दिन की भाग-दौड़ अपने चरम पर होती है। दफ़्तर, बाज़ार, बच्चे, काम की फ़िक्र। ठीक इसी वक़्त अल्लाह तआला अपने बंदे को बुलाता है।
यही Asar Ki Namaz है।
पाँच वक़्त की फ़र्ज़ नमाज़ों में यह तीसरी नमाज़ है। ज़ुहर के बाद और मग़रिब से पहले। अरबी में “अस्र” का मतलब है दोपहर ढलने का वक़्त। यह वह लम्हा है जब दिन अपने आख़िरी पड़ाव की तरफ़ बढ़ता है और इंसान को याद दिलाया जाता है कि इस दुनिया की मसरूफ़ी अस्थायी है, असली काम रब की बंदगी है।
क़ुरआन मजीद में अल्लाह तआला ने पूरी एक सूरह “अल-अस्र” के नाम से नाज़िल फ़रमाई। इससे ही अंदाज़ा होता है कि इस वक़्त की अहमियत अल्लाह की नज़र में कितनी बड़ी है।
रसूलुल्लाह ﷺ ने असर की नमाज़ के बारे में ख़ास तौर पर फ़रमाया:
“جَمَعَهُمَا صَلَاةَ الْبَرْدَيْنِ دَخَلَ الْجَنَّةَ”
Transliteration:
“Man sallal bardaini dakhalal jannah.”
Hindi Mein Matlab:
“जो दो ठंडी नमाज़ें (फ़ज्र और असर) पाबंदी से पढ़े, वह जन्नत में जाएगा।” (सहीह बुख़ारी)
एक और हदीस में आया:
“जिसकी असर की नमाज़ छूट गई, गोया उसका घर-बार और माल सब लुट गया।” (सहीह बुख़ारी)
यह सिर्फ़ एक नमाज़ नहीं, जन्नत का दरवाज़ा है।
इस आलेख में Asar Ki Namaz Ka Waqt, कितनी रकअत होती हैं, सुन्नत और फ़र्ज़ की नियत, पढ़ने का पूरा तरीक़ा, और नमाज़ के बाद के अज़कार, सब कुछ विस्तार से बताया गया है।
Disclaimer: यह आर्टिकल सिर्फ़ मालूमाती मक़सद के लिए लिखा गया है। इसमें दी गई नमाज़ के तरीक़े और मसाइल की जानकारी आम हनफ़ी फ़िक़्ह के मुताबिक़ है। किसी भी दीनी मसले में अपने क़रीबी आलिम या मुफ़्ती से रहनुमाई लेना ज़्यादा बेहतर है। नमाज़ के वक़्त की सटीक जानकारी के लिए अपनी स्थानीय मस्जिद या किसी भरोसेमंद नमाज़ ऐप से तस्दीक़ करें।
Asar Ki Namaz Ka Waqt | असर की नमाज़ का वक़्त
असर का वक़्त ज़ुहर की नमाज़ के वक़्त के ख़त्म होते ही शुरू हो जाता है। यह तब होता है जब हर चीज़ का साया उसकी असल लंबाई से दोगुना हो जाए।
Asar Ki Namaz Ka Time Kab Tak Hai: यह नमाज़ सूरज डूबने तक रहती है, लेकिन सूरज डूबने से कम से कम 20 मिनट पहले नमाज़ पढ़ लेनी चाहिए। सूरज के बिल्कुल क़रीब नमाज़ पढ़ना मकरूह है।
सामान्य टाइम (मौसम के अनुसार बदलता है)
गर्मी के मौसम में असर का वक़्त लगभग शाम 4:30 बजे से शुरू होता है। सर्दी के मौसम में यह वक़्त थोड़ा पहले, यानी लगभग 4:00 बजे से शुरू हो जाता है।
