Roza Kholne Ki Dua सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि रसूलुल्लाह ﷺ की सुन्नत और अल्लाह से सीधा संवाद का माध्यम है।
रमज़ान के पवित्र महीने में या किसी भी नफिल रोज़े में, जब एक रोज़ेदार पूरे दिन भूख-प्यास सहकर अल्लाह की इबादत करता है, तो इफ्तार से ठीक पहले का समय दुआ कबूल होने का सबसे बेहतरीन वक्त माना जाता है।
हदीस शरीफ में आता है: “तीन लोगों की दुआ रद्द नहीं होती – रोज़ेदार की इफ्तार के समय की दुआ, न्यायप्रिय शासक की दुआ, और मजलूम की दुआ।” (सुनन इब्न माजाह)
यह लेख आपको वे सभी प्रामाणिक दुआएं देगा जो सीधे सहीह हदीस से ली गई हैं, चाहे आप हिंदी (roza kholne ki dua in hindi), अंग्रेजी (roza kholne ki dua in english), उर्दू (roza kholne ki dua in urdu) या बांग्ला (roza kholne ki dua bangla) में पढ़ना चाहते हों।
डिस्क्लेमर:
यहाँ दी गई दुआएँ धार्मिक शिक्षा के उद्देश्य से हैं। दुआ की स्वीकृति नीयत और दिल की सच्चाई पर निर्भर करती है, भाषा या शब्दों पर नहीं। विशेष धार्मिक मामलों में योग्य आलिम से परामर्श करें।
Roza Kholne Ki Dua in Arabic – मुख्य प्रामाणिक दुआएं
पहली दुआ
अरबी:
ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوقُ وَثَبَتَ الأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ
रोमन लिपि (Transliteration): “Dhahaba az-zama’u wabtallatil ‘urooqu wa thabatal ajru insha Allah”
हिंदी अर्थ: “प्यास बुझ गई, नसें तर हो गईं और इंशा अल्लाह सवाब मिल गया।”
उर्दू अर्थ: “پیاس بجھ گئی، رگیں تر ہو گئیں اور ان شاء اللہ اجر ثابت ہو گیا۔”
English Meaning: “The thirst is gone, the veins are moistened, and the reward is confirmed, if Allah wills.”
स्रोत: सुनन अबू दाऊद (हदीस 2357), सुनन अद-दारकुतनी
यह दुआ हज़रत अब्दुल्लाह इब्न उमर رضی اللہ عنہ से रिवायत है।
दूसरी प्रामाणिक दुआ
अरबी:
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ بِرَحْمَتِكَ الَّتِي وَسِعَتْ كُلَّ شَيْءٍ أَنْ تَغْفِرَ لِي
रोमन लिपि: “Allahumma inni as’aluka bi rahmatika allati wasi’at kulla shay’in an taghfira li”
हिंदी अर्थ: “ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरी उस रहमत का वास्ता देकर मांगता हूं जो हर चीज़ को घेरे हुए है कि तू मुझे माफ़ कर दे।”
स्रोत: सुनन इब्न माजाह (हदीस 3828)
यह दुआ रोज़ेदार के लिए विशेष रूप से मग़फिरत की दुआ है।
तीसरी सुन्नत दुआ (छोटी और आसान)
अरबी:
اللَّهُمَّ لَكَ صُمْتُ وَعَلَى رِزْقِكَ أَفْطَرْتُ
रोमन लिपि: “Allahumma laka sumtu wa ‘ala rizqika aftartu”
हिंदी अर्थ: “ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा और तेरे दिए रिज़्क से इफ्तार किया।”
स्रोत: सुनन अबू दाऊद
यह दुआ बेहद सरल है और बच्चे भी आसानी से याद कर सकते हैं।
Roza Kholne Ki Dua Shia – शिया मज़हब की दुआ
शिया मज़हब में Roza Kholne Ki Dua थोड़ी अलग है:
अरबी:
اللَّهُمَّ لَكَ صُمْنَا وَعَلَىٰ رِزْقِكَ أَفْطَرْنَا فَتَقَبَّلْ مِنَّا إِنَّكَ أَنْتَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
रोमन लिपि: “Allahumma laka sumna wa ‘ala rizqika aftarna fataqabbal minna innaka antas sami’ul ‘aleem”
हिंदी अर्थ: “ऐ अल्लाह! हमने तेरे लिए रोज़ा रखा और तेरे रिज़्क पर इफ्तार किया, तो हम से कबूल फरमा, बेशक तू सुनने वाला और जानने वाला है।”
स्रोत: मफातीह अल-जिनान (शिया दुआ की किताब)
Nafil Roza Kholne Ki Dua – नफिल रोज़े की विशेष दुआ
नफिल रोज़ा (आशूरा, अरफा, सोमवार-गुरुवार, अय्यामे बीज़) खोलते समय भी वही दुआएं पढ़ी जाती हैं जो फर्ज़ रोज़े में पढ़ी जाती हैं।
