जोहर की नमाज की रकात | Johar Ki Namaz Ki Rakat, Tarika Aur Waqt

जोहर की नमाज इस्लाम के पांच फर्ज नमाजों में से दूसरी नमाज है। इसे “जुहर” या “ज़ोहर” भी कहा जाता है। यह नमाज दोपहर के वक्त अदा की जाती है, जब सूरज ज़वाल के बाद ढलना शुरू हो जाता है।

बहुत से लोग जानना चाहते हैं कि Johar Ki Namaz Ki Rakat कितनी हैं, Johar Ki Namaz Ka Time क्या है, Johar Ki Namaz Ka Tarika क्या है और Johar Ki Namaz Kaise Padhe। यह तमाम जानकारी नीचे तरतीब से दी गई है।

हर मुसलमान मर्द और औरत पर यह नमाज फर्ज है। Johar Ki Namaz Ka Last Time असर की अज़ान से पहले खत्म हो जाता है इसलिए इसे वक्त रहते पढ़ना बेहद ज़रूरी है।

नबी करीम ﷺ ने इस नमाज को बड़ी पाबंदी से अदा किया और इसकी सुन्नतों पर भी बहुत ज़ोर दिया। कुरआन करीम में भी नमाज की पाबंदी का हुक्म बार बार आया है।

अल्लाह तआला का इरशाद है:

Arabic:

إِنَّ الصَّلَاةَ كَانَتْ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ كِتَابًا مَوْقُوتًا

Transliteration: Innas salata kanat alal mu’minina kitabam mawquta

Hindi: इन्नस्सलाता कानत अलल मुमिनीन किताबम मौकूता

मतलब: बेशक नमाज मुसलमानों पर वक्त के साथ फर्ज है। (सूरह अन-निसा 4:103)

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी आम इस्लामी मसादिर और किताबों के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी शरई मसले में अपने क़रीबी आलिम या मुफ्ती से राहनुमाई लेना ज़रूरी है।

Table of Contents

जोहर की नमाज का वक्त (Johar Ki Namaz Ka Time)

जोहर की नमाज का वक्त सूरज के ढलने के बाद शुरू होता है और असर की नमाज के वक्त से पहले खत्म होता है।

सूरज जब आसमान के बिल्कुल बीच (ज़वाल) से थोड़ा पश्चिम की तरफ झुक जाए, उस वक्त से जोहर का वक्त शुरू होता है। Johar Ki Namaz Ka Time यानी जोहर का वक्त हर शहर में थोड़ा अलग होता है, इसलिए अपने शहर की नमाज़ टाइम टेबल ज़रूर देखें।

आम तौर पर यह वक्त दोपहर 12 बजे से दोपहर 1:30 बजे के बीच शुरू होता है, जो मौसम और जगह के हिसाब से बदलता रहता है।

जोहर की नमाज का आखिरी वक्त (Johar Ki Namaz Ka Last Time)

जोहर की नमाज का आखिरी वक्त (Johar Ki Namaz Ka Last Time) असर की अज़ान से ठीक पहले तक रहता है। यह वक्त गुज़र जाने के बाद नमाज क़ज़ा हो जाती है। अगर किसी मजबूरी से जोहर उस वक्त तक न पढ़ी जा सके तो असर के बाद क़ज़ा करना ज़रूरी है।

बेहतर यही है कि जोहर की नमाज वक्त पर अदा की जाए और देर न की जाए।

जोहर की नमाज की रकात (Johar Ki Namaz Ki Rakat)

जोहर की नमाज कुल 12 रकात है जो तीन हिस्सों में बंटी है।

1. पहले 4 रकात सुन्नत मुअक्कदा

यह 4 रकात सुन्नत हैं जो नबी ﷺ ने हमेशा पढ़ी। इन्हें फर्ज से पहले पढ़ा जाता है। सुन्नत मुअक्कदा का छोड़ना गुनाह की बात है।

2. बीच की 4 रकात फर्ज

यह 4 रकात जोहर की नमाज की फर्ज रकातें हैं। यह हर मुसलमान पर वाजिब है। इन्हें पढ़े बिना जोहर की नमाज पूरी नहीं होती।

3. आखिर की 2 रकात सुन्नत मुअक्कदा

फर्ज के बाद यह 2 रकात सुन्नत अदा की जाती है। यह भी सुन्नत मुअक्कदा की श्रेणी में आती है।

