Janaze Ki Namaz Ki Dua: जनाज़े की दुआ और नमाज़ का तरीका

जनाज़े की नमाज़ मुसलमान के लिए फ़र्ज़-ए-किफ़ाया है। इसमें चार तकबीरें होती हैं और रुकू या सजदा नहीं होता। जनाज़े की नमाज़ की दुआ का मुख्य उद्देश्य मृतक के लिए मग़फ़िरत, रहमत और आख़िरत में भलाई की दुआ करना है।

इस लेख में Janaze Ki Namaz Ki Dua अरबी, हिंदी उच्चारण और हिंदी अर्थ के साथ दी गई है। साथ ही, पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी तकबीर के बाद पढ़े जाने वाले अमल, पुरुष और महिला मृतक के लिए दुआ के शब्द, छोटे बच्चे के जनाज़े की दुआ तथा जनाज़े की नमाज़ पढ़ने का आसान तरीका भी बताया गया है।

अगर आप janaze ki dua in Hindi, English या Urdu, या जनाज़े की नमाज़ का तरीका खोज रहे हैं, तो नीचे पूरी जानकारी चरण-दर-चरण दी गई है। अमल में मसलक के अनुसार कुछ अंतर हो सकते हैं, इसलिए स्थानीय आलिम या इमाम की हिदायत को प्राथमिकता दें।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। सभी दुआएं सहीह हदीस और विश्वसनीय इस्लामी स्रोतों से सत्यापित हैं। किसी भी धार्मिक मामले में संदेह होने पर अपने स्थानीय आलिम या मुफ़्ती से परामर्श लें। यह लेख किसी धार्मिक फ़तवे का विकल्प नहीं है।

Table of Contents

जनाज़े की नमाज़ क्या है? Janaze Ki Namaz का तरीका और महत्व

जनाज़े की नमाज़ (صلاة الجنازة) किसी मुसलमान की मृत्यु के बाद उसके लिए पढ़ी जाने वाली विशेष नमाज़ है। इसे फ़र्ज़-ए-किफ़ाया माना जाता है। इसमें सामान्य नमाज़ की तरह रुकू और सजदा नहीं होता, बल्कि खड़े होकर चार तकबीरें कही जाती हैं और मृतक के लिए दुआ की जाती है।

जनाज़े की नमाज़ की मुख्य विशेषताएं

  • चार तकबीरें होती हैं।
  • इसमें रुकू और सजदा नहीं होता।
  • नमाज़ खड़े होकर अदा की जाती है।
  • क़िबला की तरफ़ रुख़ किया जाता है।
  • मृतक के लिए मग़फ़िरत और रहमत की दुआ की जाती है।

Janaze Ki Namaz Ki Dua – पहली तकबीर

Janaze Ki Namaz Ki Dua - पहली तकबीर

पहली तकबीर कहने के बाद सना पढ़ी जाती है। नीचे सना का अरबी पाठ, हिंदी उच्चारण और अर्थ दिया गया है।:

अरबी:

سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ، وَتَبَارَكَ اسْمُكَ، وَتَعَالَىٰ جَدُّكَ، وَلَا إِلَٰهَ غَيْرُكَ

उच्चारण (Transliteration):

Subhanakal-lahumma wa bihamdika, wa tabarakas-muka, wa ta’ala jadduka, wa la ilaha ghairuk

अर्थ:

“ऐ अल्लाह! तू पाक है और तेरी ही हम्द (प्रशंसा) है। तेरा नाम बरकत वाला है और तेरी शान बुलंद है। तेरे सिवा कोई माबूद (पूज्य) नहीं।”

Janaze Ki Namaz Ki Dua – दूसरी तकबीर

Janaze Ki Namaz Ki Dua - दूसरी तकबीर

दूसरी तकबीर के बाद दरूद शरीफ़ (दुरूद-ए-इब्राहीम) पढ़ा जाता है:

अरबी:

اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ، اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا بَارَكْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ

उच्चारण:

Allahumma salli ‘ala Muhammadin wa ‘ala ali Muhammadin, kama sallaita ‘ala Ibrahima wa ‘ala ali Ibrahim, innaka Hameedum Majeed. Allahumma barik ‘ala Muhammadin wa ‘ala ali Muhammadin, kama barakta ‘ala Ibrahima wa ‘ala ali Ibrahim, innaka Hameedum Majeed

