Salatul Tasbeeh Ki Namaz एक ख़ास नफ़्ल नमाज़ है जो हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ ने अपने चाचा हज़रत अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु को सिखाई थी। इस नमाज़ में अल्लाह की बड़ाई और तस्बीह का बार-बार ज़िक्र किया जाता है।
Salatul Tasbeeh एक ऐसी नमाज़ है जिसे पढ़ने से इंसान के पुराने और नए, छोटे और बड़े, ज़ाहिर और छुपे सभी तरह के गुनाह माफ़ हो जाते हैं। यह नमाज़ चार रकअत में अदा की जाती है और इसमें कुल 300 मरतबा तस्बीह पढ़ी जाती है।
अगर आप जानना चाहते हैं कि Salatul Tasbeeh Ki Namaz कैसे पढ़ी जाती है, नियत क्या है और तस्बीह का सही तरीका क्या है, तो यहाँ पूरी जानकारी दी गई है।
Disclaimer: यहाँ दी गई जानकारी मशहूर इस्लामी किताबों और भरोसेमंद उलेमा के बयानात पर आधारित है। किसी भी इबादत या मसअले में अपने स्थानीय आलिम या मुफ़्ती से रहनुमाई लेना बेहतर है।
सलातुल तस्बीह की तस्बीह (Salatul Tasbeeh Ki Dua)
यह नमाज़ जिस खास तस्बीह के साथ पढ़ी जाती है वह यह है:
Arabic:
سُبْحَانَ اللّٰهِ وَالْحَمْدُ لِلّٰهِ وَلَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَاللّٰهُ أَكْبَرُ
Roman Transliteration:
Subhaanallaahi Walhamdulillaahi Walaa Ilaaha Illallaahu Wallaahu Akbar
Hindi Transliteration:
सुब्हानल्लाहि वलहम्दुलिल्लाहि वला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर
Hindi Meaning:
अल्लाह पाक है, तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं, अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, और अल्लाह सबसे बड़ा है।
English Meaning:
All Glory is to Allah, All Praise is to Allah, There is no god but Allah, Allah is the Greatest.
यही तस्बीह Salatul Tasbeeh Namaz का आधार है। पूरी नमाज़ में इसे 300 मरतबा पढ़ा जाता है।
सलातुल तस्बीह की नियत (Salatul Tasbeeh Ki Niyat)
Arabic:
نَوَيْتُ أَنْ أُصَلِّيَ لِلّٰهِ تَعَالَى أَرْبَعَ رَكَعَاتِ صَلَاةِ التَّسْبِيحِ مُتَوَجِّهًا إِلَى جِهَةِ الْكَعْبَةِ الشَّرِيفَةِ، اَللّٰهُ أَكْبَرُ
Roman Transliteration (English):
Nawaytu an usalliya lillahi ta’ala arba’a raka’atin salat-it-tasbihi mutawajjihan ila jihati-l-ka’bati-sh-sharifati, Allahu Akbar.
Hindi Transliteration:
नवयतु अन उसल्लिया लिल्लाहि तआला अरबआ रकआतिन सलातित तस्बीहि मुतवज्जिहन इला जिहतिल काबतिश शरीफति, अल्लाहु अकबर।
नियत (Hindi):
नीयत की मैंने चार रकअत सलातुल तस्बीह, वास्ते अल्लाह तआला के, मुँह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़।
نیت (Urdu):
نیت کی میں نے چار رکعت صلوٰۃ التسبیح کی، واسطے اللہ تعالیٰ کے، منہ میرا کعبہ شریف کی طرف۔
Meaning (English):
I intend to offer four Rakat of Salatul Tasbeeh for the sake of Allah, facing the direction of the Holy Kaaba. Allah is the Greatest.