4. आखिर की 2 रकात नफ्ल

इसके बाद 2 रकात नफ्ल पढ़ना मुस्तहब है। यह फर्ज नहीं है लेकिन पढ़ने से ज़्यादा सवाब मिलता है।

जोहर की नमाज की रकातों का सारांश

जोहर की नमाज की रकात को समझना बहुत ज़रूरी है ताकि नमाज सही तरतीब से अदा की जा सके।

नमाज का हिस्सा रकात श्रेणी
पहले 4 सुन्नत मुअक्कदा
बीच में 4 फर्ज
बाद में 2 सुन्नत मुअक्कदा
आखिर में 2 नफ्ल
कुल 12

जोहर की नमाज की रकात में फर्ज की 4 रकात सबसे ज़रूरी हैं। बाकी सुन्नत और नफ्ल रकातें भी बड़ा सवाब रखती हैं।

जोहर की नमाज का तरीका (Johar Ki Namaz Ka Tarika)

जोहर की नमाज का तरीका (Johar Ki Namaz Ka Tarika) जानना हर मुसलमान के लिए ज़रूरी है। नीचे हर रकात का तरतीबवार तरीका बताया गया है।

4 रकात सुन्नत का तरीका

पहली और दूसरी रकात:

नियत करें, फिर तकबीर “الله أكبر” (Allahu Akbar) कहते हुए हाथ बांधें। सना पढ़ें, फिर सूरह फातिहा और कोई और सूरह पढ़ें। रुकू करें, दो सजदे करें और दूसरी रकात में यही दोहराएं।

दूसरी रकात में दोनों सजदों के बाद “قعدہ اولیٰ” (पहला क़ैदा) में बैठें और अत्तहियात पढ़ें।

तीसरी और चौथी रकात:

फिर उठकर तीसरी और चौथी रकात उसी तरह पढ़ें। चौथी रकात में आखिरी क़ैदा में बैठकर अत्तहियात, दुरूद इब्राहिम और दुआए मासूरा पढ़ें और दोनों तरफ सलाम फेरें।

4 रकात फर्ज का तरीका

फर्ज की 4 रकात का तरीका सुन्नत की तरह ही है। फर्क बस यह है कि फर्ज नमाज में नियत “फर्ज जोहर” की होगी।

जमाअत में पढ़ते वक्त पहली दो रकात में इमाम के पीछे चुपचाप सूरह फातिहा सुनें। अकेले पढ़ते वक्त धीमी आवाज़ में पढ़ें।

2 रकात सुन्नत का तरीका

2 रकात सुन्नत की नियत करें और वही तरीका अपनाएं। दूसरी रकात में सीधे आखिरी क़ैदा में बैठें और अत्तहियात, दुरूद और दुआ पढ़कर सलाम फेरें।

जोहर की नमाज की नियत

4 रकात सुन्नत की नियत (अरबी)

Arabic:

نَوَيْتُ أَنْ أُصَلِّيَ لِلَّهِ تَعَالَى أَرْبَعَ رَكَعَاتٍ صَلَاةِ الظُّهْرِ سُنَّةَ النَّبِيِّ ﷺ مُتَوَجِّهًا إِلَى جِهَةِ الْكَعْبَةِ الشَّرِيفَةِ اللَّهُ أَكْبَرُ

Roman Transliteration:

Nawaytu an usalliya lillahi ta’ala arba’a raka’atin salati ‘z-Zuhri sunnata ‘n-Nabiyyi ﷺ mutawajjihan ila jihati ‘l-Ka’bati ‘sh-Sharifati Allahu Akbar

Hindi Transliteration:

नवयतु अन उसल्लिया लिल्लाही तआला अरबआ रकआतिन सलातिज़्ज़ुहरि सुन्नतन नबिय्यि सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुतवज्जिहन इला जिहतिल काबतिश शरीफति अल्लाहु अकबर

मतलब (Meaning):

मैंने अल्लाह के लिए जोहर की 4 रकात सुन्नत नमाज पढ़ने की नियत की, काबा शरीफ की तरफ मुंह करके। अल्लाह सबसे बड़ा है।

4 रकात फर्ज की नियत (अरबी)

