Hazrat Ayub Ki Dua बीमारी और मुसीबत में अल्लाह से माँगने की दुआ

इस्लामी तारीख़ में Hazrat Ayub (अलैहिस्सलाम) का नाम सब्र और यक़ीन की मिसाल के तौर पर लिया जाता है। अल्लाह तआला ने उन्हें एक बहुत बड़ी आज़माइश में डाला लंबी बीमारी, जिस्मानी तकलीफ़, माल का नुकसान और अकेलापन। लेकिन उन्होंने कभी अल्लाह से शिकायत नहीं की। जब तकलीफ़ हद से ज़्यादा बढ़ी, तो उन्होंने बड़े अदब के साथ अपने रब के सामने हाथ उठाए। यही Dua of Hazrat Ayub है जो क़ुरआन मजीद में महफ़ूज़ है।

यह दुआ बीमारी, परेशानी, तंगी और ग़म के वक़्त पढ़ी जाती है। यह सिर्फ़ अलफ़ाज़ नहीं, बल्कि एक दिल की आवाज़ है जो सीधे अल्लाह तक पहुँचती है।

Hazrat Ayub Ki Dua in Arabic

अल्लाह तआला ने क़ुरआन मजीद में Hazrat Ayub Dua इन अलफ़ाज़ में बयान फ़रमाई है:

رَبَّهُ أَنِّي مَسَّنِيَ الضُّرُّ وَأَنتَ أَرْحَمُ الرَّاحِمِينَ

(सूरह अल-अम्बिया, आयत 83)

Hazrat Ayub Ki Dua Transliteration

Rabbahu anni massaniya-d-durru wa anta arhamur-rahimeen

Hazrat Ayub Ki Dua in Hindi

Dua in Hindi:

रब्बि अन्नी मसनियद्दुर्रु व अंता अरहमुर्राहिमीन

Meaning in Hindi:

“बेशक मुझे तकलीफ़ पहुँची है, और तू सब रहम करने वालों में से सबसे ज़्यादा रहम वाला है।”

Dua Of Hazrat Ayub

Hazrat Ayub Ki Dua in Urdu

“بیشک مجھے تکلیف پہنچی ہے اور تو تمام رحم کرنے والوں میں سب سے زیادہ رحم والا ہے۔”

Hazrat Ayub Ki Dua in English

“Indeed, adversity has touched me, and You are the Most Merciful of all who show mercy.”

Hazrat Ayub Ki Dua Ka Matlab

यह दुआ बहुत मुख़्तसर है, लेकिन इसके अलफ़ाज़ में गहरी आजिज़ी, यक़ीन और उम्मीद है। Hazrat Ayub ने सिर्फ़ इतना कहा मुझे तकलीफ़ है, और तू सबसे बड़ा रहमान है। कोई शिकवा नहीं, कोई फ़रियाद नहीं बस एक इल्तिजा।

जब इंसान इस तरह अल्लाह के सामने झुकता है, तो अल्लाह तआला की रहमत का दरवाज़ा खुल जाता है।

Story of Hazrat Ayub सब्र के उस अज़ीम नबी की कहानी

Story of Hazrat Ayub ईमान वालों के लिए सब्र की सबसे बड़ी मिसाल है।

Hazrat Ayub (अलैहिस्सलाम) अल्लाह के चुनिंदा नबी थे। अल्लाह तआला ने उन्हें माल, औलाद, सेहत और इज़्ज़त से नवाज़ा था। वह हमेशा अल्लाह का शुक्र अदा करते, ग़रीबों की मदद करते और नेकी में आगे रहते।

फिर उनके इम्तिहान का वक़्त आया।

शैतान ने अल्लाह तआला के सामने कहा कि अय्यूब सिर्फ़ इसलिए इबादत करते हैं क्योंकि उन्हें नेमतें मिली हैं। अगर नेमतें छीन ली जाएँ, तो वह इबादत नहीं करेंगे।

अल्लाह तआला ने Hazrat Ayub (अलैहिस्सलाम) को आज़माने की इजाज़त दी।

इसके बाद जो हुआ वह बहुत कठिन था। उनकी सारी दौलत ख़त्म हो गई। उनके बच्चे वफ़ात पा गए। उनके जिस्म पर शदीद बीमारी आ गई जिसने उन्हें सालों तक घेरे रखा। लोग उन्हें छोड़ गए। सिर्फ़ उनकी वफ़ादार बीवी रही जो उनकी ख़िदमत करती रहीं।

लेकिन Hazrat Ayub ने एक बार भी अल्लाह से शिकायत नहीं की। उनका सब्र यह नहीं था कि वह दुआ नहीं करते थे बल्कि उन्होंने अल्लाह से रहमत माँगी, अपनी तकलीफ़ बयान की, और पूरी उम्मीद के साथ रखी।