अर्थ:

“ऐ अल्लाह! मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और उनके परिवार पर रहमत भेज, जैसे तूने इब्राहीम और उनके परिवार पर भेजी। बेशक तू तारीफ़ के लायक़ और बुज़ुर्गी वाला है। ऐ अल्लाह! मुहम्मद और उनके परिवार पर बरकत नाज़िल फ़रमा, जैसे तूने इब्राहीम और उनके परिवार पर नाज़िल फ़रमाई।”

तीसरी तकबीर की दुआ – मुख्य Janaze Ki Namaz Ki Dua

तीसरी तकबीर के बाद मृतक के लिए दुआ की जाती है। यही वह हिस्सा है जिसे बहुत से लोग Janaze Ki Namaz Ki Dua या Janaze Ki Dua के नाम से खोजते हैं। पुरुष और महिला मृतक के लिए अरबी सर्वनामों में अंतर हो सकता है, इसलिए नीचे दोनों का तरीका स्पष्ट किया गया है।

पुरुष के लिए जनाज़े की दुआ:

जनाज़े की नमाज़ दुआ

अरबी:

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ، وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ، وَأَكْرِمْ نُزُلَهُ، وَوَسِّعْ مُدْخَلَهُ، وَاغْسِلْهُ بِالْمَاءِ وَالثَّلْجِ وَالْبَرَدِ، وَنَقِّهِ مِنَ الْخَطَايَا كَمَا نَقَّيْتَ الثَّوْبَ الْأَبْيَضَ مِنَ الدَّنَسِ، وَأَبْدِلْهُ دَارًا خَيْرًا مِنْ دَارِهِ، وَأَهْلًا خَيْرًا مِنْ أَهْلِهِ، وَزَوْجًا خَيْرًا مِنْ زَوْجِهِ، وَأَدْخِلْهُ الْجَنَّةَ، وَأَعِذْهُ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ وَمِنْ عَذَابِ النَّارِ

उच्चारण:

Allahummagh-fir lahu warhamhu, wa ‘afihi wa’fu ‘anhu, wa akrim nuzulahu, wa wassi’ mudkhalahu, waghsilhu bilma’i waththalji walbarad, wa naqqihi minal-khataya kama naqqaital-thawbal-abyada minad-danas, wa abdilhu daran khairan min darihi, wa ahlan khairan min ahlihi, wa zawjan khairan min zawjihi, wa adkhilhul-jannata, wa a’idhu min ‘adhabil-qabri wa min ‘adhabin-nar

अर्थ:

“ऐ अल्लाह! इस (मृतक) को बख़्श दे और इस पर रहम फ़रमा। इसे आफ़ियत दे और इसे माफ़ कर दे। इसके ठहरने की जगह को इज़्ज़त वाली बना। इसके दाख़िले को वसीअ (विस्तृत) कर। इसे पानी, बर्फ़ और ओलों से धो दे। इसे गुनाहों से ऐसे साफ़ कर दे जैसे तूने सफ़ेद कपड़े को मैल से साफ़ किया। इसे इसके घर से बेहतर घर अता फ़रमा, इसके घर वालों से बेहतर घर वाले अता फ़रमा, और इसकी बीवी से बेहतर बीवी अता फ़रमा। इसे जन्नत में दाख़िल कर और क़ब्र के अज़ाब और जहन्नम के अज़ाब से बचा।”

महिला के लिए जनाज़े की दुआ:

महिला मृतक के लिए दुआ में पुल्लिंग सर्वनामों की जगह स्त्रीलिंग सर्वनामों का प्रयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए لَهُ (lahu) की जगह لَهَا (laha) आता है। पूरी दुआ नीचे एक साथ दी जानी चाहिए ताकि पाठक को अलग-अलग शब्द खोजने की आवश्यकता न पड़े।

अरबी:

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهَا وَارْحَمْهَا، وَعَافِهَا وَاعْفُ عَنْهَا… (शेष दुआ समान, केवल सर्वनाम बदलें)