सलातुल तस्बीह की नमाज़ का तरीका (Salatul Tasbeeh Namaz Ka Tarika)
Salatul Tasbeeh Ki Namaz चार रकअत में पढ़ी जाती है। हर रकअत में 75 मरतबा तस्बीह पढ़ी जाती है। इस तरह चारों रकअतों में मिलाकर 300 मरतबा तस्बीह पूरी होती है।
नीचे हर रकअत का पूरा तरीका बताया गया है।
पहली रकअत का तरीका
1. नियत और सना के बाद 15 मरतबा तस्बीह
नमाज़ शुरू करने के बाद “सुब्हानक अल्लाहुम्मा…” (सना) पढ़ें। इसके बाद तकबीर कहे बिना यही तस्बीह 15 मरतबा पढ़ें:
سُبْحَانَ اللّٰهِ وَالْحَمْدُ لِلّٰهِ وَلَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَاللّٰهُ أَكْبَرُ
2. सूरे मिलाने के बाद 10 मरतबा तस्बीह
इसके बाद अऊज़ुबिल्लाह, बिस्मिल्लाह पढ़ें, सूरह फ़ातिहा और कोई सूरह मिलाएं। सूरह ख़त्म होने के बाद रुकूअ में जाने से पहले यही तस्बीह 10 मरतबा पढ़ें।
3. रुकूअ में 10 मरतबा तस्बीह
रुकूअ में “सुब्हान रब्बियल अज़ीम” पढ़ने के बाद यही तस्बीह 10 मरतबा पढ़ें।
4. क़याम (रुकूअ के बाद खड़े होकर) 10 मरतबा तस्बीह
रुकूअ से खड़े होकर “समिअल्लाहु लिमन हमिदह, रब्बना लकल हम्द” पढ़ने के बाद यही तस्बीह 10 मरतबा पढ़ें।
5. पहले सज्दे में 10 मरतबा तस्बीह
पहले सज्दे में “सुब्हान रब्बियल आला” पढ़ने के बाद यही तस्बीह 10 मरतबा पढ़ें।
6. जल्सा (दो सज्दों के दर्मियान) 10 मरतबा तस्बीह
दोनों सज्दों के बीच बैठने की हालत (जल्सा) में यही तस्बीह 10 मरतबा पढ़ें।
7. दूसरे सज्दे में 10 मरतबा तस्बीह
दूसरे सज्दे में “सुब्हान रब्बियल आला” पढ़ने के बाद यही तस्बीह 10 मरतबा पढ़ें।
इस तरह पहली रकअत में कुल: 15 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 = 75 मरतबा तस्बीह पढ़ी जाएगी।
बाकी रकअतें
बाकी तीनों रकअतें (दूसरी, तीसरी, चौथी) भी इसी तरीके से पढ़ी जाती हैं।
दूसरी रकअत के बाद क़अदे में अत्तहियात पढ़ें और तीसरी रकअत के लिए खड़े हो जाएं। चौथी रकअत के बाद आखिरी क़अदे में अत्तहियात, दरूद इब्राहिम और दुआ पढ़कर सलाम फेरें।
कुल तस्बीह: 75 × 4 = 300 मरतबा
सलातुल तस्बीह की नमाज़ का वक्त (Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Time)
Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Time बहुत वसीह है। इसे दिन और रात के किसी भी हिस्से में पढ़ा जा सकता है, सिवाय मकरूह औकात के।
मकरूह औकात जिनसे बचना ज़रूरी है:
- सूरज निकलने के वक्त (जब तक सूरज पूरी तरह न चढ़ जाए, क़रीबन 20 मिनट)
- ठीक दोपहर जब सूरज बीचोबीच हो (ज़वाल का वक्त)
