हमारी ज़िंदगी हर पल बदलती रहती है। कोई नहीं जानता कि अगले लम्हे में क्या होने वाला है। घर से निकलते हैं तो सड़क पर हादसा हो सकता है, सफ़र पर जाते हैं तो रास्ते में ख़तरा हो सकता है, काम पर जाते हैं तो कोई मुसीबत आ सकती है। ऐसे में एक सच्चा मुसलमान अल्लाह की तरफ़ रुजू करता है और उससे हिफ़ाज़त माँगता है।
इस्लाम ने हमें हर काम से पहले दुआ का तरीक़ा सिखाया है। Hadsat Se Bachne Ki Dua वह मसनून दुआ है जो हमारे नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ ने उम्मत को सिखाई। यह दुआ सुबह और शाम पढ़ी जाती है ताकि इंसान दिन और रात के तमाम हादसों से महफ़ूज़ रहे।
Hadsat Se Bachne Ki Dua in Arabic
यह वह दुआ है जो हदीस में वारिद हुई है और जिसे इमाम अबू दाऊद और इमाम तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है:
بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
Hadsat Se Bachne Ki Dua Transliteration (Roman English)
“Bismillahil-ladhi laa yadurru ma’as-mihi shay’un fil-ardi wa laa fis-samaa’i, wa Huwa as-Samee’ul-‘Aleem.”

Hadsat Se Bachne Ki Dua in Hindi
“अल्लाह के नाम से, जिसके नाम के साथ ज़मीन में और आसमान में कोई चीज़ नुक़सान नहीं दे सकती, और वही सुनने वाला और जानने वाला है।”
Hadsat Se Bachne Ki Dua in Urdu (اردو ترجمہ)
“اللہ کے نام سے، جس کے نام کے ساتھ زمین اور آسمان میں کوئی چیز نقصان نہیں دے سکتی، اور وہی سننے والا اور جاننے والا ہے۔”
Hadsat Se Bachne Ki Dua in English (Meaning)
“In the Name of Allah, with Whose Name nothing in the earth or in the heaven can cause harm, and He is the All-Hearing, the All-Knowing.”
हदीस का हवाला – Hadith Reference
यह दुआ हज़रत उस्मान बिन अफ़्फ़ान رضي الله عنه से मरवी है। उन्होंने कहा कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“जो शख्स हर सुबह और हर शाम तीन बार यह कलिमात पढ़े, उसे कोई चीज़ नुकसान नहीं देगी।”
(सुनन अबू दाऊद: 5082 | जामि’ तिर्मिज़ी: 3575 – हदीस हसन सहीह)
इमाम नववी رحمه الله ने अपनी किताब “अल-अज़कार” में इस हदीस की सनद को सहीह कहा है। इमाम इब्न क़य्यिम رحمه الله ने “ज़ादुल मआद” में भी इसे सहीह क़रार दिया है।
इस दुआ की अहमियत और तफ़सील
Hadsat Ki Dua यानी हादसे से बचने की दुआ कोई साधारण जुमला नहीं है। इसमें अल्लाह के नाम की बरकत का ज़िक्र है। नबी ﷺ ने बताया कि जो शख्स इसे सुबह तीन बार पढ़ेगा वह शाम तक हर हादसे से महफ़ूज़ रहेगा। और जो शाम को तीन बार पढ़ेगा वह सुबह तक किसी मुसीबत में नहीं आएगा।
इस दुआ में दो नामों का ख़ास ज़िक्र है:
अस-समी’ (السميع) यानी अल्लाह सब सुनता है, आपकी दुआ क़बूल करने में देर नहीं लगाता।
अल-‘अलीम (العليم) यानी अल्लाह सब जानता है, आपकी ज़रूरत उसे पहले से मालूम है।
यह दुआ यह एहसास दिलाती है कि ज़मीन और आसमान में कोई ताक़त नहीं जो अल्लाह की इजाज़त के बिना हमें नुकसान दे सके।
हज़रत अबू दर्दा رضي الله عنه का वाक़िया
इमाम इस्लामक़ा ज़िक्र और इस्लामिक स्कॉलर्स ने एक वाक़िया बयान किया है जो इस दुआ की तासीर बयान करता है:
हज़रत अबू दर्दा رضي الله عنه के मोहल्ले में एक बार आग लगी। पूरे इलाक़े के घर जल गए लेकिन हज़रत अबू दर्दा رضي الله عنه का घर सुरक्षित रहा। जब लोगों ने पूछा तो उन्होंने बताया कि वह रोज़ाना यही Hadsat Se Bachne Ki Dua पढ़ा करते थे। यह वाक़िया इस दुआ की बरकत की दलील है।
यह दुआ कब पढ़ें – When to Read This Dua
Hadsat Se Bachne Ki Dua पढ़ने का सही वक्त यह है:
सुबह के वक्त: नमाज़े फज्र के बाद तीन बार पढ़ें। इससे पूरे दिन की हिफ़ाज़त होगी।
शाम के वक्त: नमाज़े मग़रिब के बाद तीन बार पढ़ें। इससे पूरी रात की हिफ़ाज़त होगी।
घर से निकलते वक्त: जब भी घर से बाहर निकलें तो यह दुआ पढ़ लें।
सफ़र पर जाने से पहले: किसी भी सफ़र पर जाने से पहले इसे पढ़ना बहुत मुनासिब है।
किसी ख़तरनाक काम से पहले: कोई भी ऐसा काम जिसमें ख़तरा हो, उससे पहले यह दुआ पढ़ें।
इस दुआ के फ़ायदे – Benefits of This Dua
इस Hadsat Ki Dua के फ़ायदे हदीस और उलमा के बयानात से साबित हैं:
हर तरह के हादसे से हिफ़ाज़त: नबी ﷺ का वादा है कि यह पढ़ने वाले को कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा।
सुबह और शाम का कवच: यह दुआ दिन और रात दोनों के लिए ढाल बन जाती है।
अल्लाह पर तवक्कुल मज़बूत होता है: बार-बार पढ़ने से दिल में यक़ीन पैदा होता है कि सब कुछ अल्लाह के हाथ में है।
क़लब का सुकून: जो इंसान यह दुआ पढ़ता है उसके दिल में डर कम होता है और सुकून आता है।
आग, पानी, दुर्घटना से हिफ़ाज़त: यह दुआ ज़मीन और आसमान दोनों के नुकसान से बचाती है जैसा कि अल्फ़ाज़ में साफ़ है।
नज़र और जादू से हिफ़ाज़त: उलमा ने लिखा है कि यह दुआ नज़र, जादू और रूहानी आफ़ात से भी बचाती है।
घर से निकलने की दुआ (अतिरिक्त दुआ)
हादसात से बचाव के लिए Hadsat Se Bachne Ki Dua in Urdu और हिंदी पढ़ने वाले भाई-बहन यह दुआ भी पढ़ सकते हैं जो घर से निकलते वक्त पढ़ी जाती है:
Arabic:
بِسْمِ اللَّهِ، تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ، وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ
Transliteration:
Bismillah, tawakkaltu ‘alallah, wa laa hawla wa laa quwwata illaa billaah.
हिंदी तर्जुमा:
“अल्लाह के नाम से, मैंने अल्लाह पर भरोसा किया, और न कोई ताक़त है न कोई क़ुव्वत मगर अल्लाह की तरफ़ से।”
यह दुआ सुनन अबू दाऊद और तिर्मिज़ी में है। इसे पढ़ने पर फ़रिश्ते कहते हैं: तुम्हें हिदायत मिली, तुम महफ़ूज़ हो गए और शैतान तुमसे दूर हो गया।
सफ़र में पढ़ने की दुआ
जो लोग Hadsat Se Bachne Ki Dua in English या हिंदी में तलाश करते हैं वह सफ़री हादसों से भी बचना चाहते हैं। सफ़र शुरू करते वक्त यह आयत पढ़ें:
Arabic:
سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَٰذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ وَإِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنقَلِبُونَ
Transliteration:
Subhaanal-lathee sakhkhara lanaa haathaa wa maa kunnaa lahu muqrineen. Wa innaa ilaa Rabbinaa lamunqaliboon.
