जब मस्जिद की मीनार से अज़ान की पवित्र आवाज़ गूंजती है, तो यह सिर्फ नमाज़ का बुलावा नहीं होता – यह अल्लाह की याद का एक खूबसूरत माध्यम है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अज़ान सुनने के बाद एक विशेष दुआ पढ़ना बेहद फ़ज़ीलत वाला अमल है? यह दुआ पैगंबर मुहम्मद ﷺ की शफ़ा’अत (सिफारिश) का ज़रिया बन सकती है। इस लेख में हम Azaan Ke Baad Ki Dua की पूरी जानकारी, उसके अरबी पाठ, सही उच्चारण और गहरे अर्थ के साथ प्रस्तुत करेंगे।
Azaan Ke Baad Ki Dua क्यों इतनी अहम है?
पैगंबर मुहम्मद ﷺ ने फ़रमाया: “जो व्यक्ति अज़ान सुनकर यह दुआ पढ़ता है, उसके लिए क़यामत के दिन मेरी शफ़ा’अत वाजिब हो जाती है।” (सहीह बुखारी, हदीस 614)
यह हदीस साबित करती है कि अज़ान के तुरंत बाद यह दुआ पढ़ना अत्यंत महत्वपूर्ण सुन्नत है। यह दुआ केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि पैगंबर ﷺ के प्रति हमारे प्यार और सम्मान की अभिव्यक्ति है।
Azaan Ke Baad Ki Dua in Arabic (पूर्ण अरबी पाठ)
अज़ान समाप्त होने के तुरंत बाद यह दुआ पढ़नी चाहिए:

اللَّهُمَّ رَبَّ هَذِهِ الدَّعْوَةِ التَّامَّةِ، وَالصَّلَاةِ الْقَائِمَةِ، آتِ مُحَمَّدًا الْوَسِيلَةَ وَالْفَضِيلَةَ، وَابْعَثْهُ مَقَامًا مَحْمُودًا الَّذِي وَعَدْتَهُ
रोमन में उच्चारण (Transliteration)
“Allahumma Rabba hadhihid-da’watit-tammah, was-salatil-qa’imah, aati Muhammadanil-waseelata wal-fadheelah, wab’athu maqamam-mahmoodanil-ladhi wa’adtahu.”
हिंदी अर्थ
“ऐ अल्लाह! इस परिपूर्ण पुकार और स्थापित नमाज़ के मालिक, मुहम्मद ﷺ को वसीला (जन्नत में सर्वोच्च स्थान) और फ़ज़ीला (विशेष उच्चता) प्रदान कर, और उन्हें वह प्रशंसनीय स्थान दे जिसका तूने उनसे वादा किया है।”
Azaan Ke Baad Ki Dua in English
“O Allah, Lord of this perfect call and established prayer, grant Muhammad the means (Al-Waseelah) and excellence (Al-Fadheelah), and raise him to the praised station which You have promised him.”
Azaan Ke Baad Ki Dua के प्रत्येक शब्द का गहरा अर्थ
अल-वसीला (الْوَسِيلَةَ): यह जन्नत में सबसे ऊंचा दर्जा है, जो केवल एक बंदे को मिलेगा। पैगंबर ﷺ ने कहा: “वसीला जन्नत में एक ऐसा स्थान है जो केवल अल्लाह के एक बंदे के लिए उचित है, और मुझे आशा है कि वह मैं ही हूं।” (सहीह मुस्लिम, हदीस 384)
अल-फ़ज़ीला (الْفَضِيلَةَ): यह विशेष श्रेष्ठता और उत्कृष्टता को दर्शाता है।
मक़ाम-ए-महमूद (مَقَامًا مَحْمُودًا): यह वह प्रशंसनीय स्थान है जहां पैगंबर ﷺ क़यामत के दिन पूरी मानवता के लिए शफ़ा’अत करेंगे।
Disclaimer:
यहाँ दी गई दुआएँ धार्मिक शिक्षा के उद्देश्य से हैं। दुआ की स्वीकृति नीयत और दिल की सच्चाई पर निर्भर करती है, भाषा या शब्दों पर नहीं। विशेष धार्मिक मामलों में योग्य आलिम से परामर्श करें।
अज़ान के बाद की अतिरिक्त सुन्नत
1. दरूद शरीफ़ पढ़ना
मुख्य दुआ के बाद पैगंबर ﷺ पर दरूद भेजना अत्यंत मुस्तहब है:
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ
“Allahumma salli ‘ala Muhammadin wa ‘ala aali Muhammad”
“ऐ अल्लाह! मुहम्मद ﷺ और उनकी संतान पर रहमत भेज।”
2. अपनी ज़रूरतों की दुआ
पैगंबर ﷺ ने फ़रमाया: “अज़ान और इक़ामत के बीच की दुआ रद्द नहीं होती।” (सुनन अबू दाऊद, हदीस 521)
इस समय अपनी व्यक्तिगत ज़रूरतों, परिवार की सलामती, और दुनिया व आख़िरत की भलाई के लिए दुआ करना बेहद फ़ायदेमंद है।
अज़ान सुनते समय क्या करें?