Asar Ki Namaz Ka Waqt In Mumbai
मुंबई में Asar Ki Namaz Ka Waqt गर्मियों में शाम 4:30 बजे के आस-पास शुरू होता है और सर्दियों में लगभग 4:00 बजे। सटीक वक़्त के लिए अपनी मस्जिद की टाइमिंग या कोई भरोसेमंद नमाज़ ऐप ज़रूर देखें, क्योंकि वक़्त मौसम और तारीख़ के हिसाब से बदलता रहता है।
Asar Ki Namaz Ka Waqt In Pakistan
पाकिस्तान में असर का वक़्त शहर के हिसाब से अलग होता है। कराची, लाहौर, इस्लामाबाद जैसे शहरों में यह वक़्त गर्मियों में शाम 4:45 से 5:00 बजे के बीच और सर्दियों में लगभग 3:30 से 4:00 बजे के बीच होता है। सटीक वक़्त के लिए स्थानीय मस्जिद की अज़ान या Pakistan Standard Time (PST) के हिसाब से बनाया गया नमाज़ कैलेंडर देखें।
Asar Me Kitni Rakat Hoti Hai | असर में कितनी रकअत होती हैं
Asar Ki Namaz Ki Rakat की बात करें तो इस नमाज़ में कुल 8 रकअत होती हैं।
| नमाज़ का हिस्सा | रकअत | क़िस्म |
|---|---|---|
| पहले | 4 | सुन्नत (ग़ैर मुअक्किदा) |
| बाद में | 4 | फ़र्ज़ |
| कुल | 8 |
Asar Me Kitni Rakat Hoti Hai: 4 सुन्नत और 4 फ़र्ज़, यानी कुल 8 रकअत। पहले 4 सुन्नत पढ़ी जाती हैं, फिर 4 फ़र्ज़।
Asar Ki Namaz Ki Niyat | नियत का तरीक़ा
नियत दिल के इरादे का नाम है। ज़बान से कहना ज़रूरी नहीं, लेकिन अगर चाहें तो इस तरह कह सकते हैं:
4 रकअत सुन्नत की नियत
अरबी:
نَوَيْتُ أَنْ أُصَلِّيَ لِلَّهِ تَعَالٰى أَرْبَعَ رَكَعَاتٍ صَلَاةِ الْعَصْرِ سُنَّةُ رَسُولِ اللهِ تَعَالٰى مُتَوَجِّهًا إِلٰى جِهَةِ الْكَعْبَةِ الشَّرِيفَةِ، اللهُ أَكْبَرُ
Transliteration:
Nawaytu an usalliya lillahi ta’ala arba’a raka’atin salatal ‘asr, sunnatu rasulillahi ta’ala, mutawajjihan ila jihatal ka’batish sharifa. Allahu Akbar.
Hindi Mein:
“नियत करता हूँ मैं 4 रकअत नमाज़ सुन्नत असर, वास्ते अल्लाह तआला के, मुँह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़। अल्लाहु अकबर।”
4 रकअत फ़र्ज़ की नियत
अरबी:
نَوَيْتُ أَنْ أُصَلِّيَ لِلَّهِ تَعَالٰى أَرْبَعَ رَكَعَاتٍ صَلَاةِ الْعَصْرِ فَرْضُ اللهِ تَعَالٰى مُتَوَجِّهًا إِلٰى جِهَةِ الْكَعْبَةِ الشَّرِيفَةِ، اللهُ أَكْبَرُ
Transliteration:
Nawaytu an usalliya lillahi ta’ala arba’a raka’atin salatal ‘asr, fardullahi ta’ala, mutawajjihan ila jihatal ka’batish sharifa. Allahu Akbar.