Arabic:

نَوَيْتُ أَنْ أُصَلِّيَ لِلَّهِ تَعَالَى أَرْبَعَ رَكَعَاتٍ صَلَاةِ الظُّهْرِ فَرْضًا لِلَّهِ تَعَالَى مُتَوَجِّهًا إِلَى جِهَةِ الْكَعْبَةِ الشَّرِيفَةِ اللَّهُ أَكْبَرُ

Roman Transliteration:

Nawaytu an usalliya lillahi ta’ala arba’a raka’atin salati ‘z-Zuhri fardan lillahi ta’ala mutawajjihan ila jihati ‘l-Ka’bati ‘sh-Sharifati Allahu Akbar

Hindi Transliteration:

नवयतु अन उसल्लिया लिल्लाही तआला अरबआ रकआतिन सलातिज़्ज़ुहरि फर्ज़न लिल्लाही तआला मुतवज्जिहन इला जिहतिल काबतिश शरीफती अल्लाहु अकबर

मतलब (Meaning):

मैंने अल्लाह के लिए जोहर की 4 रकात फर्ज नमाज पढ़ने की नियत की, काबा शरीफ की तरफ मुंह करके। अल्लाह सबसे बड़ा है।

2 रकात सुन्नत की नियत (अरबी)

Arabic:

نَوَيْتُ أَنْ أُصَلِّيَ لِلَّهِ تَعَالَى رَكْعَتَيْنِ صَلَاةِ الظُّهْرِ سُنَّةَ النَّبِيِّ ﷺ مُتَوَجِّهًا إِلَى جِهَةِ الْكَعْبَةِ الشَّرِيفَةِ اللَّهُ أَكْبَرُ

Roman Transliteration:

Nawaytu an usalliya lillahi ta’ala rak’ataini salati ‘z-Zuhri sunnata ‘n-Nabiyyi ﷺ mutawajjihan ila jihati ‘l-Ka’bati ‘sh-Sharifati Allahu Akbar

Hindi Transliteration:

नवयतु अन उसल्लिया लिल्लाही तआला रकअतैनि सलातिज़्ज़ुहरि सुन्नतन नबिय्यि सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुतवज्जिहन इला जिहतिल काबतिश शरीफती अल्लाहु अकबर

मतलब (Meaning):

मैंने अल्लाह के लिए जोहर की 2 रकात सुन्नत नमाज पढ़ने की नियत की। अल्लाह सबसे बड़ा है।

जोहर की नमाज कैसे पढ़ें (Johar Ki Namaz Kaise Padhe)

जोहर की नमाज कैसे पढ़ें (Johar Ki Namaz Kaise Padhe), इसका मुकम्मल तरीका नीचे स्टेप बाय स्टेप दिया गया है।

Step 1: वुज़ू करें

नमाज से पहले वुज़ू (पाकीज़गी) करना ज़रूरी है। बिना वुज़ू के नमाज नहीं होती।

Step 2: क़िब्ले की तरफ मुंह करें

काबा शरीफ की दिशा में खड़े हों। भारत में काबा की दिशा आम तौर पर पश्चिम की तरफ है।

Step 3: नियत करें

दिल में नियत करना काफी है। ज़बान से नियत पढ़ना बेहतर है लेकिन फर्ज नहीं।

Step 4: तकबीर तहरीमा कहें

“الله أكبر” (Allahu Akbar) कहते हुए हाथ कानों तक उठाएं और फिर नाभि के नीचे बांध लें।

Step 5: सना पढ़ें

Arabic:

سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ وَتَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعَالَى جَدُّكَ وَلَا إِلَهَ غَيْرُكَ

Transliteration: Subhanakallahumma wa bihamdika wa tabarakasmuka wa ta’ala jadduka wa la ilaha ghayruk

Hindi: सुबहानकल्लाहुम्मा व बिहम्दिका व तबारकस्मुका व तआला जद्दुका व ला इलाहा गैरुक

Step 6: सूरह फातिहा और दूसरी सूरह पढ़ें

“أَعُوذُ بِاللَّهِ” (तआव्वुज़) और “بِسْمِ اللَّهِ” (तस्मिया) पढ़कर सूरह फातिहा पढ़ें, फिर कुरआन की कोई और सूरह मिलाएं।

