Lailatul Qadr Ki Dua: अरबी, हिंदी, उर्दू, बांग्ला और English में शबे क़द्र के लिए दुआएँ

रमज़ान के आखिरी दस दिन इस्लाम में सबसे ज़्यादा बरकत वाले होते हैं। इन्हीं रातों में एक रात ऐसी होती है जिसे “शबे क़द्र” या Lailatul Qadr कहते हैं। यह वह मुबारक रात है जो हज़ार महीनों से भी बेहतर होती है। हर मुसलमान इस रात की तलाश में रहता है और इसमें खूब इबादत करता है।

हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने एक बार नबी करीम ﷺ से पूछा कि अगर उन्हें यह मुबारक रात मिल जाए तो वो क्या दुआ पढ़ें। उस वक्त नबी ﷺ ने एक खास दुआ सिखाई जो सुनन इब्न माजा और जामे तिर्मिज़ी में दर्ज है। यही Lailatul Qadr Ki Dua इस रात की सबसे अहम और खास दुआ मानी जाती है।

Lailatul Qadr 2026 रमज़ान 1447 हिजरी के आखिरी दस दिनों की ताक रातों में से एक में आई। यह रात रमज़ान के 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं रात में से किसी एक रात होती है। नबी ﷺ ने इसे ताक रातों में तलाश करने की हिदायत दी है। खासकर 27वीं रात को ज़्यादा अहमियत दी जाती है लेकिन सभी ताक रातों में पूरी लगन से इबादत करना सुन्नत है।

Table of Contents

Lailatul Qadr Ki Dua in Arabic

اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي

यह दुआ नबी करीम ﷺ ने खुद बताई है। इसे इस रात बार-बार और दिल की गहराई से पढ़ना चाहिए।

Roman English Transliteration

Lailatul Qadr Ki Dua In Roman English इस तरह पढ़ी जाती है:

Allahumma innaka ‘afuwwun tuhibbul-‘afwa fa’fu ‘anni

यह रोमन उच्चारण उन लोगों के लिए है जो अरबी हर्फ नहीं पढ़ सकते।

Hindi Transliteration (हिंदी में उच्चारण)

Lailatul Qadr Ki Dua In Hindi उच्चारण:

अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफ्वा फ’फू अन्नी

हिंदी उच्चारण उन मुसलमानों के लिए है जो देवनागरी में पढ़ते हैं।

Lailatul Qadr Ki Dua In Hindi

दुआ का तर्जुमा और मतलब

Lailatul Qadr Ki Dua With Tarjuma (हिंदी तर्जुमा):

“ऐ अल्लाह! बेशक तू माफ करने वाला है, तू माफी को पसंद करता है, पस तू मुझे माफ फरमा दे।”

Lailatul Qadr Ki Dua In English:

“O Allah, You are Most Forgiving and You love forgiveness, so forgive me.”

Lailatul Qadr Ki Dua In Urdu:

“اے اللہ! بے شک تو معاف کرنے والا ہے، تو معافی کو پسند کرتا ہے، پس مجھے معاف فرما دے۔”

Lailatul Qadr Ki Dua In Bengali (বাংলা উচ্চারণ):

আল্লাহুম্মা ইন্নাকা আফুউন তুহিব্বুল আফওয়া ফা’ফু আন্নি

Lailatul Qadr Ki Dua Bangla মানে:

“হে আল্লাহ! নিশ্চয়ই তুমি ক্ষমাশীল, তুমি ক্ষমা করতে ভালোবাসো, তাই আমাকে ক্ষমা করো।”

Lailatul Qadr Ki Dua In Telugu:

“యా అల్లాహ్! నిశ్చయంగా నీవు క్షమించేవాడివి, నీవు క్షమించడాన్ని ప్రేమిస్తావు, కాబట్టి నన్ను క్షమించు.”

Lailatul Qadr Ki Dua: हदीस का हवाला

यह दुआ सहीह और मुस्तनद हदीस से साबित है।

हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा फरमाती हैं कि मैंने रसूलुल्लाह ﷺ से अर्ज़ किया:

“या रसूलअल्लाह! अगर मुझे शबे क़द्र मिल जाए तो मैं क्या दुआ मांगूं?”

आप ﷺ ने फरमाया: “तुम यह दुआ पढ़ो:

اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي

📚 हवाला:

  • सुनन इब्न माजा: 3850
  • जामे तिर्मिज़ी: 3513 (हसन सहीह)
  • रियाज़ुस्सालेहीन: 1195

इमाम तिर्मिज़ी ने इस हदीस को “हसन सहीह” कहा है। यह सिलसिला-ए-सनद के लिहाज़ से मज़बूत हदीस है और सभी बड़े मुहद्दिसीन ने इसे क़बूल किया है।

शबे क़द्र में यह दुआ कब पढ़ें

Lailatul Qadr कब होती है

शबे क़द्र रमज़ान के आखिरी दस दिनों की ताक रातों में होती है। नबी करीम ﷺ ने इरशाद फरमाया:

“रमज़ान के आखिरी दस दिनों की ताक रातों में शबे क़द्र को तलाश करो।” (सहीह बुखारी: 2017)