- सूरज डूबने के वक्त (जब तक सूरज पूरी तरह न डूब जाए)
इन तीन औकात के अलावा Salatul Tasbeeh Namaz किसी भी वक्त अदा की जा सकती है।
सबसे अफ़ज़ल वक्त: उलेमा ने ज़ुहर से पहले का वक्त सबसे बेहतर बताया है। इसके अलावा तहज्जुद के वक्त भी यह नमाज़ बड़े ख़ुशू से पढ़ी जा सकती है।
सलातुल तस्बीह की नमाज़ पढ़ते वक्त ज़रूरी बातें
Salatul Tasbeeh Ka Tarika अपनाते वक्त इन बातों का ख़याल रखना ज़रूरी है:
1. तस्बीह ज़ोर से न पढ़ें
तस्बीह को ज़बान से धीरे-धीरे पढ़ें। इसे बुलंद आवाज़ में पढ़ना ठीक नहीं।
2. उँगलियों पर या तस्बीह से न गिनें
उँगलियों पर गिनना या हाथ की तस्बीह का इस्तेमाल करना मकरूह है। उँगलियाँ हल्के से दबाकर गिनती याद रख सकते हैं।
3. भूल जाने पर अगली हालत में पूरी करें
अगर किसी हालत में तस्बीह कम रह जाए तो उसे अगली हालत में पूरा कर लें। लेकिन अगर वह हालत भी गुज़र गई हो तो फिर उसे छोड़ दें।
4. दिल को हाज़िर रखें
तस्बीह पढ़ते वक्त अल्लाह की नेमतों को याद करें। इससे तस्बीह में मिठास आती है और दिल नरम होता है।
5. एक ही सलाम से चार रकअत पढ़ें
यह नमाज़ चार रकअत एक साथ और एक ही सलाम से पूरी की जाती है।
सलातुल तस्बीह की नमाज़ क्यों पढ़ें? (हदीस की रोशनी में)
Salatul Tasbeeh Ki Namaz की बुनियाद एक मशहूर और मक़बूल हदीस पर है। यह हदीस ही इस नमाज़ की असल दलील है।
हदीस:
हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी करीम ﷺ ने अपने चाचा हज़रत अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से फ़रमाया:
Arabic Text:
قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ﷺ لِلْعَبَّاسِ بْنِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ: يَا عَبَّاسُ، يَا عَمَّاهُ، أَلَا أُعْطِيكَ، أَلَا أَمْنَحُكَ، أَلَا أَحْبُوكَ، أَلَا أَفْعَلُ بِكَ عَشْرَ خِصَالٍ إِذَا أَنْتَ فَعَلْتَ ذَلِكَ غَفَرَ اللَّهُ لَكَ ذَنْبَكَ أَوَّلَهُ وَآخِرَهُ، قَدِيمَهُ وَحَدِيثَهُ، خَطَأَهُ وَعَمْدَهُ، صَغِيرَهُ وَكَبِيرَهُ، سِرَّهُ وَعَلَانِيَتَهُ
Roman Transliteration:
Qaala Rasulullahi ﷺ lil-Abbaasi ibni Abdil-Muttalib: Yaa Abbaas, yaa Ammaah, alaa u’tika, alaa amnuhuka, alaa ahbuka, alaa af’alu bika ashra khisaalin idhaa anta fa’alta dhaalika ghafarallaahu laka dhanbaka awwalahu wa aakhirahu, qadeemahu wa hadithahu, khata’ahu wa amdahu, sagheerahu wa kabeerahu, sirrahu wa alaaniyatahu.
