दरूद शरीफ़ इस्लाम में नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ पर सलाम और रहमत भेजने का पवित्र तरीका है। अल्लाह तआला ने सूरह अल-अहज़ाब की आयत 56 में ख़ुद यह हुक्म दिया है कि वो और उसके फ़रिश्ते नबी ﷺ पर दुरूद भेजते हैं और ईमान वालों को भी यही करना चाहिए।
Chota Darood Sharif In Hindi में जानना उन लोगों के लिए ख़ास तौर पर ज़रूरी है जो अरबी नहीं जानते लेकिन नबी ﷺ की मुहब्बत में दुरूद पढ़ना चाहते हैं। यह छोटा दरूद किसी भी वक़्त, किसी भी हालत में पढ़ा जा सकता है।
Disclaimer: यह आर्टिकल सिर्फ़ मालूमाती और दीनी तालीम के मक़सद से लिखा गया है। इसमें दी गई मालूमात क़ुरआन और हदीस की मशहूर किताबों पर मबनी है। किसी भी दीनी मसले में अपने क़रीबी आलिम या मुफ़्ती से रहनुमाई लें।
Chota Darood Sharif Kya Hai?
“दरूद” फ़ारसी लफ़्ज़ है जिसका मतलब है रहमत और बरकत की दुआ, और “शरीफ़” अरबी में “मुकद्दस” या “उच्च” को कहते हैं। मिलाकर दरूद शरीफ़ का मतलब है नबी ﷺ पर पाक और मुकद्दस दरूद भेजना। इसे अरबी में “सलवात” कहते हैं।
Sabse Chota Darood Sharif वो है जो कम अल्फ़ाज़ में पूरी मुहब्बत और अदब के साथ नबी ﷺ पर सलाम भेजता है। इस्लामी उलेमा के मुताबिक़ निम्नलिखित दोनों दरूद सबसे मशहूर, आसान और मक़बूल हैं।
Sabse Chota Darood Sharif — दो मुकम्मल दरूद
पहला दरूद: Sallallahu Alayhi Wasallam
यह इस्लाम का सबसे छोटा और सबसे ज़्यादा पढ़ा जाने वाला दरूद है। जब भी नबी ﷺ का नाम लिया जाए, यह दरूद पढ़ना वाजिब है। इसे पढ़ने से नबी ﷺ तक सलाम पहुँचता है और फ़रिश्ते उस बंदे के लिए दुआ करते हैं।
Chota Darood Sharif In Arabic:
صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
Transliteration (Roman):
Sallallahu Alayhi Wasallam
Chota Darood Sharif In English:
May Allah send blessings upon him and grant him peace.
Chota Darood Sharif In Hindi:
अल्लाह उन (नबी ﷺ) पर रहमत और सलामती नाज़िल फ़रमाए।
Chota Darood Sharif In Urdu:
اللہ ان (نبی ﷺ) پر رحمت اور سلامتی نازل فرمائے۔
दूसरा दरूद: Allahumma Salli Wa Sallim Ala Muhammad
यह दरूद थोड़ा लंबा लेकिन बेहद आसान है। इसमें नबी ﷺ और उनकी आल दोनों पर रहमत और सलामती की दुआ की जाती है। यह दरूद नमाज़ के बाद और अज़कार में पढ़ने के लिए बहुत मुनासिब है।
Chota Darood Sharif In Arabic:
اللَّهُمَّ صَلِّ وَسَلِّمْ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ
Transliteration (Roman):
Allahumma Salli Wa Sallim Ala Muhammadin Wa Ala Aali Muhammad
Chota Darood Sharif In English:
O Allah, send blessings and peace upon Muhammad and upon the family of Muhammad.