रमज़ान 2026 (1447 हिजरी) की ताक रातें मार्च 2026 में पड़ी थीं। 27वीं रात यानी 15-16 मार्च 2026 को सबसे ज़्यादा अहमियत दी जाती है, लेकिन पांचों ताक रातों में इबादत करना सबसे बेहतर और सुन्नत तरीका है।

सही वक्त कौन सा है

यह दुआ पूरी रात किसी भी वक्त पढ़ी जा सकती है। खास तौर पर इन मौकों पर पढ़ना ज़्यादा फज़ीलत का काम है:

  • नमाज़ के सजदे में
  • सलाम से पहले आखिरी बैठक में
  • तहज्जुद के बाद दुआ के वक्त
  • मग्रिब से फजर तक बार-बार

Lailatul Qadr Ki Dua कितनी बार पढ़नी चाहिए?

यह सवाल Lailatul Qadr Ki Dua Kitni Baar Padhna Chahiye बहुत लोग पूछते हैं। हदीस में इसकी कोई तय तादाद नहीं बताई गई है। आलिम-ए-दीन फरमाते हैं कि जितनी बार पढ़ सकें उतना बेहतर है। सिर्फ एक बार पूरे दिल से मांगना भी काफी है। लेकिन बार-बार पढ़ने से इखलास और तवज्जुह बढ़ती है।

कुछ उलमा ने 100 बार तक पढ़ने का ज़िक्र किया है लेकिन यह फर्ज़ नहीं है। सबसे ज़रूरी बात यह है कि Lailatul Qadr Dua दिल से और पूरी तवज्जुह के साथ मांगी जाए। तादाद से ज़्यादा अहमियत इखलास की है।

दुआ की खासियत और अहमियत

इस मुबारक दुआ में “अफव” (عَفْو) का लफ़्ज़ आया है। अरबी में “अफव” का मतलब है गुनाह का पूरी तरह मिट जाना। यह सिर्फ माफी नहीं बल्कि यह गुनाहों का इस तरह खत्म हो जाना है जैसे वो हुए ही नहीं थे।

अल्लाह का नाम “अल-अफुव्व” (العفو) बताता है कि अल्लाह ताला माफ करना पसंद फरमाता है। जब हम यह दुआ पढ़ते हैं तो हम अल्लाह की इस सिफत को वसीला बनाकर माफी मांगते हैं। यह दुआ इसलिए भी खास है क्योंकि इसे नबी ﷺ ने खुद हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा को सिखाया था। जब नबी ﷺ किसी को खुद कोई दुआ बताएं तो उस दुआ की अहमियत अपने आप समझ में आ जाती है।

फायदे और बरकतें

पिछले गुनाहों की माफी

शबे क़द्र वह रात है जिसमें इबादत हज़ार महीनों से बेहतर होती है। नबी ﷺ ने फरमाया: “जो शख्स ईमान के साथ और सवाब की उम्मीद में शबे क़द्र की रात इबादत में गुज़ारे, उसके पिछले सभी गुनाह माफ कर दिए जाते हैं।” (सहीह बुखारी और सहीह मुस्लिम)

दिल की पूरी सफाई

यह दुआ इखलास के साथ पढ़ने पर दिल को गुनाहों से साफ करती है। “अफव” का अर्थ ही यह है कि गुनाह रिकॉर्ड से मिट जाएं। यह मर्तबा बहुत ऊंचा और खास है। माफ होना और गुनाह का पूरी तरह मिट जाना दोनों में फर्क है, और यह दुआ पूरी तरह मिटाने की दरख्वास्त है।

फरिश्तों की रहमत

शबे क़द्र की रात फजर तक फरिश्ते उतरते रहते हैं और इबादत करने वालों के लिए सलामती की दुआ करते हैं। जो शख्स इस रात यह दुआ पूरे दिल से पढ़े, वह इस रहमत का हकदार बनता है।

नबी ﷺ की खास तालीम

यह दुआ नबी ﷺ की बताई हुई खास दुआ है। दूसरी कोई दुआ इस रात के लिए उतनी सपाट और मज़बूत सनद के साथ साबित नहीं है। यही वजह है कि सभी आलिम इसे शबे क़द्र की सबसे ज़रूरी दुआ मानते हैं।

दुआ पढ़ने का तरीका

पहला कदम: पाकी और वुज़ू

वुज़ू करके पाक साफ हो जाएं। पाक कपड़ों में क़िबले की तरफ बैठें और दिल को दुनियावी ख्यालात से खाली करें।

दूसरा कदम: नफिल नमाज़

दो रकात नफिल नमाज़ पढ़ें। नमाज़ के सजदे में इस दुआ को दोहराएं। सलाम से पहले आखिरी बैठक में भी पढ़ें।

तीसरा कदम: दिल से दुआ

नमाज़ के बाद हाथ उठाएं और पूरे दिल से दुआ मांगें। अपने गुनाहों पर पछतावा करते हुए रोएं या रोने की कोशिश करें। अल्लाह रोने वाले दिल को पसंद फरमाता है।