अज़ान के शब्दों को दोहराना
जब मुअज़्ज़िन अज़ान देता है, तो उसके शब्दों को दोहराना सुन्नत है। पैगंबर ﷺ ने फ़रमाया: “जब तुम अज़ान सुनो, तो वही कहो जो मुअज़्ज़िन कहता है।” (सहीह बुखारी, हदीस 611)
अपवाद: जब मुअज़्ज़िन “حَيَّ عَلَى الصَّلَاةِ” (Hayya ‘alas-salah – नमाज़ की ओर आओ) और “حَيَّ عَلَى الْفَلَاحِ” (Hayya ‘alal-falah – सफलता की ओर आओ) कहे, तो हम कहते हैं:
لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ
“La hawla wa la quwwata illa billah”
“अल्लाह के सिवा कोई शक्ति और ताकत नहीं।”
Azaan Ke Baad Ki Dua Shia (शिया परंपरा)
शिया मुसलमानों में भी Azaan Ke Baad Ki Dua समान है, हालांकि वे अतिरिक्त रूप से इमाम अली (रज़ि०) और अहलेबैत पर भी दरूद भेजते हैं:
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ
इस्लाम की विभिन्न शाखाओं में मूल दुआ में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं है, क्योंकि यह सीधे हदीस से ली गई है।
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दुआ पढ़ने का सही समय और तरीक़ा
- समय: अज़ान पूरी होने के तुरंत बाद
- स्थिति: किसी भी हाल में (खड़े, बैठे, लेटे)
- ध्यान: अर्थ को समझते हुए दिल से पढ़ें
- भाषा: अरबी में पढ़ना सबसे उत्तम है
महत्वपूर्ण सुझाव
यदि आप अरबी में सहज नहीं हैं, तो पहले रोमन उच्चारण से शुरुआत करें और धीरे-धीरे अरबी सीखने का प्रयास करें। अर्थ को समझना दुआ को जीवंत बनाता है।
फ़ज़ील के दिनों में विशेष महत्व
जुमे की अज़ान: जुमे के दिन अज़ान के बाद यह दुआ पढ़ना और भी अधिक सवाब का कारण है।
रमज़ान में: पवित्र महीने में हर अज़ान के बाद इस दुआ को नियमित रूप से पढ़ने की आदत बनाएं।
फ़ज्र की अज़ान: सुबह की पहली अज़ान के बाद यह दुआ पढ़ना दिन की शुरुआत को बरकत से भर देता है।
सामान्य ग़लतियां जिनसे बचें
- अज़ान के दौरान बातचीत: अज़ान सुनते समय बात करना मकरूह है
- तेज़ी से पढ़ना: दुआ को जल्दबाज़ी में नहीं बल्कि इत्मीनान से पढ़ें
- अर्थ की अनदेखी: सिर्फ शब्द दोहराना काफ़ी नहीं, अर्थ पर विचार करें
- नियमितता की कमी: हर अज़ान के बाद यह अमल करने की कोशिश करें
बच्चों को सिखाने का तरीक़ा
छोटे बच्चों को यह दुआ सिखाना माता-पिता की ज़िम्मेदारी है। शुरुआत में:
- एक-एक शब्द धीरे-धीरे सिखाएं
- दुआ का अर्थ सरल भाषा में समझाएं
- रोज़ अभ्यास कराएं
- खुद नमूना बनें और हर अज़ान के बाद पढ़ें
जब बच्चे इस दुआ को नियमित रूप से पढ़ने लगें, तो यह उनकी ज़िंदगी भर की नेक आदत बन जाएगी।
Azaan Ke Baad Ki Dua in Urdu (उर्दू में)
उर्दू बोलने वाले मुसलमानों के लिए:
اللہم رب ہذہ الدعوۃ التامۃ، والصلوٰۃ القائمۃ، آت محمدًا الوسیلۃ والفضیلۃ، وابعثہ مقامًا محمودًا الذی وعدتہ
उर्दू अनुवाद:
“اے اللہ! اس مکمل پکار اور قائم ہونے والی نماز کے رب، محمد ﷺ کو وسیلہ اور فضیلت عطا فرما، اور انہیں وہ مقام محمود عطا کر جس کا تو نے ان سے وعدہ کیا ہے۔”
वैज्ञानिक और आध्यात्मिक लाभ
मानसिक शांति: नियमित रूप से यह दुआ पढ़ना दिमाग़ को सकून देता है।
याद की मज़बूती: अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की याद दिल में ताज़ा रहती है।
समुदाय से जुड़ाव: जब पूरा समुदाय एक साथ यह दुआ पढ़ता है, तो यह इस्लामी भाईचारे को मज़बूत करता है।
आख़िरत की तैयारी: यह दुआ हमें क़यामत की याद दिलाती है और नेक अमल की तरफ़ प्रेरित करती है।
डिजिटल युग में Azaan Ke Baad Ki Dua की पाबंदी
आजकल स्मार्टफोन में अज़ान की रिमाइंडर सेट करना आसान है। अनेक इस्लामिक ऐप्स अज़ान के बाद दुआ की याद दिलाते हैं। तकनीक का सही इस्तेमाल करके हम अपनी दीनी ज़िम्मेदारियों को बेहतर तरीक़े से निभा सकते हैं।
निष्कर्ष: Azaan Ke Baad Ki Dua
Azaan Ke Baad Ki Dua सिर्फ़ एक रस्म नहीं, बल्कि पैगंबर मुहम्मद ﷺ से अपने गहरे प्यार और अल्लाह की इबादत का एक खूबसूरत इज़हार है। जब हम यह दुआ पूरी तवज्जो और समझ के साथ पढ़ते हैं, तो हम वास्तव में अपने ईमान को ताज़ा करते हैं और आख़िरत की तैयारी करते हैं।
यह छोटी सी दुआ, जिसे पढ़ने में केवल कुछ सेकंड लगते हैं, क़यामत के दिन पैगंबर ﷺ की शफ़ा’अत का ज़रिया बन सकती है। क्या इससे बड़ा कोई सौभाग्य हो सकता है?