Chota Darood Sharif In Hindi:
ऐ अल्लाह! हज़रत मुहम्मद ﷺ पर और उनकी आल पर रहमत और सलामती नाज़िल फ़रमा।
Chota Darood Sharif In Urdu:
اے اللہ! حضرت محمد ﷺ پر اور ان کی آل پر رحمت اور سلامتی نازل فرما۔
Darood Sharif Ki Ahmiyat — क़ुरआन और हदीस से
क़ुरआन का हुक्म
अल्लाह तआला ने सूरह अल-अहज़ाब, आयत 56 में इरशाद फ़रमाया:
إِنَّ اللَّهَ وَمَلَائِكَتَهُ يُصَلُّونَ عَلَى النَّبِيِّ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا صَلُّوا عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا تَسْلِيمًا
अर्थ: बेशक अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी ﷺ पर दरूद भेजते हैं। ऐ ईमान वालो! तुम भी उन पर दरूद और सलाम भेजो।
यह आयत यह वाज़ेह करती है कि दरूद भेजना सिर्फ़ बंदों का काम नहीं, ख़ुद अल्लाह और उसके फ़रिश्ते भी यह करते हैं। यह बात इस अमल की कितनी बड़ी क़दर-ओ-क़ीमत को बयान करती है।
हदीसों का बयान
पहली हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (र.अ.) से रिवायत है, नबी ﷺ ने फ़रमाया:
“जो मुझ पर एक बार दरूद भेजे, अल्लाह उस पर दस बार रहमत नाज़िल फ़रमाता है।” (सहीह मुस्लिम, हदीस 408)
दूसरी हदीस: नबी ﷺ ने फ़रमाया:
“क़यामत के दिन मेरे सबसे क़रीब वो शख़्स होगा जिसने मुझ पर सबसे ज़्यादा दरूद भेजा होगा।” (तिर्मिज़ी)
तीसरी हदीस: नबी ﷺ ने फ़रमाया:
“वो शख़्स बख़ील है जिसके सामने मेरा नाम लिया जाए और वो मुझ पर दरूद न भेजे।” (तिर्मिज़ी, हदीस 3545)
यह तीनों हदीसें मिलकर यह साबित करती हैं कि दरूद पढ़ना न सिर्फ़ इबादत है बल्कि नबी ﷺ से मुहब्बत का सबूत भी है।
Darood Sharif Padhne Ka Sahi Tariqa
दरूद शरीफ़ पढ़ने का कोई एक ख़ास वक़्त या तरीका ज़रूरी नहीं, लेकिन कुछ बातों का ख़याल रखने से सवाब बढ़ जाता है।
1. वुज़ू की हालत में बैठें
दरूद हर हाल में पढ़ा जा सकता है, लेकिन वुज़ू के साथ पढ़ने से ज़्यादा सवाब मिलता है।
2. क़िब्ले की तरफ़ रुख़ करें
अगर मुमकिन हो तो क़िब्ले की तरफ़ मुँह करके बैठें और आहिस्ता से पढ़ें।
3. तलफ़्फ़ुज़ सहीह रखें
जल्दी-जल्दी पढ़ने के बजाय ठहर-ठहर कर हर लफ़्ज़ सहीह तरह से अदा करें।
4. दिल में मुहब्बत और अदब रखें
दरूद सिर्फ़ ज़बान से नहीं, दिल की सच्ची मुहब्बत के साथ पढ़ना चाहिए। यही दरूद की रूह है।
5. रोज़ाना मिक़दार तय करें
कम से कम सुबह-शाम दस-दस बार पढ़ने की आदत बनाएं और धीरे-धीरे बढ़ाते जाएं।
Chota Darood Sharif Kab Padhein — सही मौक़े
1. नबी ﷺ का नाम सुनते या बोलते वक़्त
जब भी नबी ﷺ का नाम लिया जाए, फ़ौरन दरूद पढ़ें। इसे उलेमा ने वाजिब क़रार दिया है और इसमें कोताही करना गुनाह है।
2. हर नमाज़ के बाद
हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद दरूद पढ़ना मुस्तहब है। यह दिल में सुकून और दुआओं में क़बूलियत का ज़रिया बनता है।
3. सुबह और शाम के अज़कार में
सुबह दस बार और शाम को दस बार दरूद पढ़ने से क़यामत के दिन नबी ﷺ की शफ़ाअत नसीब होती है। (तबरानी, सहीह अत-तरगीब 1/273)
4. जुमे के दिन
नबी ﷺ ने फ़रमाया: “जुमे के दिन मुझ पर ज़्यादा से ज़्यादा दरूद पढ़ो क्योंकि वो दिन मशहूद है और फ़रिश्ते उस दिन हाज़िर रहते हैं।” (इब्ने माजा)
5. दुआ की शुरुआत और आख़िर में
उलेमा फ़रमाते हैं कि दुआ से पहले और बाद में दरूद पढ़ने से दुआ ज़्यादा जल्दी क़बूल होती है। दुआ आसमान और ज़मीन के बीच रुकी रहती है जब तक दरूद न पढ़ा जाए।
6. अज़ान के बाद
अज़ान सुनने के बाद दरूद पढ़ना और फिर दुआ करना सुन्नत है।
7. मजलिसों में
जो महफ़िल अल्लाह के ज़िक्र और नबी ﷺ के दरूद के बिना ख़त्म हो, वो महफ़िल क़यामत के दिन हसरत का सबब बनेगी। (मुस्नद अहमद)
Chota Darood Sharif Ke Fayde — फ़ज़ीलत और बरकात
1. एक दरूद पर दस रहमतें
नबी ﷺ ने फ़रमाया: “जो एक बार दरूद पढ़े, अल्लाह उस पर दस रहमतें नाज़िल फ़रमाता है।” (सहीह मुस्लिम 408) यह अल्लाह का वादा है जो कभी नहीं बदलता।
2. दस गुनाह मिटते हैं
हदीस में आया है कि एक दरूद पढ़ने पर दस गुनाह मिट जाते हैं और दस दर्जे बुलंद होते हैं। (नसाई)
3. क़यामत में नबी ﷺ की क़ुर्बत
जो शख़्स दुनिया में ज़्यादा दरूद पढ़े, वो क़यामत के दिन नबी ﷺ के सबसे क़रीब होगा। (तिर्मिज़ी)
4. फ़िक्रों का ख़ात्मा
नबी ﷺ ने फ़रमाया: “जो अपनी तमाम दुआएं दरूद बना दे, उसकी तमाम फ़िक्रें दूर हो जाती हैं और गुनाह माफ़ हो जाते हैं।” (तिर्मिज़ी 2457)
5. नबी ﷺ की शफ़ाअत
जो सुबह दस बार और शाम को दस बार दरूद पढ़े, उसे क़यामत के दिन नबी ﷺ की शफ़ाअत नसीब होगी। (तबरानी)
6. दिल में नूर और सुकून
दरूद पढ़ने से दिल में एक रूहानी नूर और सुकून पैदा होता है। उलेमा ने लिखा है कि दरूद की कसरत इंसान के दिल से ग़फ़लत और बेचैनी दूर करती है।
Darood Sharif Aur Namaz Ka Rishta
नमाज़ में दरूद इब्राहीम पढ़ा जाता है जो थोड़ा लंबा है, लेकिन नमाज़ के बाहर Chota Darood Sharif In Hindi में याद करके पढ़ा जा सकता है। नबी ﷺ ने सहाबा को सिखाया कि अगर पूरा दरूद याद न हो तो कम से कम “Allahumma Salli Alayhi” कहो, यह भी काफ़ी है।
हनफ़ी मसलक के मशहूर उलेमा के मुताबिक़ नमाज़ के आख़िरी क़ादे में दरूद पढ़ना वाजिब है और इसके बिना नमाज़ मकरूह होती है। नमाज़ से बाहर भी जितना दरूद पढ़ा जाए उतना बेहतर है।
Darood Sharif Ki Roz Ki Aadat Kaise Banayein
बहुत से लोग चाहते हैं कि दरूद पढ़ें लेकिन भूल जाते हैं। यहाँ कुछ आसान तरीक़े हैं जिनसे रोज़ाना की आदत बन सकती है।