Hindi Transliteration:
क़ाला रसूलुल्लाहि ﷺ लिल-अब्बासि इब्नि अब्दिल मुत्तलिब: या अब्बास, या अम्माह, अला उ’तिका, अला अम्नहुका, अला अहबूका, अला अफ’अलु बिका अश्र ख़िसालिन इज़ा अन्त फ़अल्त ज़ालिका ग़फ़रल्लाहु लक ज़न्बक अव्वलहु व आख़िरहु, क़दीमहु व हदीसहु, ख़तअहु व अमदहु, सग़ीरहु व कबीरहु, सिर्रहु व अलानियतहु।
Hindi Meaning:
रसूलुल्लाह ﷺ ने हज़रत अब्बास इब्ने अब्दुल मुत्तलिब رضی اللہ عنہ से फ़रमाया: “ऐ अब्बास! ऐ चाचा! क्या मैं आपको न दूं, क्या मैं आपको न नवाज़ूं, क्या मैं आपको न बख्शूं? मैं आपको दस ऐसी बातें बताता हूं कि जब आप यह अमल करें तो अल्लाह आपके गुनाह माफ़ कर दे, पहले और आख़िर के, पुराने और नए, भूल से किए और जानबूझकर किए, छोटे और बड़े, छुपे और ज़ाहिर।”
फिर आप ﷺ ने Salatul Tasbeeh Ka Tarika बताया और फ़रमाया कि हो सके तो रोज़ पढ़ो, न हो सके तो जुमे को, न हो सके तो हर महीने, न हो सके तो साल में एक बार, और न हो सके तो पूरी ज़िंदगी में कम से कम एक बार ज़रूर पढ़ो।
(सुनन अबू दाऊद: 1297, सुनन इब्ने माजह: 1387)
सलातुल तस्बीह के फ़ायदे (Benefits of Salatul Tasbeeh)
1. गुनाहों की माफ़ी
सलातुल तस्बीह का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि इसे पढ़ने से अल्लाह तआला बंदे के पुराने-नए, छोटे-बड़े, ज़ाहिर-छुपे सभी गुनाह माफ़ फ़रमा देते हैं। यह खुद नबी करीम ﷺ का वादा है।
2. अल्लाह से क़रीबी
जब बंदा पूरी तवज्जुह के साथ 300 मरतबा अल्लाह की तस्बीह पढ़ता है तो उसके दिल में अल्लाह की मुहब्बत और क़ुर्बत पैदा होती है।
3. ज़िक्र की आदत
Salatul Tasbeeh Namaz से इंसान में अल्लाह का ज़िक्र करने की आदत पड़ती है जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी बरकत लाती है।
4. दिल की सफ़ाई
जब इंसान 300 मरतबा अल्लाह की पाकी, तारीफ़, वहदानियत और बड़ाई बयान करता है तो उसका दिल गुनाहों की मैल से साफ़ होता है।
5. दुआ क़बूल होने का मौका
नमाज़ के बाद जो दुआ मांगी जाए वह अल्लाह के यहाँ ज़्यादा क़बूल होने की उम्मीद होती है, ख़ासकर जब नमाज़ इतनी तस्बीह के साथ पढ़ी गई हो।
क्या सलातुल तस्बीह नफ़्ल है या सुन्नत?
Salatul Tasbeeh Namaz नफ़्ल नमाज़ है। यह किसी वक्त की सुन्नत या फ़र्ज़ नमाज़ का हिस्सा नहीं। इसे अलग से पढ़ा जाता है। उलेमा ने इसे “मुस्तहब” (पसंदीदा) अमल क़रार दिया है।
सलातुल तस्बीह और रमज़ान
रमज़ान के मुबारक महीने में Salatul Tasbeeh पढ़ना और भी ज़्यादा फ़ायदेमंद है। इस महीने हर नेक अमल का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। रमज़ान में रात के आख़िरी पहर, तहज्जुद के बाद यह नमाज़ पढ़ना बहुत अफ़ज़ल माना जाता है।
इसी तरह शब-ए-बरात और शब-ए-क़द्र की रात में भी Salatul Tasbeeh Ki Namaz पढ़ी जा सकती है। यह वो रातें हैं जिनमें इबादत का सवाब हज़ारों गुना बढ़ जाता है।
हर रकअत में तस्बीह का सारांश