छोटे बच्चे के जनाज़े की दुआ

छोटे बच्चे के लिए विशेष दुआ

छोटे बच्चे के जनाज़े के लिए पढ़ी जाने वाली दुआ वयस्क मृतक की दुआ से अलग हो सकती है। नीचे बच्चे के लिए बताई गई दुआ, उसका उच्चारण और हिंदी अर्थ दिया गया है।:

अरबी:

اللَّهُمَّ اجْعَلْهُ فَرَطًا لِوَالِدَيْهِ، وَذُخْرًا، وَشَفِيعًا مُجَابًا، اللَّهُمَّ ثَقِّلْ بِهِ مَوَازِينَهُمَا، وَأَعْظِمْ بِهِ أُجُورَهُمَا، وَأَلْحِقْهُ بِصَالِحِ الْمُؤْمِنِينَ، وَاجْعَلْهُ فِي كَفَالَةِ إِبْرَاهِيمَ، وَقِهِ بِرَحْمَتِكَ عَذَابَ الْجَحِيمِ

उच्चारण:

Allahummaj-‘alhu faratan li-walidaihi, wa dhukhran, wa shafi’an mujaba. Allahumma thaqqil bihi mawazeenahuma, wa a’zim bihi ujurahuma, wa alhiqhu bi-salihil-mu’mineen, waj-‘alhu fi kafalati Ibrahim, wa qihi bi-rahmatika ‘adhabal-jaheem

अर्थ:

“ऐ अल्लाह! इस बच्चे को इसके माता-पिता के लिए आगे भेजा गया (सवाब) बना दे, खज़ाना बना दे और ऐसी सिफ़ारिश बना दे जो क़बूल हो। ऐ अल्लाह! इसके ज़रिये उनके (माता-पिता के) पलड़े भारी कर दे, उनके अज्र को बढ़ा दे। इसे नेक ईमान वालों के साथ मिला दे और इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की देखभाल में रख। अपनी रहमत से इसे जहन्नम के अज़ाब से बचा।”

Janaze Ki Namaz Ki Dua – चौथी तकबीर

Janaze Ki Namaz Ki Dua - चौथी तकबीर

चौथी तकबीर जनाज़े की नमाज़ की अंतिम तकबीर होती है। इसके बाद पढ़े जाने वाले अमल में फ़िक़्ही मसलक के अनुसार कुछ अंतर मिल सकता है। अपने स्थानीय इमाम या आलिम की बताई हुई विधि को प्राथमिकता दें।:

अरबी:

اللَّهُمَّ لَا تَحْرِمْنَا أَجْرَهُ، وَلَا تَفْتِنَّا بَعْدَهُ، وَاغْفِرْ لَنَا وَلَهُ

उच्चारण:

Allahumma la tahrimna ajrahu, wa la taftinna ba’dahu, waghfir lana wa lahu

अर्थ:

“ऐ अल्लाह! हमें इसके (जनाज़े में शरीक होने के) सवाब से महरूम न कर। इसके बाद हमें फ़ितने में न डाल। हमें और इसे माफ़ कर दे।”

इसके बाद दाएं और बाएं “अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह” कहकर सलाम फेर दिया जाता है।

Janaze Ki Namaz Ki Dua in Hindi, English और Urdu

Janaze Ki Namaz Ki Dua in Hindi:

ऊपर दी गई सभी दुआओं के अर्थ हिंदी में विस्तार से बताए गए हैं। मुख्य बात यह है कि हम मृतक की माफ़ी, रहमत, जन्नत और अज़ाब से नजात मांग रहे हैं।

Janaze Ki Namaz Ki Dua in English:

Janaze ki namaz ki dua in English के लिए मुख्य दुआ का अर्थ:

“O Allah, forgive him and have mercy on him. Grant him wellness and pardon him. Make his resting place honorable and spacious. Wash him with water, snow, and hail. Cleanse him from sins as white cloth is cleansed from dirt. Grant him a home better than his home, a family better than his family, and a spouse better than his spouse. Admit him to Paradise and protect him from the punishment of the grave and the Fire.”