नमाज़ के साथ जोड़ें हर नमाज़ के बाद तीन बार Chota Darood Sharif पढ़ने की नियत करें। पाँच नमाज़ों में पंद्रह दरूद हो जाएंगे।
सुबह उठते ही पढ़ें बिस्तर से उठते वक़्त “Sallallahu Alayhi Wasallam” दस बार पढ़ें। इसमें दो मिनट भी नहीं लगते।
नाम सुनते ही पढ़ें जब भी किसी तक़रीर, बयान या बातचीत में नबी ﷺ का नाम आए, फ़ौरन दरूद पढ़ें। यह सबसे क़ुदरती तरीका है।
जुमे का ख़ास विर्द जुमे के दिन सौ बार Chota Darood Sharif पढ़ने का विर्द बनाएं। यह थोड़े वक़्त में मुमकिन है और इसकी फ़ज़ीलत बहुत ज़्यादा है।
निष्कर्ष – Nateeja
दरूद शरीफ़ एक ऐसी इबादत है जो अल्लाह का हुक्म भी है और नबी ﷺ से मुहब्बत का इज़हार भी। Chota Darood Sharif In Hindi में समझ लेने के बाद इसे पढ़ना हर किसी के लिए आसान हो जाता है।
Sabse Chota Darood Sharif In Hindi चाहे “Sallallahu Alayhi Wasallam” हो या “Allahumma Salli Wa Sallim Ala Muhammad” — दोनों अल्लाह की बारगाह में क़बूल हैं। एक दरूद पर दस रहमतें, दस गुनाहों की माफ़ी और क़यामत में नबी ﷺ की क़ुर्बत — यह फ़ायदे किसी और छोटे अमल में नहीं मिलते।
अल्लाह हम सबको कसरत से दरूद पढ़ने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए और नबी ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमाए। आमीन।
? FAQs – Chota Darood Sharif
सवाल 1: सबसे छोटा दरूद शरीफ कौन सा है?
“Sallallahu Alayhi Wasallam” (صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) — यही सबसे छोटा दरूद है और हर वक़्त पढ़ा जा सकता है।
सवाल 2: Chota Darood Sharif In Arabic क्या है?
“صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ” और “اللَّهُمَّ صَلِّ وَسَلِّمْ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ” — दोनों Chota Darood Sharif In Arabic हैं।
सवाल 3: क्या दरूद बिना वुज़ू के पढ़ सकते हैं?
हाँ। दरूद हर हाल में पढ़ना जाइज़ है, वुज़ू शर्त नहीं है।
सवाल 4: दरूद रोज़ाना कितनी बार पढ़ना चाहिए?
कम से कम सुबह-शाम दस-दस बार। जितना ज़्यादा पढ़ें उतना बेहतर।
सवाल 5: क्या औरतें भी दरूद पढ़ सकती हैं?
हाँ। दरूद मर्द और औरत दोनों के लिए बराबर है। हर मुसलमान पर नबी ﷺ का नाम सुनते ही दरूद पढ़ना वाजिब है।
सवाल 6: जुमे के दिन दरूद की क्या ख़ास फ़ज़ीलत है?
जुमे के दिन दरूद की तादाद बढ़ाने का ख़ास हुक्म है। नबी ﷺ ने फ़रमाया कि इस दिन दरूद सीधे उन तक पहुँचता है।
सवाल 7: क्या दरूद पढ़ने से दुआ क़बूल होती है?
उलेमा का इत्तिफ़ाक़ है कि दुआ से पहले और बाद में दरूद पढ़ने से दुआ की क़बूलियत बढ़ती है।
Written by: Ahmad Raza
Credentials: Islamic Studies Content Writer
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