Hindi Mein: “
नियत की मैंने 4 रकअत नमाज़ फ़र्ज़ असर की, वास्ते अल्लाह तआला के, मुँह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़। अल्लाहु अकबर।”
Asar Ki Namaz Padhne Ka Tarika | पढ़ने का तरीक़ा
4 रकअत सुन्नत का तरीक़ा
रकअत 1 और 2:
नियत करने के बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए हाथ नाफ़ के नीचे बाँध लें।
सना पढ़ें: “सुबहानकल्लाहुम्मा व बिहम्दिका व तबारकस्मुका व तआला जद्दुका वला इलाहा गैरुक।”
अऊज़ु बिल्लाह और बिस्मिल्लाह पढ़ें।
सूरह फ़ातिहा पढ़ें, फिर कोई एक सूरह (जैसे सूरह इख़लास) पढ़ें।
रुकू में जाएँ, 3 बार “सुबहान रब्बी अल अज़ीम” पढ़ें।
रुकू से उठें, “समीअल्लाहु लिमन हमीदह” कहें, फिर “रब्बना व लकल हम्द” कहें।
पहला सजदा: “सुबहान रब्बी अल आला” 3 बार पढ़ें।
सजदे से उठें, थोड़ी देर बैठें।
दूसरा सजदा: “सुबहान रब्बी अल आला” 3 बार पढ़ें।
अल्लाहु अकबर कहते हुए दूसरी रकअत के लिए खड़े हों।
दूसरी रकअत भी इसी तरह पढ़ें (सना और अऊज़ु बिल्लाह नहीं दोहराएँ, सीधे बिस्मिल्लाह से शुरू करें)। दो सजदों के बाद क़ाइदा-ए-ऊला (पहला बैठक) में बैठें और सिर्फ़ अत्तहिय्यात पढ़ें:
अत्तहिय्यात:
“अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तय्यिबातु, अस्सलामु अलैका अय्युहन्नबिय्यु व रहमतुल्लाहि व बरकातुह, अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस्सालिहीन। अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु व अशहदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुह।”
“अशहदु अल्लाह…” पर शहादत की उँगली उठाएँ। अत्तहिय्यात के बाद तीसरी रकअत के लिए खड़े हों।
रकअत 3 और 4 पहली दो रकअत की तरह ही पढ़ें।
चौथी रकअत के दो सजदों के बाद क़ाइदा-ए-आख़िरा (आख़िरी बैठक) में बैठें और पूरा क़ाइदा पढ़ें:
अत्तहिय्यात पढ़ें, फिर: “अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तय्यिबातु, अस्सलामु अलैका अय्युहन्नबिय्यु व रहमतुल्लाहि व बरकातुह, अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस्सालिहीन। अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु व अशहदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुह।”
दरूद इब्राहीम: “अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिन व अला आलि मुहम्मदिन, कमा सल्लैता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीम, इन्नका हमीदुम मजीद। अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिन व अला आलि मुहम्मदिन, कमा बारकता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीम, इन्नका हमीदुम मजीद।”
दुआ ए मसूरा: “अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लमतु नफ्सी ज़ुल्मन कसीरा, वला यग़फिरुज़्ज़ुनूब इल्ला अन्त, फ़ग़फिरली मग़फिरतम मिन इन्दिक, वर्हमनी इन्नका अन्तल ग़फूरुर्रहीम।”
फिर दाएँ और बाएँ सलाम फेरें: “अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह।”
इस तरह 4 रकअत सुन्नत पूरी हो गई।
4 रकअत फ़र्ज़ का तरीक़ा
फ़र्ज़ नमाज़ की नियत करें। तरीक़ा सुन्नत जैसा ही है, बस कुछ फ़र्क़ हैं:
पहली और दूसरी रकअत में सूरह फ़ातिहा के बाद कोई सूरह पढ़ें।
तीसरी और चौथी रकअत में सूरह फ़ातिहा के बाद सीधे रुकू में चले जाएँ, कोई अतिरिक्त सूरह नहीं पढ़नी।
दो रकअत के बाद क़ाइदे में सिर्फ़ अत्तहिय्यात पढ़ें, फिर तीसरी रकअत के लिए खड़े हों।
चौथी रकअत के बाद पूरा क़ाइदा (अत्तहिय्यात, दरूद इब्राहीम, दुआ ए मसूरा) पढ़ें और दोनों तरफ़ सलाम फेरें।
इस तरह 4 रकअत फ़र्ज़ भी पूरी हो गई।
Asar Ki Namaz Ke Baad Konsi Surah Padhna Chahiye
Asar Ki Namaz Ke Baad कुछ ख़ास अज़कार और दुआएँ पढ़ना बहुत अफ़ज़ल है। हदीस में आया है कि नमाज़ के बाद अज़कार करने वाला इंसान अल्लाह की रहमत में रहता है।
नमाज़ के बाद पढ़ी जाने वाली दुआएँ
1. इस्तिग़फ़ार (3 बार):
अरबी: أَسْتَغْفِرُ اللهَ
Transliteration: Astaghfirul Laah
Hindi Mein: “ऐ अल्लाह! मैं तुझसे माफ़ी माँगता हूँ।”
2. दुआ ए सलाम:
अरबी: اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ وَمِنْكَ السَّلَامُ، تَبَارَكْتَ يَا ذَا الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ
Transliteration: Allahumma Antas-Salaam, wa minkas-salaam, tabaarakta yaa Zal-Jalaali wal-Ikraam.