Step 7: रुकू करें

“الله أكبر” कहते हुए झुकें। रुकू में 3 बार यह पढ़ें:

Arabic:

سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ

Transliteration: Subhana Rabbiyal Azeem

Hindi: सुबहान रब्बियल अज़ीम (मेरा रब बड़ा पाक है)

Step 8: सजदा करें

रुकू से उठकर “الله أكبر” कहते हुए सजदे में जाएं। सजदे में 3 बार यह पढ़ें:

Arabic:

سُبْحَانَ رَبِّيَ الأَعْلَى

Transliteration: Subhana Rabbiyal A’la

Hindi: सुबहान रब्बियल आला (मेरा रब सबसे ऊंचा है)

Step 9: अत्तहियात पढ़ें

दूसरी रकात के बाद और आखिरी रकात में बैठकर अत्तहियात पढ़ें।

Arabic:

التَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ، السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ، السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَى عِبَادِ اللَّهِ الصَّالِحِينَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ

Transliteration:

Attahiyyatu lillahi was salawatu wat tayyibat. Assalamu alayka ayyuhan nabiyyu wa rahmatullahi wa barakatuh. Assalamu alayna wa ala ibadillahis salihin. Ash hadu an la ilaha illallahu wa ash hadu anna Muhammadan abduhu wa rasuluh.

Hindi Transliteration:

अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तय्यिबात। अस्सलामु अलैका अय्युहन्नबिय्यु व रहमतुल्लाहि व बरकातुह। अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस्सालिहीन। अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु व अशहदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुह।

Step 10: दुरूद इब्राहिम और दुआ पढ़ें

आखिरी क़ैदा में दुरूद इब्राहिम पढ़ें फिर दुआए मासूरा पढ़ें।

Step 11: सलाम फेरें

दोनों कंधों पर “السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللَّهِ” (Assalamu Alaikum wa Rahmatullah) कहते हुए सलाम फेरें।

जोहर की नमाज के फ़ायदे (Benefits of Johar Ki Namaz)

नमाज गुनाहों को धोती है

नबी ﷺ ने फरमाया कि पांच वक्त की नमाज उस नहर की तरह है जिसमें आदमी रोज़ पांच बार नहाए। इससे सारे छोटे गुनाह माफ हो जाते हैं। (सहीह मुस्लिम)

दिल को सुकून मिलता है

दोपहर की व्यस्तता के बीच अल्लाह की याद दिल को चैन देती है। अल्लाह तआला फरमाता है:

Arabic:

أَلَا بِذِكْرِ اللَّهِ تَطْمَئِنُّ الْقُلُوبُ

Transliteration: Ala bi dhikrillahi tatma’innul qulub

Hindi: अला बिज़िक्रिल्लाहि तत्मइन्नुल कुलूब

मतलब: खबरदार! अल्लाह की याद से ही दिलों को सुकून मिलता है।

(सूरह अर-रअद 13:28)

सुन्नत पर अमल से जन्नत में घर

हज़रत उम्म हबीबा रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि नबी ﷺ ने फरमाया: “जो शख्स जोहर से पहले 4 और बाद में 4 रकात की पाबंदी करे, अल्लाह उस पर जहन्नम की आग हराम कर देता है।”
(तिर्मिज़ी, अबू दाऊद)

जमाअत का सवाब 27 गुना

नबी ﷺ ने फरमाया: “जमाअत की नमाज अकेले की नमाज से 27 दर्जे ज़्यादा अफ़ज़ल है।”
(सहीह बुखारी व मुस्लिम)

जोहर की नमाज का इस्लाम में मकाम

जोहर की नमाज सिर्फ एक इबादत नहीं बल्कि मुसलमान की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अहम हिस्सा है। दिन के बीच में अल्लाह के सामने झुकना बंदगी का सबसे खूबसूरत इज़हार है।

इसकी रकातों को पूरे खुशू और खुज़ू के साथ अदा करने से इंसान को दुनिया और आखिरत दोनों में फायदा होता है।

नबी ﷺ ने कभी भी जोहर की नमाज को बिना वजह क़ज़ा नहीं किया। यह बात हमें बताती है कि इस नमाज की कितनी अहमियत है।