आज से ही यह संकल्प लें कि हर अज़ान के बाद यह दुआ पढ़ेंगे। अपने परिवार और दोस्तों को भी इस सुन्नत के बारे में बताएं। याद रखें, नेक काम में देरी शैतान की चाल है। अभी, इसी वक़्त से शुरुआत करें और इस मुबारक अमल को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: क्या Azaan Ke Baad Ki Dua हर अज़ान के बाद पढ़नी ज़रूरी है?
यह फ़र्ज़ नहीं है, लेकिन अत्यंत ज़रूरी सुन्नत है। पांचों वक़्त की अज़ान के बाद यह दुआ पढ़ने से बेशुमार सवाब मिलता है और पैगंबर ﷺ की शफ़ा’अत मिलने की गारंटी है।
प्रश्न 2: अगर अज़ान रेडियो या फ़ोन पर सुनें तो क्या यह दुआ पढ़ें?
हां, बिल्कुल। चाहे अज़ान मस्जिद से सुनाई दे या किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से, दुआ पढ़ने का हुक्म वही रहता है। हालांकि मस्जिद में जाकर नमाज़ पढ़ना हमेशा बेहतर है।
प्रश्न 3: क्या महिलाएं भी यह दुआ पढ़ सकती हैं?
बिल्कुल। यह दुआ हर मुसलमान – मर्द, औरत, बच्चे – सभी के लिए है। घर में रहकर अज़ान सुनने वाली महिलाओं को भी यह दुआ नियमित रूप से पढ़नी चाहिए।
प्रश्न 4: Azaan Ke Baad Ki Dua अरबी में न जानने पर क्या करें?
शुरुआत में रोमन लिपि से पढ़ें, लेकिन साथ-साथ अरबी सीखने की कोशिश करें। अर्थ को समझना भी उतना ही अहम है। धीरे-धीरे आप अरबी में महारत हासिल कर लेंगे।
प्रश्न 5: क्या नमाज़ पढ़ते समय अज़ान सुनाई दे तो यह दुआ कब पढ़ें?
अगर आप नमाज़ में हैं और अज़ान हो जाती है, तो पहले नमाज़ पूरी करें। नमाज़ के बाद यह दुआ पढ़ना जायज़ है। नमाज़ में अज़ान के शब्द दोहराना मना है।
प्रश्न 6: फ़ज्र की अज़ान से पहले वाली अज़ान (अज़ान-ए-सानी) के बाद भी यह दुआ पढ़ें?
फ़ज्र की दोनों अज़ानों के बाद यह दुआ पढ़नी चाहिए। पहली अज़ान (सहरी ख़त्म होने की) और दूसरी अज़ान (नमाज़ के वक़्त की) दोनों के बाद।
प्रश्न 7: क्या अज़ान के तुरंत बाद ही यह दुआ पढ़नी होती है?
हां, अज़ान ख़त्म होते ही तुरंत यह दुआ पढ़नी चाहिए। देरी करने से बरकत कम हो सकती है। अज़ान के शब्द दोहराने के तुरंत बाद यह दुआ पढ़ना सबसे उत्तम है।
प्रश्न 8: Shia और Sunni में इस दुआ में कोई फ़र्क है?
मूल दुआ दोनों में एक जैसी है क्योंकि यह सहीह हदीस से साबित है। कुछ शिया विद्वान अतिरिक्त रूप से अहलेबैत पर दरूद भेजने की सलाह देते हैं, लेकिन बुनियादी दुआ समान है।
Written by: Ahmad Raza
Credentials: Islamic Studies Content Writer
क्रियाविधि: यह लेख इस्लामिक शिक्षाओं के गहन अध्ययन और प्रामाणिक हदीस ग्रंथों के संदर्भ के आधार पर तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य मुसलमानों को उनकी दैनिक इबादत में मदद करना है।
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