Hindi Mein: “ऐ अल्लाह! तू ही सलामती देने वाला है, और सलामती बस तेरी ही तरफ़ से आती है। तू बड़ी बरकत वाला है, ऐ जलाल और इकराम वाले।”
3. दुआ ए ज़िक्र:
अरबी: اللَّهُمَّ أَعِنِّي عَلَىٰ ذِكْرِكَ وَشُكْرِكَ وَحُسْنِ عِبَادَتِكَ
Transliteration: Allahumma a’inni ‘ala dhikrika wa shukrika wa husni ‘ibadatik.
Hindi Mein: “ऐ अल्लाह! मेरी मदद फ़रमा कि मैं तेरा ज़िक्र करता रहूँ, तेरा शुक्र अदा करता रहूँ, और तेरी इबादत बेहतर तरीक़े से करता रहूँ।”
4. तस्बीह:
33 बार (Subhaan Allah): سُبْحَانَ اللهِ
33 बार (Alhamdulillah): اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ
34 बार (Allahu Akbar): اَللهُ أَكْبَرُ
5. आयतुल कुर्सी:
नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ना हदीस से साबित है। जो शख़्स हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ता है, उसे जन्नत में जाने से कोई नहीं रोक सकता, सिवाय मौत के। (नसाई)
Asar Ki Namaz Ke Baad Konsi Surah Padhna Chahiye: सूरह के बारे में कोई ख़ास तअय्युन नहीं है, लेकिन असर के बाद सूरह फ़ातिहा, सूरह इख़लास और मुअव्विज़तैन (सूरह फ़लक़ और सूरह नास) पढ़ना मुस्तहब है।
Asar Ki Namaz Ki Fazilat | फ़ज़ीलत और अहमियत
जन्नत का वादा
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “जो फ़ज्र और असर की नमाज़ पाबंदी से पढ़ता है, वह जन्नत में जाएगा।” (सहीह बुख़ारी)
जहन्नम से हिफ़ाज़त
एक और हदीस में आया है: “जो फ़ज्र और असर की नमाज़ पढ़ता है, उसे जहन्नम की आग नहीं छुएगी।” (मुस्लिम)
फ़रिश्तों की हाज़िरी
हदीस में यह भी आया है कि फ़ज्र और असर की नमाज़ों में फ़रिश्ते हाज़िर होते हैं और वे अल्लाह के सामने इस बात की गवाही देते हैं।
दुनिया और आख़िरत की कामयाबी
Asar Ki Namaz सिर्फ़ आख़िरत का ज़रिया नहीं, बल्कि यह दुनिया में भी इंसान को सुकून और तस्कीन देती है। मेडिकल साइंस भी यह मानती है कि दिन के बीच में कुछ देर रुककर इबादत करने से तनाव कम होता है।
Asar Ki Namaz Mein Gaflat Se Bachein | ग़फ़लत से बचाव
दिन का यह वक़्त बहुत मसरूफ़ी का होता है। लोग काम-काज, बाज़ार और रोज़ी-रोटी की फ़िक्र में इतने उलझे होते हैं कि Asar Ki Namaz का वक़्त गुज़र जाता है।
नबी ﷺ ने इस ग़फ़लत के बारे में ख़बरदार किया है। हदीस में आया है कि जो शख़्स असर की नमाज़ को बेवजह छोड़ दे, उसके अमल बेकार हो जाते हैं। (सहीह बुख़ारी)
कोशिश यह होनी चाहिए:
- फ़ोन में नमाज़ का अलार्म लगाएँ।
- दफ़्तर या काम की जगह पर नमाज़ की जगह तय करें।
- मस्जिद के नज़दीक हों तो जमाअत के साथ नमाज़ अदा करें।
Asar Ki Namaz Ke Masaail | ज़रूरी मसाइल
