Roza Rakhne Ki Dua in Hindi | रोज़ा रखने की दुआ हिंदी, अरबी और इंग्लिश में।

Roza Rakhne Ki Dua एक साधारण वाक्य नहीं, बल्कि अल्लाह से किया गया एक गहरा और सच्चा वादा है। रोज़ा केवल भूखे रहने का नाम नहीं है, बल्कि अपने नफ़्स को अल्लाह के हुक्म के सामने झुका देने की इबादत है।

आज बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि roza rakhne ki dua in Hindi, roza rakhne ki dua in english, और roza rakhne ki dua in urdu में क्या है, और कौन-सी दुआ वास्तव में सही (authentic) है। इस लेख में आपको केवल वही दुआएँ मिलेंगी जो Qur’an और Sahih Hadith से प्रमाणित हैं।

इस लेख का उद्देश्य है:

  • रोज़े से जुड़ी दुआओं को सही रूप में पेश करना

  • गलत और अप्रमाणित बातों से बचाना

  • रोज़े की इबादत को इल्म और यक़ीन के साथ मज़बूत करना

Disclaimer:

यहाँ दी गई दुआएँ धार्मिक शिक्षा के उद्देश्य से हैं। दुआ की स्वीकृति नीयत और दिल की सच्चाई पर निर्भर करती है, भाषा या शब्दों पर नहीं। विशेष धार्मिक मामलों में योग्य आलिम से परामर्श करें।

Roza क्या है? (सरल और स्पष्ट समझ)

Islam में Roza पाँच फ़र्ज़ स्तंभों में से एक है।
Roza का मतलब है:

  • फज्र से मगरिब तक

  • अल्लाह की रज़ा के लिए

  • खाने-पीने और कुछ खास चीज़ों से रुक जाना

Qur’an में अल्लाह फ़रमाता है:

“ऐ ईमान वालों! तुम पर रोज़ा फ़र्ज़ किया गया है…”
(Surah Al-Baqarah 2:183)

Roza Rakhne Ki Dua In Hindi

roza rakhne ki dua

यह वही दुआ है जिसे आमतौर पर Sehri के समय पढ़ा जाता है। इसे roza rakhne ki dua (sehri) भी कहा जाता है।

Arabic

نَوَيْتُ صَوْمَ غَدٍ عَنْ أَدَاءِ فَرْضِ شَهْرِ رَمَضَانَ لِلّٰهِ تَعَالٰى

Transliteration

Nawaitu sauma ghadin ‘an adā’i farḍi shahri Ramaḍāna lillāhi ta‘ālā

Hindi Meaning

“मैंने अल्लाह तआला के लिए कल रमज़ान के फ़र्ज़ रोज़े की नियत की।”

महत्वपूर्ण बात (जो अक्सर छोड़ दी जाती है)

  • नियत दिल का इरादा है, ज़ुबान से कहना फ़र्ज़ नहीं।

  • Sehri करना अपने आप में नियत का प्रमाण है।

  • ये अल्फ़ाज़ फ़िक़्ही तौर पर सही और मान्य हैं।

Roza Rakhne Ki Dua in English

Intention (Meaning):
“I intend to keep the obligatory fast of Ramadan tomorrow for the sake of Allah.”

यह समझने के लिए है, इबादत की भाषा Arabic ही बेहतर मानी जाती है।

Roza Rakhne Ki Dua in Urdu

Arabic

نَوَيْتُ صَوْمَ غَدٍ عَنْ أَدَاءِ فَرْضِ شَهْرِ رَمَضَانَ لِلّٰهِ تَعَالٰى

Urdu Meaning

“میں نے اللہ تعالیٰ کے لیے کل رمضان کے فرض روزے کی نیت کی۔”

