मस्जिद अल्लाह का घर है। यह वह पाक जगह है जहाँ मुसलमान नमाज़ अदा करते हैं, कुरआन पढ़ते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं। हमारे नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ ने मस्जिद में दाखिल होते वक्त एक खास दुआ पढ़ने का हुक्म दिया है।
Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua पढ़कर मस्जिद में कदम रखने से बंदे का अल्लाह से रिश्ता और मज़बूत होता है। यह दुआ हदीस से साबित है और हर मुसलमान के लिए इसे याद करना और पढ़ना बहुत ज़रूरी है।
जब भी कोई मुसलमान मस्जिद में जाने का इरादा करे तो उसे चाहिए कि पहले बिस्मिल्लाह कहे, फिर नबी ﷺ पर दुरूद भेजे, और उसके बाद यह दुआ पढ़े। यह सुन्नत का तरीका है जो हमें रहमत और बरकत की तरफ ले जाता है।
Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Arabic
मस्जिद में दाखिल होते वक्त यह दुआ पढ़ी जाती है:
اَللّٰهُمَّ افْتَحْ لِيْ اَبْوَابَ رَحْمَتِكَ
Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua – Transliteration (Roman English)
Allahummaf-tah lee abwaaba rahmatik
Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Hindi With तर्जुमा
Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Hindi:
Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua Meaning in Hindi:
“ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।”
Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in English – Meaning
“O Allah! Open for me the doors of Your Mercy.”
Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Urdu
“اے اللہ! میرے لیے اپنی رحمت کے دروازے کھول دے۔”
Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua with Tarjuma – हदीस का हवाला
यह दुआ एक साहिह हदीस से साबित है।
हज़रत अबू उसैद अल-अंसारी رضی اللہ عنہ से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
“जब तुम में से कोई मस्जिद में दाखिल हो तो वह नबी ﷺ पर दुरूद और सलाम भेजे, फिर यह दुआ पढ़े: اَللّٰهُمَّ افْتَحْ لِيْ اَبْوَابَ رَحْمَتِكَ”
हवाला: सुनन अबू दाऊद, हदीस नंबर 463 (साहिह) | सुनन इब्न माजह, हदीस नंबर 772
मस्जिद से निकलते वक्त की दुआ | Dua for Leaving the Masjid
मस्जिद में दाखिल होने की दुआ के साथ-साथ मस्जिद से निकलते वक्त भी एक अलग दुआ पढ़ी जाती है।
Arabic:
اَللّٰهُمَّ اِنِّيْ اَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ
Transliteration:
Allahumma inni as’aluka min fadlik
Dua In Hindi With Tarjuma:
Dua in Hindi:
“ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरे फज़ल का सवाल करता हूँ।”
English Meaning:
“O Allah! I ask You from Your bounty and grace.”
हवाला: सहीह मुस्लिम, हदीस नंबर 713
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मस्जिद में दाखिल होने का सही तरीका | Masjid Me Jane Ka Sahi Tarika
Masjid Me Jane Ki Dua पढ़ने के साथ-साथ कुछ आदाब का भी ध्यान रखना ज़रूरी है:
पहला कदम दाहिना पैर: मस्जिद में दाखिल होते वक्त हमेशा पहले दाहिना (सीधा) पैर अंदर रखें। यह नबी ﷺ की सुन्नत है।
बिस्मिल्लाह कहें: मस्जिद में कदम रखने से पहले बिस्मिल्लाह कहना मुस्तहब है।
दुरूद पढ़ें: दुआ से पहले नबी ﷺ पर दुरूद भेजें।
दुआ पढ़ें: फिर Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua पढ़ें।
तहियातुल मस्जिद: मस्जिद में बैठने से पहले दो रकात नफ्ल नमाज़ (तहियातुल मस्जिद) अदा करना सुन्नत है। नबी ﷺ ने फरमाया कि जब कोई मस्जिद में आए तो बैठने से पहले दो रकात नमाज़ पढ़े।
मस्जिद से निकलते वक्त: बाएं पैर से पहले निकलें और निकलने की दुआ पढ़ें।
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Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Hindi – दुआ का मतलब और समझ
इस मुबारक दुआ में अल्लाह से रहमत के दरवाज़े खोलने की इल्तिजा की गई है। यहाँ “अबवाब” का मतलब है दरवाज़े। “रहमत” का मतलब है अल्लाह की मेहरबानी और रहमत।
जब बंदा मस्जिद में कदम रखने से पहले अल्लाह से रहमत माँगता है, तो यह दरअसल यह ऐलान होता है कि मैं यहाँ सिर्फ अल्लाह की खातिर आया हूँ। मेरे दिल को अपनी रहमत से भर दे।
यह छोटी सी दुआ इंसान के अंदर एक मकसद पैदा करती है। जब आप यह दुआ पढ़कर मस्जिद में दाखिल होते हैं तो आपका ध्यान पूरी तरह अल्लाह की इबादत पर लग जाता है।