चौथा कदम: उम्मत के लिए भी दुआ

सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि माँ-बाप, परिवार और पूरी मुस्लिम उम्मत के लिए भी दुआ मांगें। यह रात दुआ की क़बूलियत का खास वक्त है।

शबे क़द्र में और क्या पढ़ें

शबे क़द्र की रात एक दुआ तक सीमित नहीं रहना चाहिए। नबी ﷺ की सुन्नत के मुताबिक इन अमल को भी शामिल करें:

क़ुरआन की तिलावत: रात में जितना हो सके क़ुरआन शरीफ पढ़ें।

दुरूद शरीफ: नबी ﷺ पर कसरत से दुरूद भेजें।

इस्तिगफार: “अस्तगफिरुल्लाह” बार-बार पढ़ें।

रब्बना दुआ: यह दुआ भी शामिल करें:

رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ

Rabbana atina fid-dunya hasanatan wa fil-akhirati hasanatan wa qina ‘adhaban-nar

“ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भी भलाई दे और आखिरत में भी भलाई दे, और हमें जहन्नम के अज़ाब से बचा।”

क़ुरआन में शबे क़द्र की अहमियत

अल्लाह ताला ने सूरह अल-क़द्र में इस रात की अहमियत बयान फरमाई है:

“बेशक हमने इसे क़द्र की रात में नाज़िल किया। और तुम क्या जानो कि क़द्र की रात क्या है? क़द्र की रात हज़ार महीनों से बेहतर है। उसमें फरिश्ते और रूह अपने रब के हुक्म से हर काम के लिए उतरते हैं। वह फजर के निकलने तक सलामती वाली है।” (सूरह अल-क़द्र: 97:1-5)

इस सूरह से यह साफ होता है कि शबे क़द्र सिर्फ एक रात नहीं बल्कि एक पूरी ज़िंदगी के बराबर का मौका है। इस रात की हर दुआ, हर सजदा और हर इबादत हज़ार महीनों की इबादत के बराबर है।

निष्कर्ष

शबे क़द्र इस्लाम की सबसे बड़ी नेमतों में से एक है। इस रात की Lailatul Qadr Ki Dua नबी ﷺ की बताई हुई खास दुआ है जो हमें माफी और रहमत का सबसे ऊंचा दर्जा दिला सकती है। यह दुआ बेहद छोटी है लेकिन इसका मफहूम और असर बहुत गहरा है।

रमज़ान के आखिरी दस दिनों की ताक रातों में इसे ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ें। चाहे अरबी में पढ़ें, हिंदी उच्चारण से पढ़ें या अपनी ज़बान में समझ कर पढ़ें, ज़रूरी यह है कि दुआ दिल की गहराई से मांगी जाए।

अल्लाह ताला हम सभी को शबे क़द्र की बरकतें नसीब फरमाए और हमारे सभी गुनाहों को माफ फरमाए। आमीन।

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? FAQs About Lailatul Qadr Ki Dua

सवाल 1: शबे क़द्र की खास दुआ कौन सी है?

वह दुआ जो नबी ﷺ ने हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा को सिखाई: “अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफ्वा फ’फू अन्नी।” यह सुनन इब्न माजा 3850 और तिर्मिज़ी 3513 में मौजूद है।

सवाल 2: Lailatul Qadr Ki Dua Kitni Baar Padhna Chahiye?

कोई तय तादाद नहीं है। जितना मुमकिन हो उतनी बार पढ़ें। तादाद से ज़्यादा ज़रूरी है कि दुआ दिल से और पूरी तवज्जुह के साथ पढ़ी जाए।

सवाल 3: Lailatul Qadr 2026 कब थी?

यह रात रमज़ान 1447 हिजरी के आखिरी दस दिनों की ताक रातों में से एक में थी। मार्च 2026 में 27वीं रात यानी 15-16 मार्च 2026 को सबसे ज़्यादा अहमियत दी गई। लेकिन पांचों ताक रातों में इबादत करना सबसे बेहतर तरीका है।

सवाल 4: इस दुआ का मतलब क्या है?

इसका मतलब है: “ऐ अल्लाह! तू माफ करने वाला है, तू माफी को पसंद करता है, पस मुझे माफ फरमा दे।”

सवाल 5: क्या यह दुआ सिर्फ शबे क़द्र में पढ़ी जाती है?

नहीं, यह माफी की आम दुआ भी है जो किसी भी वक्त पढ़ी जा सकती है। हालांकि सबसे ज़्यादा फज़ीलत शबे क़द्र की रात ही है क्योंकि इसे खास इसी रात के लिए नबी ﷺ ने बताया था।

सवाल 6: Lailatul Qadr Ki Dua In Bengali कैसे पढ़ें?

बांग্লা उच्चारण: আল্লাহুম্মা ইন্নাকা আফুউন তুহিব্বুল আফওয়া ফা’ফু আন্নি। मतलब: “হে আল্লাহ! তুমি ক্ষমাশীল, তুমি ক্ষমা করতে ভালোবাসো, তাই আমাকে ক্ষমা করো।”

Written by: Ahmad Raza

Credentials: Islamic Studies Content Writer

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