त पर होता है और हर दुआ किसी न किसी शक्ल में क़बूल होती है।

Written by: Ahmad Raza

Credentials: Islamic Studies Content Writer

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