जोहर की नमाज का तरीका सीखना और उस पर अमल करना हर मुसलमान की ज़िम्मेदारी है। अपने बच्चों को भी इसकी रकातें और तरीका ज़रूर सिखाएं ताकि वे भी नमाज की पाबंदी करें।

जोहर की नमाज से जुड़ी ज़रूरी बातें

जोहर की नमाज ज़वाल के बाद जितनी जल्दी हो सके पढ़ना बेहतर है। गर्मियों में थोड़ी देरी से पढ़ना (इब्रॉद) जायज़ है।

मस्जिद में जमाअत के साथ पढ़ना मर्दों पर वाजिब है। जो बिना शरई वजह के जमाअत छोड़े वह गुनहगार है।

अगर जोहर की नमाज किसी मजबूरी में छूट जाए तो उसे फौरन क़ज़ा करें। क़ज़ा की नमाज में भी वही रकात होंगी जो वक्त की नमाज में थीं।

निष्कर्ष (Conclusion)

जोहर की नमाज इस्लाम के अहम फर्ज़ में से है। जोहर की नमाज की रकात की तादाद कुल 12 है जिनमें 4 सुन्नत मुअक्कदा, 4 फर्ज, 2 सुन्नत मुअक्कदा और 2 नफ्ल शामिल हैं।

Johar Ki Namaz Ka Time ज़वाल के फौरन बाद शुरू होता है। Johar Ki Namaz Ka Last Time असर की अज़ान तक रहता है, इसलिए इसे वक्त पर पढ़ना हर मुसलमान पर लाज़िम है।

Johar Ki Namaz Ka Tarika सीखना और नियत सही रखना हर नमाज़ी के लिए ज़रूरी है। जो शख्स Johar Ki Namaz Kaise Padhe यह जानकर इसे पाबंदी से अदा करे, उसके लिए जहन्नम की आग हराम होने की बशारत दी गई है।

जोहर की नमाज सिर्फ एक फर्ज़ नहीं, यह दिन के बीच अल्लाह से जुड़ने का सबसे कीमती लम्हा है। इसे वक्त पर, सही नियत और पूरे ख़ुशू के साथ अदा करना ही असल कामयाबी है।

अल्लाह तआला हम सभी को पांचों वक्त की नमाज़ पाबंदी के साथ अदा करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।

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? अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सवाल 1: जोहर की नमाज कितनी रकात है?

जोहर की नमाज कुल 12 रकात है। 4 सुन्नत मुअक्कदा, 4 फर्ज, 2 सुन्नत मुअक्कदा और 2 नफ्ल।

सवाल 2: जोहर का वक्त कब शुरू होता है?

जोहर का वक्त सूरज के ज़वाल (बिल्कुल ऊपर से ढलने) के बाद शुरू होता है और असर की अज़ान से पहले तक रहता है।

सवाल 3: जोहर की नमाज का आखिरी वक्त कब है?

जोहर की नमाज का आखिरी वक्त असर की अज़ान से पहले तक है। असर का वक्त शुरू होने के बाद जोहर की नमाज क़ज़ा हो जाती है।

सवाल 4: क्या जोहर की सुन्नत छोड़ सकते हैं?

जोहर की सुन्नत मुअक्कदा बिना वजह छोड़ना मकरूह है। नबी ﷺ ने इन सुन्नतों को खास तौर पर पाबंदी से पढ़ा।

सवाल 5: जोहर की नमाज क्या अकेले पढ़ सकते हैं?

हां, जोहर की नमाज घर में अकेले भी पढ़ सकते हैं। लेकिन मर्दों के लिए मस्जिद में जमाअत से पढ़ना ज़्यादा बेहतर और ज़रूरी है।

सवाल 6: जोहर की नमाज में कौन सी सूरह पढ़ें?

जोहर की नमाज में सूरह फातिहा के बाद कोई भी सूरह पढ़ सकते हैं। आम तौर पर सूरह इखलास, सूरह कौसर, सूरह फलक जैसी छोटी सूरहें पढ़ी जाती हैं।

सवाल 7: जोहर की नमाज में आवाज़ धीमी होती है या ऊंची?

जोहर की नमाज एक “सिर्री” (ख़ामोश) नमाज है यानी इसे धीमी आवाज़ में पढ़ा जाता है।

Written by: Ahmad Raza

Credentials: Islamic Studies Content Writer

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