Wazu ke baad ki dua पढ़ना सुन्नत-ए-मुअक्कदा है जो जन्नत के आठों दरवाज़े खोल देती है। मुख्य दुआ: “अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लहू व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू” (सहीह मुस्लिम 234)। इसे वज़ू पूरा होने के तुरंत बाद पढ़ें। दूसरी दुआ “अल्लाहुम्मज्अलनी मिनत्तव्वाबीन” भी सुन्नत है।
क्या आप रोज़ाना पांच वक़्त वज़ू करते हैं लेकिन wazu ke baad ki dua नहीं पढ़ते? तो आप एक ऐसी नेकी से महरूम हो रहे हैं जो आपके लिए जन्नतुल फिरदौस के दरवाज़े खोल सकती है।
नबी करीम صلى الله عليه وسلم ने फरमाया कि जो व्यक्ति पूरे तरीक़े से वज़ू करके यह दुआ पढ़ता है, उसके लिए जन्नत के आठ दरवाज़े खोल दिए जाते हैं – वह जिससे चाहे दाख़िल हो सकता है।
यह लेख आपको वज़ू से जुड़ी सभी दुआओं का पूर्ण ज्ञान देगा – सही अरबी पाठ, आसान उच्चारण, गहरा अर्थ और हदीस के प्रमाण के साथ।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख केवल शैक्षिक और जानकारी के उद्देश्य से है। सभी दुआएं और अहकाम सहीह हदीस और प्रमाणिक इस्लामिक स्रोतों से ली गई हैं। फिर भी किसी भी दीनी मसले में अपने स्थानीय आलिम या मुफ़्ती से मशविरा करें। अलग-अलग मसालिक में कुछ फ़ुरूई इख़्तिलाफ़ हो सकते हैं।
Wazu Se Pehle Ki Dua – शुरुआत में बिस्मिल्लाह
वज़ू शुरू करने से पहले “बिस्मिल्लाह” कहना सुन्नत है।
अरबी:
بِسْمِ اللهِ
उच्चारण (Transliteration):
“Bismillah”
हिंदी अर्थ:
“अल्लाह के नाम से”
हदीस प्रमाण: अबू दाऊद (101), इब्न माजा (397) – सईद बिन ज़ैद और अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत
नबी صلى الله عليه وسلم ने फरमाया: “जिस वज़ू में बिस्मिल्लाह न हो, उसमें कोई वज़ू नहीं।” (सुनन इब्न माजा)
यह दुआ छोटी है लेकिन इसका असर बहुत बड़ा है। बिस्मिल्लाह कहते ही शैतान दूर हो जाता है और इबादत में बरकत आती है।
Wazu ke Baad ki Dua – वज़ू के बाद की मुख्य दुआ
वज़ू पूर्ण करने के बाद यह wazu karne ki dua पढ़नी अनिवार्य है:
Wazu Ki Dua पहली और मुख्य दुआ:
अरबी:
أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
रोमन उच्चारण:
“Ash-hadu al-laa ilaaha illallaahu wahdahu laa shareeka lahu, wa ash-hadu anna Muhammadan ‘abduhu wa rasooluhu”
हिंदी में अर्थ:
“मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद (इबादत के योग्य) नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद صلى الله عليه وسلم उसके बन्दे और रसूल हैं।”
हदीस संदर्भ: सहीह मुस्लिम (किताब अत-तहारा, हदीस नंबर 234) – हज़रत उमर फ़ारूक़ रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित
यह दुआ कलिमा शहादत का इज़हार है। इसे पढ़ने से ईमान ताज़ा होता है और अल्लाह से बंदे का रिश्ता मज़बूत होता है।
Wazu Ki Dua दूसरी सुन्नत दुआ:
अरबी:
اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِنَ التَّوَّابِينَ وَاجْعَلْنِي مِنَ الْمُتَطَهِّرِينَ
रोमन उच्चारण:
“Allahumma-j’alnee minat-tawwaabeena wa-j’alnee minal-mutatahhireen”
हिंदी अर्थ:
“ऐ अल्लाह! मुझे तौबा करने वालों में से बना दे और पाक साफ़ रहने वालों में से बना दे।”
हदीस संदर्भ: जामे तिर्मिज़ी (हदीस 55) – क़ासिम बिन मुहम्मद से रिवायत, इमाम तिर्मिज़ी ने इसे हसन क़रार दिया
यह दुआ पहली दुआ के साथ मिलाकर पढ़ने से वज़ू की बरकत दोगुनी हो जाती है।
Wazu Ke Faraiz – चार अनिवार्य कार्य
wazu ke baad ki dua की क़बूलियत के लिए वज़ू का सही होना ज़रूरी है। वज़ू के चार फ़र्ज़ हैं जो क़ुरआन (सूरह अल-माइदा 5:6) से साबित हैं:
1. चेहरे को धोना (غَسْلُ الْوَجْهِ)
माथे की शुरुआत से दाढ़ी तक और एक कान की लौ से दूसरे कान की लौ तक पूरा चेहरा तीन बार धोना फ़र्ज़ है।
2. दोनों हाथ कोहनियों समेत धोना (غَسْلُ الْيَدَيْنِ)
उंगलियों के सिरे से लेकर कोहनियों तक तीन बार धोना। कोहनियों को शामिल करना अनिवार्य है।
3. पूरे सिर का मसह करना (مَسْحُ الرَّأْسِ)
गीले हाथों से सिर के बालों पर एक बार मसह करना फ़र्ज़ है। कम से कम सिर के चौथाई हिस्से पर मसह ज़रूरी है।
4. दोनों पैर टखनों समेत धोना (غَسْلُ الرِّجْلَيْنِ)
टखनों की हड्डियों तक दोनों पैर तीन बार अच्छी तरह धोना।
चेतावनी: अगर इन चार में से कोई एक फ़र्ज़ भी छूट गया तो वज़ू नहीं होगा और नमाज़ क़बूल नहीं होगी।
वज़ू का पूरा तरीक़ा – 15 कदम
वज़ू शुरू से अंत तक सही तरीक़े से करने की विधि:
1. नियत दिल में करें (ज़बान से कहना ज़रूरी नहीं)
2. बिस्मिल्लाह कहें
3. दोनों हाथों को कलाई तक तीन बार धोएं
4. मिसवाक या ब्रश से दांतों को साफ़ करें (सुन्नत)
5. तीन बार कुल्ली करें (मुंह में पानी डालकर घुमाएं)
6. तीन बार नाक में पानी डालें और साफ़ करें
7. पूरा चेहरा तीन बार धोएं
8. पहले दायां हाथ, फिर बायां हाथ कोहनी समेत तीन बार धोएं
9. गीले हाथों से पूरे सिर का एक बार मसह करें
10. दोनों कानों के अंदर और बाहर मसह करें
11. गर्दन का मसह करें (सुन्नत)
12. पहले दायां पैर फिर बायां पैर टखनों समेत तीन बार धोएं
13. उंगलियों में ख़िलाल करें
14. वज़ू पूरा होने के बाद ऊपर की तरफ़ देखें
15. Wazu ke baad ki dua पढ़ें
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जन्नत के आठों दरवाज़े – फ़ज़ीलत और फ़ायदे
नबी صلى الله عليه وسلم ने फरमाया:
“जिसने वज़ू किया और अच्छी तरह किया, फिर कहा: अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लहू व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू – तो उसके लिए जन्नत के आठ दरवाज़े खोल दिए जाते हैं, जिससे चाहे दाख़िल हो।” (सहीह मुस्लिम 234)
जन्नत के आठ दरवाज़ों के नाम:
| दरवाज़े का नाम | किसके लिए |
|---|---|
| बाबुस सलात | नमाज़ियों के लिए |
| बाबुल जिहाद | मुजाहिदों के लिए |
| बाबुस सदक़ा | ख़ैरात देने वालों के लिए |
| बाबुर रय्यान | रोज़ेदारों के लिए |
| बाबुल हज | हाजियों के लिए |
| बाबुल काज़िमीन अल-ग़ैज़ | ग़ुस्सा पीने वालों के लिए |
| बाबुल ऐमान | मोमिनों के लिए |
| बाबुद दहब | तौबा करने वालों के लिए |
यह दुआ पढ़ने वाले को सभी दरवाज़ों से दाख़िल होने का विकल्प मिलता है।
वज़ू से गुनाह कैसे धुलते हैं?