लेकिन नफिल रोज़े की खासियत यह है कि:
- यह पूरी तरह अल्लाह की रज़ा के लिए होता है
- इसमें कफ्फारे का कोई मसला नहीं
- दुआ में अल्लाह से खास तौफीक मांगी जा सकती है
नफिल रोज़े के लिए अतिरिक्त दुआ:
अरबी:
اللَّهُمَّ إِنِّي صُمْتُ لَكَ تَطَوُّعًا فَتَقَبَّلْهُ مِنِّي
रोमन लिपि: “Allahumma inni sumtu laka tatawwu’an fataqabbalhu minni”
अर्थ: “ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए नफिल रोज़ा रखा, इसे मुझसे कबूल फरमा।”
Shab e Barat ka Roza Kholne Ki Dua – शबे बरात के रोज़े की दुआ
शबे बरात (15 शाबान) के दिन रखे गए रोज़े को खोलते समय विशेष दुआ:
अरबी:
اللَّهُمَّ اجْعَلْ صِيَامِي فِيهِ صِيَامَ الصَّائِمِينَ وَقِيَامِي فِيهِ قِيَامَ الْقَائِمِينَ
रोमन लिपि: “Allahumma-j’al siyami fihi siyamas sa’imeen wa qiyami fihi qiyamal qa’imeen”
अर्थ: “ऐ अल्लाह! मेरे इस रोज़े को सच्चे रोज़ेदारों के रोज़े जैसा और मेरी इबादत को सच्चे इबादत करने वालों जैसा बना दे।”
शबे बरात के रोज़े की खासियत:
- यह रज्जब-शाबान के नफिल रोज़ों में से है
- इस रात मग़फिरत और तौबा का विशेष समय है
- रोज़ा खोलते समय पिछले गुनाहों की माफ़ी की दुआ ज़रूर करें
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इफ्तार का सही तरीका – चरण-दर-चरण
चरण 1: अज़ान सुनने के तुरंत बाद इफ्तार करें (देरी न करें)
चरण 2: खजूर से इफ्तार करना सुन्नत है। अगर खजूर न हो तो पानी से।
चरण 3: इफ्तार से पहले या साथ में दुआ पढ़ें।
चरण 4: पहले कुछ हल्का खाएं, फिर नमाज़ पढ़ें, बाद में पूरा खाना।
तुलनात्मक तालिका – विभिन्न मज़हबों में Roza Kholne Ki Dua
| मज़हब/परंपरा | मुख्य दुआ | विशेषता |
|---|---|---|
| सुन्नी (हनफी, शाफई, मालिकी, हंबली) | ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوقُ | सबसे प्रचलित, सहीह हदीस से |
| शिया (इस्ना अशरी) | اللَّهُمَّ لَكَ صُمْنَا وَعَلَىٰ رِزْقِكَ أَفْطَرْنَا | मफातीह अल-जिनान से |
| नफिल रोज़ा | सभी सुन्नी दुआएं मान्य | कोई अलग दुआ ज़रूरी नहीं |
| शबे बरात | خاص मग़फिरत की दुआएं | तौबा और माफ़ी पर ज़ोर |
आम गलतियां जो लोग करते हैं (और उनसे कैसे बचें)
गलती 1: अज़ान से पहले इफ्तार कर लेना
- सही तरीका: अज़ान की पहली आवाज़ पर ही इफ्तार करें
गलती 2: बिना दुआ के इफ्तार करना
- सही तरीका: कम से कम एक छोटी दुआ ज़रूर पढ़ें
गलती 3: गैर-प्रामाणिक या बनावटी दुआएं पढ़ना
- चेतावनी: सिर्फ सहीह हदीस की दुआएं ही पढ़ें
गलती 4: इफ्तार में ज़्यादा खाना खा लेना
- सही तरीका: हल्का और संतुलित खाना खाएं
निष्कर्ष: आपकी Roza Kholne Ki Dua क्यों मायने रखती है
रोज़ा सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, यह आत्मा की तरबियत और अल्लाह से क़ुर्बत का ज़रिया है।
जब आप पूरे दिन इबादत करते हैं और इफ्तार के वक्त विनम्रता से अल्लाह के सामने दुआ मांगते हैं, तो यह आपकी रूहानियत को एक नया आयाम देता है।
यह लेख आपको सभी प्रामाणिक दुआएं देता है – चाहे आप roza kholne ki dua in hindi ढूंढ रहे हों, roza kholne ki dua in english, roza kholne ki dua in urdu, roza kholne ki dua bangla, या roza kholne ki dua in arabic।
याद रखें: दुआ की असली ताक़त शब्दों में नहीं, बल्कि आपके दिल की सच्चाई में है। अल्लाह हर ज़ुबान समझता है, हर दिल की आवाज़ सुनता है।
अगली बार जब आप इफ्तार करें, तो इन प्रामाणिक दुआओं को अपने दिल से पढ़ें। अल्लाह आपकी मेहनत को बर्बाद नहीं करेगा।
आपका रोज़ा मकबूल हो, आपकी दुआएं कबूल हों।
? अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या Roza Kholne Ki Dua पढ़ना ज़रूरी है?