Janaze Ki Namaz Ki Dua in Urdu:

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ، وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ، وَأَكْرِمْ نُزُلَهُ، وَوَلْلْ بِالْمَاءِ وَالثَّلْجِ وَالْبَرَدِ، وَنَقِّهِ مِنَ الْخَطَايَا كَمَا نَقَّيْتَ الثَّوْبَ الْأَبْيَبِنَبَ الْأَبَ دَارًا خَيْرًا مِنْ دَارِهِ، وَأََهْلًا خَيْرًا مِنْ أَهْلِهِ، وَزَوْجًا خَيْرْرً مِنْ زَو وَأَعِذْهُ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ وَمِنْ عَذَابِ النَّارِ

जनाज़े की नमाज़ पढ़ने का तरीका: 4 तकबीरों की आसान विधि

जनाज़े की नमाज़ पढ़ने का तरीका समझने के लिए चार तकबीरों का क्रम याद रखना सबसे आसान है। इसमें रुकू और सजदा नहीं होता। नीचे एक संक्षिप्त क्रम दिया गया है, जबकि अलग-अलग फ़िक़्ही मसलकों में कुछ विवरण अलग हो सकते हैं।

चरण 1: नीयत करें कि मैं अल्लाह के लिए फ़लां व्यक्ति का जनाज़ा पढ़ रहा/रही हूं।

चरण 2: हाथ उठाकर पहली तकबीर (अल्लाहु अकबर) कहें, फिर सना पढ़ें।

चरण 3: हाथ उठाकर दूसरी तकबीर कहें, फिर दरूद शरीफ़ पढ़ें।

चरण 4: हाथ उठाकर तीसरी तकबीर कहें, फिर मृतक के लिए दुआ पढ़ें (ऊपर बताई गई janaze ki namaz ki dua)।

चरण 5: हाथ उठाकर चौथी तकबीर कहें, फिर अंतिम दुआ पढ़ें।

चरण 6: दाएं-बाएं सलाम फेरें।

जनाज़े की नमाज़ के जरूरी नोट्स:

जनाज़े की नमाज़ के कुछ अमल में अलग-अलग फ़िक़्ही मसलकों के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए अपने स्थानीय इमाम या विश्वसनीय आलिम की हिदायत को प्राथमिकता दें।

  • इमाम के पीछे पढ़ते समय केवल मन में दुआएं पढ़ें
  • मृतक का सिर आपकी दाईं ओर रखा जाता है
  • पुरुष खड़े होकर और महिलाएं भी खड़े होकर ही यह नमाज़ पढ़ती हैं

अन्य संबंधित दुआएं: Janaze Ki Namaz

क़ब्रिस्तान जाते समय दुआ:

अरबी:

السَّلَامُ عَلَيْكُمْ أَهْلَ الدِّيَارِ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُسْلِمِينَ، وَإِنَّا إِنْ شَاءَ اللَّهُ بِكُمْ لَاحِقُونَ، نَسْأَلُ اللَّهَ لَنَا وَلَكُمُ الْعَافِيَةَ

उच्चारण:

Assalamu ‘alaikum ahla-ddiyari minal-mu’mineena wal-muslimeen, wa inna in-sha Allahu bikum lahiqoon, nas’alullaha lana wa lakumul-‘afiyah

अर्थ:

“सलाम हो तुम पर, ऐ इस जगह के रहने वालो मोमिनों और मुसलमानों! और हम, इन्शा अल्लाह, तुम्हारे साथ मिलने वाले हैं। हम अल्लाह से अपने लिए और तुम्हारे लिए आफ़ियत मांगते हैं।”

मृतक की क़ब्र पर दुआ:

अरबी:

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ، اللَّهُمَّ ثَبِّتْهُ

उच्चारण:

Allahummagh-fir lahu, Allahumma thabbithu

अर्थ:

“ऐ अल्लाह! इसे बख़्श दे। ऐ अल्लाह! इसे (जवाब देने में) साबित क़दम रख।”

Read Also: Dua e Masura in English

Janaze Ki Namaz में होने वाली सामान्य गलतियां

ग़लती 1: तकबीरों के बीच हाथ न बांधना – तकबीर के बाद हाथ रखने और उठाने के तरीके में फ़िक़्ही मसलकों के अनुसार अंतर हो सकता है। अपने स्थानीय इमाम की बताई हुई विधि का पालन करें।