हज़रत उस्मान रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी صلى الله عليه وسلم ने फरमाया:
“जिसने मेरी तरह वज़ू किया, फिर दो रकात नमाज़ पढ़ी जिसमें दिल में कोई वसवसा न आए, तो उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।” (सहीह बुख़ारी 159, सहीह मुस्लिम 226)
गुनाहों के धुलने का तरीक़ा:
- चेहरा धोते वक़्त: आँखों से देखे गए गुनाह धुलते हैं
- हाथ धोते वक़्त: हाथों से किए गए गुनाह धुलते हैं
- सिर का मसह: दिमाग़ में आने वाले बुरे ख़यालात धुलते हैं
- पैर धोते वक़्त: पैरों से चलकर किए गए गुनाह धुलते हैं
यह फ़ज़ीलत तभी मिलती है जब वज़ू सही तरीक़े से किया जाए और wazu ki dua पढ़ी जाए।
आम ग़लतियां जिनसे बचें
कई लोग वज़ू में ऐसी ग़लतियां करते हैं जो वज़ू को ख़राब कर देती हैं:
ग़लती 1: पानी की बर्बादी
वज़ू में ज़रूरत से ज़्यादा पानी इस्तेमाल करना मकरूह है। नबी صلى الله عليه وسلم एक मुद्द (दोनों हथेलियों में समाने जितना) पानी से वज़ू करते थे।
ग़लती 2: कोहनियां न धोना
बहुत से लोग कोहनियों को छोड़ देते हैं जबकि यह फ़र्ज़ का हिस्सा है।
ग़लती 3: मोज़ों के ऊपर से वज़ू करना
मोज़ों पर मसह करने की शर्तें हैं। बिना शर्तों के मोज़े पहनकर वज़ू ग़लत है।
ग़लती 4: वज़ू के बाद की दुआ न पढ़ना
यह सबसे बड़ी ग़लती है। Wazu karne ki dua पढ़ना सुन्नत है जिसे छोड़ना बड़ी नेकी का नुक़सान है।
ग़लती 5: वज़ू में बातें करना
वज़ू के दौरान बेकार की बातचीत वज़ू की रूहानियत ख़त्म कर देती है।
निष्कर्ष
Wazu ke baad ki dua सिर्फ़ एक रस्म नहीं बल्कि जन्नत की चाबी है। यह 30 सेकंड की इबादत आपको जन्नत के आठों दरवाज़ों का हक़दार बना सकती है।
आज से ही यह अमल शुरू कर दें। हर वज़ू के बाद यह दुआ पढ़ने की आदत डालें। पहले दिन भूल सकते हैं, दूसरे दिन याद रखने की कोशिश करें, तीसरे दिन ज़रूर पढ़ें। एक हफ़्ते में यह आपकी रूटीन बन जाएगी।
याद रखें – नबी صلى الله عليه وسلم ने फरमाया कि छोटे-छोटे अमलों को कम न समझो। कभी-कभी एक छोटी सी नेकी जन्नत का सबब बन जाती है।
आपका हर वज़ू, हर दुआ, हर नमाज़ – सब अल्लाह के दरबार में महफ़ूज़ है। बस मेहनत और लगन की ज़रूरत है।
अल्लाह हम सबको सही तरीक़े से वज़ू करने, wazu karne ki dua याद रखने और इस पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q: क्या wazu ke baad ki dua ज़बान से पढ़नी ज़रूरी है?
जवाब: हां, इसे ज़ोर से या धीरे से ज़बान से पढ़ना सुन्नत है। सिर्फ़ दिल में पढ़ने से सुन्नत अदा नहीं होगी। हदीस में साफ़ तौर पर “क़ाला” (कहा) शब्द आया है जो ज़बानी पढ़ने को साबित करता है।
Q: अगर दुआ याद न हो तो क्या करें?
जवाब: जितना याद हो उतना पढ़ें या कागज़ देखकर पढ़ें। रोज़ाना पढ़ने से जल्द याद हो जाएगी। शुरुआत में कम से कम “अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाह” ज़रूर पढ़ें।
Q: क्या हर वज़ू के बाद दुआ पढ़नी चाहिए?
जवाब: हां, दिन में पांच वक़्त नमाज़ के लिए वज़ू करते हैं तो हर बार यह दुआ पढ़नी चाहिए। इससे नेकियां बढ़ती रहेंगी।
Q: क्या गुसल के बाद भी यह दुआ पढ़ते हैं?
जवाब: जी हां। गुसल के बाद भी wazu ki dua पढ़नी सुन्नत है क्योंकि गुसल में वज़ू शामिल होता है।
Q: दुआ में ग़लती हो जाए तो क्या करें?
जवाब: दोबारा सही तरीक़े से पढ़ लें। शुरुआत में धीरे-धीरे पढ़ें ताकि हर शब्द साफ़ हो।
Q: वज़ू टूटने के बाद हर बार नई दुआ पढ़ें?
जवाब: हां, हर नए वज़ू के बाद यह दुआ पढ़नी चाहिए। यह अमल कभी पुराना नहीं होता।
Q: क्या wazu se pehle ki dua फ़र्ज़ है?
जवाब: नहीं, बिस्मिल्लाह कहना सुन्नत है लेकिन कुछ उलेमा के नज़दीक इसके बिना वज़ू मकरूह होता है। बेहतर है हमेशा बिस्मिल्लाह कहें।
Written by: Ahmad Raza
Credentials: Islamic Studies Content Writer
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