| नमाज़ की हालत | तस्बीह की तादाद |
|---|---|
| सना के बाद (क़याम) | 15 मरतबा |
| सूरह मिलाने के बाद (क़याम) | 10 मरतबा |
| रुकूअ में | 10 मरतबा |
| रुकूअ के बाद (क़याम) | 10 मरतबा |
| पहले सज्दे में | 10 मरतबा |
| जल्सा (दो सज्दों के बीच) | 10 मरतबा |
| दूसरे सज्दे में | 10 मरतबा |
| हर रकअत में कुल | 75 मरतबा |
| चार रकअत में कुल | 300 मरतबा |
निष्कर्ष
Salatul Tasbeeh Ki Namaz अल्लाह की रहमत का एक बेशकीमती तोहफ़ा है जो हमारे नबी करीम ﷺ ने अपनी उम्मत को दिया। इस नमाज़ में पूरी तवज्जुह के साथ 300 मरतबा अल्लाह की तस्बीह पढ़ना दिल को साफ़ करता है और गुनाहों से माफ़ी दिलाता है।
Salatul Tasbeeh Namaz Ka Tarika आसान है, लेकिन इसके फ़ायदे बहुत बड़े हैं। हर मुसलमान को चाहिए कि इसे अपनी ज़िंदगी में शामिल करे, चाहे हफ़्ते में एक बार हो या महीने में एक बार।
अल्लाह तआला हम सबको यह नमाज़ पढ़ने की तौफ़ीक़ दे और हमारे गुनाहों को माफ़ फ़रमाए। आमीन।
FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1: Salatul Tasbeeh Ki Namaz कितनी रकअत होती है?
सलातुल तस्बीह की नमाज़ चार रकअत होती है और इसे एक सलाम के साथ पूरा किया जाता है।
सवाल 2: Salatul Tasbeeh Ka Tarika क्या है?
हर रकअत में सना के बाद 15 मरतबा, सूरह मिलाने के बाद 10 मरतबा, रुकूअ में 10 मरतबा, रुकूअ के बाद 10 मरतबा, पहले सज्दे में 10 मरतबा, जल्सा में 10 मरतबा और दूसरे सज्दे में 10 मरतबा तस्बीह पढ़ी जाती है।
सवाल 3: Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Time क्या है?
यह नमाज़ मकरूह औकात (सूरज निकलने, ज़वाल और सूरज डूबने के वक्त) को छोड़कर दिन-रात किसी भी वक्त पढ़ी जा सकती है।
सवाल 4: Salatul Tasbeeh Ki Dua कौन-सी है?
“سُبْحَانَ اللّٰهِ وَالْحَمْدُ لِلّٰهِ وَلَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَاللّٰهُ أَكْبَرُ” यही तस्बीह पूरी नमाज़ में 300 मरतबा पढ़ी जाती है।
सवाल 5: क्या Salatul Tasbeeh सुन्नत है?
नहीं, यह नफ़्ल नमाज़ है। उलेमा ने इसे मुस्तहब और बेहद फ़ज़ीलत वाला अमल क़रार दिया है।
सवाल 6: अगर तस्बीह में गलती हो जाए तो क्या करें?
अगर किसी हालत में तस्बीह कम रह जाए तो उसे अगली हालत में पढ़ लें। लेकिन अगर वह हालत भी गुज़र जाए तो उसे छोड़ दें और नमाज़ जारी रखें।
सवाल 7: क्या Salatul Tasbeeh रोज़ पढ़ सकते हैं?
जी हाँ, हदीस में रोज़ पढ़ने की फ़ज़ीलत बताई गई है। अगर रोज़ न हो सके तो जुमे को, फिर महीने में एक बार, फिर साल में एक बार और कम से कम ज़िंदगी में एक बार ज़रूर पढ़ें।
सवाल 8: क्या औरतें Salatul Tasbeeh Ki Namaz पढ़ सकती हैं?
जी हाँ, मर्द और औरत दोनों यह नमाज़ पढ़ सकते हैं। तरीका दोनों के लिए एक ही है।
Written by: Ahmad Raza
Credentials: Islamic Studies Content Writer
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