हिंदी तर्जुमा:
“पाक है वह ज़ात जिसने इसे हमारे लिए मुसख्खर किया, हम इसे काबू नहीं कर सकते थे। और हम अपने रब की तरफ़ लौटने वाले हैं।”
यह आयत सूरह अज़-ज़ुखरुफ़ (43:13-14) से है। नबी ﷺ सफ़र में सवारी पर बैठते वक्त यह पढ़ते थे।
निष्कर्ष – Conclusion
Hadsat Se Bachne Ki Dua हमारे नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ की सिखाई हुई एक बेशक़ीमती दुआ है। यह दुआ हदीस से साबित है और इसे सुबह-शाम तीन-तीन बार पढ़ने का नबी ﷺ ने ख़ुद हुक्म दिया है।
Hadsat Ki Dua पढ़ने का मतलब यह नहीं कि हम लापरवाह हो जाएँ। बल्कि हम अपनी तरफ़ से पूरी एहतियात करें, ट्रैफ़िक क़ानून का पालन करें, सुरक्षित सफ़र करें, और साथ में अल्लाह से हिफ़ाज़त भी माँगते रहें। यही तवक्कुल का सही मतलब है।
Hadsat Se Bachne Ki Dua in Arabic अरबी में पढ़ना सबसे बेहतर है। जो अरबी नहीं जानते वह पहले हिंदी या उर्दू तर्जुमा समझें फिर अरबी याद करें। अल्लाह से दुआ है कि वह हम सबको, हमारे घरवालों को और पूरी उम्मत को हर हादसे और मुसीबत से महफ़ूज़ रखे।
آمِيْن يَا رَبَّ الْعَالَمِيْن
See More Reliable Islamic Duas:
- Zina Se Bachne Ki Dua
- Rabbana Atina Dua
- Allahummaghfirli Dua
- Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua
- So Kar Uthne Ki Dua
- Sir Dard Ki Dua In Quran
- Naya Chand Dekhne Ki Dua
? अक्सर पूछे जाने वाले सवाल – FAQs
सवाल 1: Hadsat Se Bachne Ki Dua कौन सी है?
जवाब: بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ – यह वह मसनून दुआ है जो अबू दाऊद और तिर्मिज़ी में है और जिसे नबी ﷺ ने पढ़ने का हुक्म दिया।
सवाल 2: यह दुआ कितनी बार पढ़नी चाहिए?
जवाब: हदीस के मुताबिक़ सुबह तीन बार और शाम तीन बार पढ़नी चाहिए। यही तरीक़ा नबी ﷺ ने बताया है।
सवाल 3: क्या यह दुआ हर तरह के हादसे से बचाती है?
जवाब: नबी ﷺ ने फ़रमाया कि इसे पढ़ने वाले को कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा। हालाँकि यह अल्लाह की मर्ज़ी और इजाज़त पर है। दुआ एक सबब है, असली हिफ़ाज़त करने वाला अल्लाह ही है।
सवाल 4: क्या बच्चों को भी यह दुआ सिखाई जाए?
जवाब: जी हाँ, यह दुआ बहुत छोटी और आसान है। बच्चों को सुबह-शाम यह पढ़ाना बेहद अच्छा अमल है।
सवाल 5: Hadsat Se Bachne Ki Dua in Hindi और Arabic में क्या फ़र्क़ है?
जवाब: दुआ का असल मतन अरबी में है। हिंदी या उर्दू तर्जुमा सिर्फ़ समझने के लिए है। दुआ अरबी में ही पढ़ी जाए तो बेहतर है।
सवाल 6: क्या यह दुआ सिर्फ़ सफ़र के लिए है?
जवाब: नहीं। यह दुआ सुबह और शाम के अज़कार में शामिल है और हर तरह के हादसे, नुकसान और आफ़त से हिफ़ाज़त के लिए है, चाहे सफ़र हो या घर पर रहना।
सवाल 7: इस दुआ का हदीस में दर्जा क्या है?
जवाब: यह हदीस “हसन सहीह” है जैसा कि इमाम तिर्मिज़ी ने कहा। इमाम नववी और इमाम इब्न क़य्यिम ने भी इसे सहीह कहा है।
Written by: Ahmad Raza
Credentials: Islamic Studies Content Writer
Read More duas for daily life at Instant Dua