क़ज़ा नमाज़ का मसला
अगर किसी वजह से असर की नमाज़ क़ज़ा हो जाए, तो सूरज डूबने से पहले तक पढ़ सकते हैं। वक़्त निकल जाए तो बाद में क़ज़ा के तरीक़े से पढ़ें। लेकिन जानबूझकर नमाज़ क़ज़ा करना जायज़ नहीं।
सफ़र में नमाज़
सफ़र में भी Asar Ki Namaz अदा करना ज़रूरी है। मुसाफ़िर के लिए चार रकअत फ़र्ज़ की जगह दो रकअत पढ़ने की छूट है, जिसे “क़स्र” कहते हैं। इसकी शर्तें और मसाइल किसी आलिम से मालूम करें।
बीमारी में नमाज़
बीमारी में बैठकर या लेटकर भी नमाज़ अदा की जा सकती है। इशारे से नमाज़ पढ़ना भी जायज़ है अगर खड़े होने या बैठने की ताक़त न हो।
निष्कर्ष | Conclusion
Asar Ki Namaz अल्लाह का वह हुक्म है जिसे कोई मुसलमान नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता। दिन की मसरूफ़ियत में यह नमाज़ हमें अपने असल मक़सद की याद दिलाती है।
Asar Ki Namaz Ka Waqt, रकअतें, नियत, और उसके बाद के अज़कार, सब मिलाकर यह नमाज़ एक मुकम्मल इबादत है।
अल्लाह तआला से दुआ है कि वह हम सबको पाँचों वक़्त की नमाज़ पाबंदी से पढ़ने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए और हमारी इबादत को क़बूल फ़रमाए। आमीन।
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? FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1: Asar Ki Namaz Ki Rakat kitni hoti hain?
जवाब: असर में 4 रकअत सुन्नत और 4 रकअत फ़र्ज़ होती हैं, कुल 8 रकअत।
सवाल 2: Asar Ki Namaz Ka Time Kab Tak Hai?
जवाब: असर का वक़्त सूरज ढलने तक रहता है, लेकिन सूरज डूबने से 20 मिनट पहले तक नमाज़ पढ़ लें।
सवाल 3: Asar Me Kitni Rakat Hoti Hai?
जवाब: कुल 8 रकअत होती हैं, जिनमें 4 सुन्नत और 4 फ़र्ज़ शामिल हैं।
सवाल 4: असर के बाद कौन सी तस्बीह पढ़ें?
जवाब: सुबहान अल्लाह 33 बार, अलहमदुलिल्लाह 33 बार, और अल्लाहु अकबर 34 बार पढ़ें।
सवाल 5: Asar Ki Namaz Ka Waqt In Mumbai kab hota hai?
जवाब: मुंबई में गर्मियों में लगभग 4:30 बजे और सर्दियों में लगभग 4:00 बजे शुरू होता है।
सवाल 6: Pakistan Mein Asar Namaz Ka Waqt Kab Hota Hai?
जवाब: गर्मियों में शाम 4:45 से 5:00 बजे और सर्दियों में 3:30 से 4:00 बजे के बीच होता है।
सवाल 7: क्या असर की 4 सुन्नत ज़रूरी हैं?
जवाब: 4 रकअत सुन्नत फ़र्ज़ नहीं हैं, लेकिन पढ़ना बड़ा सवाब है। फ़र्ज़ ज़रूर पढ़ें।
सवाल 8: क्या असर घर पर पढ़ सकते हैं?
जवाब: जी हाँ। मर्दों के लिए मस्जिद में जमाअत अफ़ज़ल है, लेकिन घर पर भी नमाज़ सही है।
Written by: Ahmad Raza
Credentials: Islamic Studies Content Writer
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