ग़लती 2: ग़लत सर्वनाम का प्रयोग – पुरुष के लिए “लहु” और महिला के लिए “लहा” का सही प्रयोग ज़रूरी है।

ग़लती 3: जल्दबाज़ी में दुआ छोड़ना – अगर पूरी दुआ याद न हो तो कम से कम मुख्य भाग (तीसरी तकबीर की दुआ) ज़रूर पढ़ें।

ग़लती 4: सलाम न फेरना – नमाज़ सलाम से ही पूरी होती है।

निष्कर्ष

Janaze Ki Namaz Ki Dua मृतक के लिए मग़फ़िरत, रहमत और आख़िरत में भलाई मांगने की महत्वपूर्ण दुआ है। जनाज़े की नमाज़ में चार तकबीरें होती हैं और इसमें मृतक के लिए दुआ की जाती है।

इस लेख में जनाज़े की नमाज़ की दुआ अरबी पाठ, उच्चारण और हिंदी अर्थ के साथ दी गई है। साथ ही पुरुष और महिला मृतक के लिए दुआ, छोटे बच्चे के जनाज़े की दुआ, हिंदी, English और Urdu में जानकारी तथा जनाज़े की नमाज़ पढ़ने का संक्षिप्त तरीका भी शामिल किया गया है।

अमल के कुछ विवरण फ़िक़्ही मसलक के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी विशेष स्थिति में अपने स्थानीय इमाम या विश्वसनीय आलिम से मार्गदर्शन लेना बेहतर है।

अल्लाह हम सभी को सही तरीक़े से जनाज़े की नमाज़ पढ़ने और मरने के बाद अपनी रहमत में जगह देने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

? FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. क्या औरतें जनाज़े की नमाज़ पढ़ सकती हैं?

जी हाँ, औरतें जनाज़े की नमाज़ पढ़ सकती हैं। हालांकि बेहतर यह है कि वे घर पर रहकर मृतक के लिए दुआ करें, लेकिन अगर वे क़ब्रिस्तान जाएं तो भी जायज़ है।

2. अगर janaze ki namaz ki dua याद न हो तो क्या करें?

अगर पूरी दुआ याद नहीं है तो कम से कम “اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ” (अल्लाहुम्माग़फ़िर लहु वरहम्हु) कई बार पढ़ें। यह भी काफ़ी है।

3. क्या हर तकबीर पर हाथ उठाने ज़रूरी हैं?

अधिकांश विद्वानों के अनुसार हर तकबीर पर हाथ उठाना सुन्नत है, हालांकि कुछ विद्वान केवल पहली तकबीर पर हाथ उठाना ज़रूरी मानते हैं।

4. जनाज़े की नमाज़ कितनी बार पढ़ी जा सकती है?

एक ही मृतक के लिए एक बार जनाज़े की नमाज़ पढ़ना काफ़ी है। अगर कोई पहली बार में शामिल नहीं हो पाया तो बाद में भी पढ़ सकता है।

5. क्या बिना वुज़ू के जनाज़े की नमाज़ पढ़ सकते हैं?

नहीं, जनाज़े की नमाज़ के लिए भी वुज़ू (पवित्रता) ज़रूरी है, जैसे अन्य नमाज़ों के लिए।

6. मृतक के सिर की दिशा कैसी होनी चाहिए?

मृतक का सिर नमाज़ी की दाईं ओर और पैर बाईं ओर होने चाहिए। इमाम मृतक की छाती के बराबर खड़ा होता है।

7. क्या ग़ैर-मुस्लिम के लिए जनाज़ा पढ़ सकते हैं?

नहीं, इस्लामी शरीअत में केवल मुसलमानों के लिए जनाज़ा पढ़ा जाता है। ग़ैर-मुस्लिम के लिए दुआ करना मना है।

8. अगर इमाम तेज़ी से पढ़े तो क्या करें?

इमाम के पीछे जितनी दुआ पढ़ पाएं पढ़ें। अगर इमाम अगली तकबीर कह दे तो अपनी दुआ छोड़कर उसके साथ तकबीर कहें।

Written by: Ahmad Raza

Credentials: Islamic Studies Content Writer

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