यह दुआ कब पढ़ें | Yeh Dua Kab Padhen
Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua हर उस वक्त पढ़ी जाती है जब आप मस्जिद की दहलीज़ पर कदम रखें। चाहे फज्र की नमाज़ के लिए जाएं, चाहे ज़ुहर के लिए, चाहे जुमे की नमाज़ के लिए। हर बार जब मस्जिद में दाखिल हों, यह दुआ पढ़ें।
यह दुआ सिर्फ एक बार याद कर लीजिए, फिर उम्रभर इसका सवाब मिलता रहेगा।
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इस दुआ के फायदे | Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua ke Fayde
अल्लाह की रहमत का नज़ूल: यह दुआ पढ़ने से बंदे पर अल्लाह की रहमत नाज़िल होती है। मस्जिद में दाखिल होते ही अल्लाह की रहमत उसे अपने साए में ले लेती है।
नबी ﷺ की सुन्नत पर अमल: इस दुआ को पढ़ने से आप नबी ﷺ की सुन्नत पर चलते हैं जिसका बेशुमार सवाब है।
इबादत में खुशू पैदा होती है: जब इंसान दुआ पढ़कर मस्जिद में दाखिल होता है तो उसका दिल नमाज़ के लिए तैयार हो जाता है और खुशू व खुज़ू के साथ इबादत होती है।
अल्लाह से क़ुर्बत: यह दुआ बंदे और अल्लाह के बीच ताल्लुक को मज़बूत करती है। इल्तिजा करने से दिल का अल्लाह की तरफ रुख होता है।
गुनाहों से हिफाज़त: मस्जिद अल्लाह का पाक घर है। जब इंसान यहाँ रहमत माँगकर दाखिल होता है तो अल्लाह उसे शैतान के वसवसों से महफूज़ रखता है।
नेकी का दरवाज़ा खुलता है: रहमत के दरवाज़े खुलने का मतलब सिर्फ नमाज़ तक महदूद नहीं। अल्लाह की रहमत उसकी पूरी ज़िंदगी में बरकत का ज़रिया बन जाती है।
खुलासा | Conclusion
Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua एक छोटी लेकिन बहुत ताकतवर दुआ है। यह दुआ नबी ﷺ की सुन्नत से साबित है और हर मुसलमान को इसे ज़रूर याद करना चाहिए।
जब आप यह दुआ पढ़कर मस्जिद में कदम रखते हैं तो आप अल्लाह से रहमत की इल्तिजा करते हैं। अल्लाह की रहमत ही वह नेमत है जो दुनिया और आखिरत दोनों में कामयाबी दिलाती है।
मस्जिद में दाहिना पैर पहले रखें, दुरूद पढ़ें, और फिर यह दुआ पढ़ें:
اَللّٰهُمَّ افْتَحْ لِيْ اَبْوَابَ رَحْمَتِكَ
“ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।”
यह अमल आपकी हर इबादत को और क़बूल बनाने का ज़रिया बने। अल्लाह हम सबको नबी ﷺ की सुन्नतों पर अमल करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।
? अक्सर पूछे जाने वाले सवाल | FAQs
सवाल 1: Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Arabic क्या है?
जवाब: मस्जिद में दाखिल होने की दुआ अरबी में यह है: اَللّٰهُمَّ افْتَحْ لِيْ اَبْوَابَ رَحْمَتِكَ यह दुआ सुनन अबू दाऊद और सुनन इब्न माजह में साहिह सनद से साबित है।
सवाल 2: Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in English क्या है?
जवाब: इस दुआ का अंग्रेज़ी तर्जुमा है: “O Allah! Open for me the doors of Your Mercy.” रोमन इंग्लिश में इसे इस तरह पढ़ते हैं: Allahummaf-tah lee abwaaba rahmatik
सवाल 3: मस्जिद में दाखिल होने से पहले कौन सा पैर पहले रखें?
जवाब: नबी ﷺ की सुन्नत के मुताबिक मस्जिद में दाखिल होते वक्त पहले दाहिना (सीधा) पैर अंदर रखना चाहिए।
सवाल 4: Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua with Tarjuma कहाँ से मिलेगी?
जवाब: यह दुआ हदीस की किताबों सुनन अबू दाऊद (हदीस 463) और सुनन इब्न माजह (हदीस 772) में मौजूद है। तर्जुमा यह है: “ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।”
सवाल 5: क्या मस्जिद से निकलते वक्त भी कोई दुआ है?
जवाब: जी हाँ। मस्जिद से निकलते वक्त यह दुआ पढ़ें: اَللّٰهُمَّ اِنِّيْ اَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ (Allahumma inni as’aluka min fadlik) मतलब: “ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरे फज़ल का सवाल करता हूँ।” यह दुआ सहीह मुस्लिम (हदीस 713) में मौजूद है।
सवाल 6: क्या बच्चों को भी यह दुआ सिखानी चाहिए?
जवाब: बिल्कुल। बच्चों को छोटी उम्र से ही Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua याद करानी चाहिए ताकि वे बचपन से ही सुन्नत पर अमल करने के आदी बन जाएं।
सवाल 7: क्या यह दुआ सिर्फ नमाज़ के वक्त पढ़ी जाती है?
जवाब: नहीं। यह दुआ हर बार पढ़ी जाती है जब मस्जिद में दाखिल हों, चाहे नमाज़ के लिए जाएं, तिलावत के लिए जाएं या किसी भी मकसद से।
Written by: Ahmad Raza
Credentials: Islamic Studies Content Writer