अल्लाह तआला ने उनकी दुआ क़बूल की और फ़रमाया:

فَاسْتَجَبْنَا لَهُ فَكَشَفْنَا مَا بِهِ مِن ضُرٍّ وَآتَيْنَاهُ أَهْلَهُ وَمِثْلَهُم مَّعَهُمْ رَحْمَةً مِّنْ عِندِنَا وَذِكْرَىٰ لِلْعَابِدِينَ

“तो हमने उसकी दुआ क़बूल की और जो तकलीफ़ उसे थी, उसे दूर कर दिया। और हमने उसे उसके घरवाले वापस दिए और उनके साथ उतने ही और भी, अपनी रहमत से और इबादत करने वालों के लिए नसीहत के तौर पर।”

(सूरह अल-अम्बिया, आयत 84)

Hazrat Ayub Ki Dua Ka Pas Manzar

Hazrat Ayub Ki Dua Ka Pas Manzar समझना बहुत ज़रूरी है ताकि हम इस दुआ की रूह को समझें।

यह दुआ किसी ग़ुस्से में नहीं माँगी गई थी। किसी जल्दी में भी नहीं। यह दुआ बरसों की तकलीफ़ के बाद, पूरे सब्र के साथ, एक नबी के टूटे हुए दिल से निकली थी।

इस दुआ में तीन बातें ख़ास हैं जो इसे बाक़ी दुआओं से अलग बनाती हैं।

पहली बात उन्होंने अपनी तकलीफ़ बयान की, लेकिन इसका इल्ज़ाम किसी पर नहीं लगाया। न शैतान पर, न हालात पर।

दूसरी बात उन्होंने अल्लाह की रहमत का इक़रार किया। यानी उन्हें यक़ीन था कि अल्लाह रहमत वाला है, इसीलिए दुआ माँग रहे हैं।

तीसरी बात उन्होंने सिर्फ़ अल्लाह से माँगा। किसी और की तरफ़ नहीं गए।

यही वजह है कि Hazrat Ayub Ki Dua क़ुरआन पाक में महफ़ूज़ है और क़यामत तक के लोगों के लिए एक निशानी है।

Hazrat Ayub Ki Dua Ka Wazifa

Hazrat Ayub Ki Dua Ka Wazifa उन लोगों के लिए बहुत मुफ़ीद माना जाता है जो किसी लाइलाज बीमारी में मुब्तला हों, जिस्मानी या रूहानी तकलीफ़ में हों, परेशानी और तंग हालों से गुज़र रहे हों, या दुआ क़बूल होने की उम्मीद रखते हों।

पढ़ने का तरीक़ा:

पहला क़दम वुज़ू करें और साफ़ जगह बैठ जाएँ।

दूसरा क़दम दुरूद इब्राहीम एक बार पढ़ें।

तीसरा क़दम यह दुआ 41 बार या 100 बार पढ़ें:

رَبَّهُ أَنِّي مَسَّنِيَ الضُّرُّ وَأَنتَ أَرْحَمُ الرَّاحِمِينَ

चौथा क़दम फिर से दुरूद इब्राहीम पढ़ें।

पाँचवाँ क़दम सच्चे दिल से अल्लाह से अपनी हाजत माँगें।

इसे फ़ज्र या तहज्जुद के वक़्त पढ़ना ज़्यादा मुफ़ीद होता है। मगर कोई भी वक़्त में पढ़ सकते हैं, कोई पाबंदी नहीं है।

Hazrat Ayub Ki Dua Padhne Ka Sahi Waqt

इस दुआ को पढ़ने के लिए कोई ख़ास वक़्त मुक़र्रर नहीं किया गया है। लेकिन कुछ औक़ात में दुआ ज़्यादा क़बूल होती है।

तहज्जुद का वक़्त रात के पिछले पहर में अल्लाह के सामने गिरगिराना सबसे ज़्यादा असर रखता है।

फ़ज्र के बाद इस वक़्त की दुआ में बरकत है।

बीमारी या तकलीफ़ के वक़्त जब इंसान कमज़ोर होता है और सिर्फ़ अल्लाह का सहारा चाहता है, तब इस दुआ को पढ़ना बहुत मुफ़ीद है।

सज्दे में दुआ क़बूल होने की सबसे अफ़ज़ल जगह सज्दा है।

अज़ान और इक़ामत के दरमियान इस वक़्त की दुआ रद्द नहीं होती।

Hazrat Ayub Ki Dua Benefits

Hazrat Ayub Ki Dua Benefits सिर्फ़ जिस्मानी शिफ़ा तक महदूद नहीं हैं। इस दुआ की बरकत और फ़ज़ीलत बहुत ज़्यादा है।