Nafli Roza Rakhne Ki Dua

Nafli रोज़े का दर्जा बहुत ऊँचा होता है और इसकी नियत में आसानी भी है।

Arabic

نَوَيْتُ صَوْمَ نَفْلٍ لِلّٰهِ تَعَالٰى

Transliteration

Nawaitu sauma naflin lillāhi ta‘ālā

Hindi Meaning

“मैं अल्लाह तआला के लिए नफ़ली रोज़े की नियत करता हूँ।”

विशेष फ़िक़्ही जानकारी:

नफ़ली रोज़े की नियत ज़वाल से पहले तक की जा सकती है, अगर कुछ खाया-पिया न हो।

Roza Rakhte Waqt Padhne Ki Masnoon Dua

Arabic

اللَّهُمَّ إِنِّي لَكَ صُمْتُ وَبِكَ آمَنْتُ وَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ

Transliteration

Allahumma inni laka sumtu wa bika aamantu wa ‘alayka tawakkaltu

Hindi Meaning

“ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा, तुझ पर ईमान लाया और तुझ पर भरोसा किया।”

(Abu Dawood – Hasan Hadith)

Iftar Ki Dua

Arabic

ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوقُ وَثَبَتَ الْأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ

Transliteration

Dhahaba-z-zamā’u wabtallatil ‘urūqu wa thabatal ajru in shā’ Allāh

Hindi Meaning

“प्यास खत्म हो गई, नसों में तरावट आ गई और सवाब तय हो गया, इंशा अल्लाह।”

(Abu Dawood – Sahih)

Read Also: Roze Ki Niyat Ki Dua

Roza सिर्फ भूख का नाम क्यों नहीं है?

Rasoolullah ﷺ फ़रमाते हैं:

“जो झूठ और ग़लत काम नहीं छोड़ता, अल्लाह को उसके भूखे रहने की ज़रूरत नहीं।”
(Sahih Bukhari 1903)

इसलिए रोज़ा:

  • ज़ुबान का भी है

  • नज़रों का भी

  • और दिल का भी

आम गलतियाँ (ज़रूरी चेतावनी)

आम गलती सही बात
सिर्फ Arabic याद करना नियत दिल से होती है
हर मशहूर दुआ सही मान लेना हर दुआ प्रमाणित नहीं
रोज़ा = भूखा रहना असल मक़सद तक़वा है

Conclusion

Roza rakhne ki dua केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि अल्लाह से किया गया एक ईमानदार वादा है। जब नियत साफ़ हो, दुआ सही हो और अमल इख़लास के साथ हो तब रोज़ा केवल फ़र्ज़ नहीं रहता, बल्कि रहमत बन जाता है।

इस लेख में दी गई हर दुआ Qur’an और Sahih Hadith से प्रमाणित है। अगर आप चाहते हैं कि आपका रोज़ा अल्लाह के यहाँ क़बूल हो, तो इल्म, अमल और इख़लास तीनों को साथ रखिए।

FAQs – सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले सवाल

Q1. क्या roza rakhne ki dua बोलना ज़रूरी है?

नहीं, दिल का इरादा काफ़ी है।

Q2. क्या एक ही नियत पूरे रमज़ान के लिए काफ़ी है?

कुछ फ़िक़्ही मतों में जायज़ है, लेकिन रोज़ नियत करना बेहतर है।

Q3. Sehri न हो तो रोज़ा होगा?

हाँ, अगर नियत थी और कुछ खाया-पिया नहीं।

Q4. nafli roza rakhne ki dua कब तक की जा सकती है?

ज़वाल से पहले तक।

Q5. क्या Hindi में नियत करना ग़लत है?

नहीं, अल्लाह नियत देखता है, भाषा नहीं।

Written by: Ahmad Raza

Credentials: Islamic Studies Content Writer

Methodology:

  • Sahih Bukhari, Sahih Muslim, Abu Dawood से सत्यापन

  • Classical Fiqh references

  • कोई कमज़ोर या अप्रमाणित रिवायत शामिल नहीं

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