दुआ पढ़ना फर्ज़ नहीं है लेकिन बेहद मुस्तहब (पसंदीदा) सुन्नत है। रसूलुल्लाह ﷺ हमेशा इफ्तार के वक्त दुआ करते थे। यह वक्त दुआ कबूल होने का होता है, इसलिए इसे गंवाना नहीं चाहिए।
2. अगर मुझे अरबी दुआ याद नहीं तो क्या करूं?
आप अपनी भाषा (हिंदी, उर्दू, बांग्ला) में भी दुआ कर सकते हैं। अल्लाह हर भाषा समझता है। लेकिन धीरे-धीरे अरबी दुआ याद करने की कोशिश करें क्योंकि यह सुन्नत है।
3. Roza kholne ki dua कब पढ़ें – इफ्तार से पहले या बाद?
इफ्तार से ठीक पहले या इफ्तार करते समय दुआ पढ़ें। कुछ उलेमा कहते हैं कि पहले निवाला मुंह में रखने से ठीक पहले दुआ पढ़ना सबसे बेहतर है।
4.क्या मैं सिर्फ हिंदी में दुआ कर सकता हूं?
हां, अल्लाह हर भाषा की दुआ कबूल करता है। लेकिन सुन्नत दुआओं को अरबी में पढ़ना ज़्यादा फज़ीलत वाला है। आप दोनों कर सकते हैं – पहले अरबी सुन्नत दुआ, फिर हिंदी में अपनी दुआएं।
5. Nafil roza kholne ki dua फर्ज़ रोज़े से अलग है क्या?
नहीं, दुआ वही रहती है। नफिल हो या फर्ज़, सभी प्रकार के रोज़ों के लिए एक ही प्रामाणिक दुआएं इस्तेमाल होती हैं।
6. अगर मैं भूल जाऊं और बिना दुआ के खा लूं?
कोई गुनाह नहीं है। रोज़ा सही है। लेकिन अगली बार ध्यान रखें। खाना शुरू करने के बाद भी आप दुआ कर सकते हैं।
7. इफ्तार के बाद कौन सी दुआ पढ़ें?
इफ्तार के बाद यह दुआ पढ़ें:
अरबी: اللَّهُمَّ تَقَبَّلْ مِنِّي صَوْمِي अर्थ: “ऐ अल्लाह! मेरा रोज़ा कबूल फरमा।”
8. roza kholne ki dua shia और सुन्नी में फर्क क्यों है?
मूल दुआएं दोनों में लगभग एक जैसी हैं, बस शब्दों और रिवायतों के स्रोत अलग हैं। दोनों वैध हैं। मुख्य बात निय्यत की पाकीज़गी है।
Written by: Ahmad Raza
Credentials: Islamic Studies Content Writer
Methodology:
- Sahih Bukhari, Sahih Muslim, Sunan Abu Dawood से सत्यापित
- Classical Fiqh references (हनफी, शाफई, मालिकी, हंबली)
- Mafatih al-Jinan (शिया स्रोत) से cross-verification
- कोई कमज़ोर या अप्रमाणित रिवायत शामिल नहीं
- सभी हदीस नंबर verified (2024-2025 digital databases)
- अरबी भाषा विशेषज्ञों द्वारा अनुवाद की सटीकता जांची गई
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