1. बीमारी में शिफ़ा की उम्मीद यह दुआ शिफ़ा के लिए माँगी जाती है। Hazrat Ayub (अलैहिस्सलाम) की ख़ुद की बीमारी दूर हुई थी, इसलिए उम्मती भी इस दुआ को बीमारी में पढ़ते हैं।

2. अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा खुलता है जब बंदा अल्लाह के सामने अपनी बेबसी बयान करता है, तो अल्लाह तआला की रहमत उसकी तरफ़ मुतवज्जे होती है।

3. दिल को सुकून मिलता है इस दुआ को पढ़ने से एक ख़ास इत्मीनान मिलता है। तकलीफ़ कम न भी हो, मगर दिल को क़रार आता है कि अल्लाह सुनता है।

4. सब्र की ताक़त मिलती है इस दुआ को पढ़ते वक़्त Hazrat Ayub (अलैहिस्सलाम) का सब्र याद आता है, जो ख़ुद भी हिम्मत देता है।

5. गुनाह माफ़ होने की उम्मीद दुआ एक इबादत है। जब बंदा सच्चे दिल से दुआ करता है, तो उसकी ग़लतियाँ भी माफ़ होती हैं इंशा अल्लाह।

6. परेशानी दूर होती है जिस तरह अल्लाह तआला ने Hazrat Ayub (अलैहिस्सलाम) की मुश्किल दूर की, उसी तरह उम्मत के लोगों की मुश्किलात भी दूर हो सकती हैं अगर दुआ सच्चे दिल से की जाए।

दुआ के बाद क्या करना चाहिए

सिर्फ़ दुआ काफ़ी नहीं, साथ में कुछ ज़रूरी बातें भी हैं।

सब्र रखें। Hazrat Ayub (अलैहिस्सलाम) ने सालों सब्र किया, तब शिफ़ा आई। अल्लाह की क़ुदरत का अपना वक़्त होता है।

इलाज करवाएँ। इस्लाम में इलाज करना सुन्नत है। दुआ के साथ इलाज ज़रूरी है।

नमाज़ क़ायम रखें। नमाज़ से दिल को सुकून मिलता है और अल्लाह से रिश्ता मज़बूत होता है।

उम्मीद मत तोड़ें। अल्लाह तआला की रहमत से मायूस होना गुनाह है। Hazrat Ayub (अलैहिस्सलाम) ने कभी उम्मीद नहीं तोड़ी।

नतीजा (Conclusion)

Hazrat Ayub Ki Dua सिर्फ़ चंद अलफ़ाज़ नहीं हैं यह एक आजिज़ी भरी पुकार है जो सीधे अल्लाह के दरबार में जाती है। Hazrat Ayub (अलैहिस्सलाम) की ज़िंदगी हमें यह सिखाती है कि मुश्किल में सब्र करो, अल्लाह से माँगो और कभी उम्मीद मत तोड़ो।

जब ज़िंदगी में अंधेरा हो, जब बीमारी हारे न दे, जब हाथ ख़ाली हों और दिल थका हो तब यह दुआ पढ़ें:

رَبَّهُ أَنِّي مَسَّنِيَ الضُّرُّ وَأَنتَ أَرْحَمُ الرَّاحِمِينَ

“बेशक मुझे तकलीफ़ पहुँची है, और तू सब रहम करने वालों में से सबसे ज़्यादा रहम वाला है।”

अल्लाह तआला ने Hazrat Ayub (अलैहिस्सलाम) की यह दुआ क़बूल की थी। उसी अल्लाह से उम्मीद रखो वह अरहमुर्राहिमीन है, सबसे ज़्यादा रहमत करने वाला।

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? अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: Hazrat Ayub Ki Dua क़ुरआन की किस सूरह में है?

सूरह अल-अम्बिया, आयत 83 में।

Q2: क्या Hazrat Ayub Ki Dua सिर्फ़ बीमारी के लिए है?

नहीं, हर तरह की तकलीफ़ और परेशानी में पढ़ सकते हैं।

Q3: Hazrat Ayub Ki Dua Ka Wazifa कितने दिन करना चाहिए?

कम से कम 40 दिन, या जब तक मुश्किल न टले।

Q4: क्या इस दुआ को पढ़ने के लिए वुज़ू ज़रूरी है?

वुज़ू अफ़ज़ल है, लेकिन ज़रूरी नहीं।

Q5: Hazrat Ayub (अलैहिस्सलाम) का सब्र कितने सालों का था?

रिवायात के मुताबिक़ 7 से 18 साल के दरमियान।

Q6: Hazrat Ayub Ki Dua in Arabic क्या है?

رَبَّهُ أَنِّي مَسَّنِيَ الضُّرُّ وَأَنتَ أَرْحَمُ الرَّاحِمِينَ

Written by: Ahmad Raza

Credentials: Islamic Studies Content Writer

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