Eid Ki Namaz Ka Tarika: नीयत, वक़्त, दो रकात, ज़ाइद तकबीरें और ख़ुत्बा

ईद की सुबह नमाज़ से शुरू होती है। मुसलमान जमात के साथ खड़े होकर अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करते हैं, और उसके बाद ख़ुशियाँ मनाते हैं।

Eid Ki Namaz Ka Tarika रोज़ाना की नमाज़ों से अलग है। इसमें ज़ाइद तकबीरें होती हैं, अज़ान और इक़ामत नहीं होती, और नमाज़ के बाद ख़ुत्बा होता है।

हनफ़ी मसलक हिंदुस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में आम है, इसलिए तरीक़ा उसी के मुताबिक़ है। दूसरे मसलकों का फ़र्क़ जहाँ ज़रूरी है, वहाँ बता दिया गया है।

डिस्क्लेमर: Islamic Dua Hub पर दी गई दीनी बातें क़ुरआन, हदीस और मोतबर उलेमा की किताबों की रोशनी में पेश की गई हैं। नमाज़ के मसाइल में मसलकों का फ़र्क़ हो सकता है, इसलिए किसी भी शक की सूरत में अपने भरोसेमंद आलिम से रुजू करें। कोई ग़लती नज़र आए तो हमें ज़रूर बताएँ।

Table of Contents

ईद की नमाज़ का हुक्म

Eid Ki Namaz हनफ़ी मसलक में वाजिब है। मालिकी और शाफ़ई उलेमा इसे सुन्नत मुअक्कदा कहते हैं, और हंबली उलेमा फ़र्ज़ किफ़ाया।

नबी ﷺ ने इसे कभी नहीं छोड़ा। आप ﷺ ने औरतों तक को हाज़िर होने का हुक्म दिया, जो इसकी अहमियत दिखाता है।

Eid Ki Namaz Ka Time

Eid Ki Namaz Ka Time सूरज निकलने के बाद शुरू होता है, जब सूरज नेज़े भर ऊपर उठ जाए। यह सूरज निकलने के लगभग 15 से 20 मिनट बाद का वक़्त है, जब मकरूह वक़्त ख़त्म हो चुका होता है।

नमाज़ का वक़्त ज़वाल से पहले तक रहता है। ज़वाल वह लम्हा है जब सूरज सिर के ठीक ऊपर होता है।

ईद उल अज़हा की नमाज़ जल्दी पढ़ी जाती है, ताकि क़ुर्बानी के लिए वक़्त मिले। ईद उल फ़ित्र की नमाज़ थोड़ी देर से होती है, ताकि सदक़ा ए फ़ित्र अदा हो सके। जमात का सही वक़्त मस्जिद या ईदगाह कमेटी तय करती है, इसलिए अपने इलाक़े का टाइमटेबल देख लें।

नमाज़ से पहले की तैयारी

ग़ुस्ल करें

इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ईदगाह के लिए रवाना होने से पहले ग़ुस्ल करते थे, जैसा कि मुवत्ता इमाम मालिक में आया है। ईद की सुबह ग़ुस्ल करना पसंदीदा अमल है।

साफ़ कपड़े पहनें और इत्र लगाएँ

अपने पास मौजूद सबसे अच्छे साफ़ कपड़े पहनें। मर्द इत्र लगा सकते हैं। जो औरतें हाज़िर हों, वे बाहर इत्र से बचें।

ईद उल फ़ित्र पर खजूर खाएँ

अनस रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि नबी ﷺ ईद उल फ़ित्र की नमाज़ के लिए निकलने से पहले खजूर खाते थे, और ताक़ तादाद में खाते थे (सहीह बुख़ारी)।

ईद उल अज़हा पर नमाज़ के बाद खाएँ

बुरैदा रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि नबी ﷺ ईद उल अज़हा के दिन नमाज़ पढ़ने तक कुछ नहीं खाते थे (जामे तिर्मिज़ी)। उलेमा फ़रमाते हैं कि पहला निवाला क़ुर्बानी के गोश्त का हो तो बेहतर है।

सदक़ा ए फ़ित्र पहले अदा करें

इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि नबी ﷺ ने हुक्म दिया कि इसे लोगों के नमाज़ के लिए निकलने से पहले अदा किया जाए (सहीह बुख़ारी)।

तकबीर पढ़ें और रास्ता बदलें

ईदगाह के रास्ते में तकबीर पढ़ें और मुमकिन हो तो पैदल चलें। जाबिर रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि नबी ﷺ वापसी में दूसरे रास्ते से लौटते थे (सहीह बुख़ारी)।

जमात से पहले पहुँचें

पहली तकबीर से शामिल होने के लिए वक़्त से पहले पहुँचें। इससे सफ़ें भी सीधी और मुकम्मल रहती हैं।

Eid Ki Namaz Ki Niyat

नीयत दिल के इरादे का नाम है। ज़बान से अल्फ़ाज़ कहना ज़रूरी नहीं, और ये अल्फ़ाज़ क़ुरआन या हदीस में नहीं आए हैं। ये सिर्फ़ ध्यान जमाने में मदद करते हैं।

ईद की नमाज़ की नीयत

अरबी

نَوَيْتُ أَنْ أُصَلِّيَ لِلَّهِ تَعَالَى رَكْعَتَيْ صَلَاةِ الْعِيدِ مَعَ سِتِّ تَكْبِيرَاتٍ مُتَوَجِّهًا إِلَى جِهَةِ الْكَعْبَةِ الشَّرِيفَةِ اقْتَدَيْتُ بِهَذَا الْإِمَامِ اللَّهُ أَكْبَرُ

Roman Transliteration

Nawaitu an usalliya lillahi ta’ala rak’atay salatil Eid ma’a sitti takbiraatin mutawajjihan ila jihatil Ka’batish sharifati iqtadaytu bihadal imam Allahu Akbar.

हिंदी उच्चारण

नवैतु अन उसल्लिया लिल्लाहि तआला रकअतै सलातिल ईदि मअ सित्ति तकबीरातिन मुतवज्जिहन इला जिहतिल कअबतिश शरीफ़ति इक़्तदैतु बिहाज़ल इमामि अल्लाहु अकबर।

हिंदी मतलब

मैं अल्लाह के लिए ईद की दो रकात नमाज़ छह ज़ाइद तकबीरों के साथ, काबा शरीफ़ की तरफ़ रुख़ करके, इस इमाम के पीछे अदा करने की नीयत करता हूँ।

बोलचाल की ज़बान में नीयत यूँ की जाती है: “नीयत की मैंने दो रकात नमाज़ ईद उल फ़ित्र की, छह ज़ाइद तकबीरों के साथ, वास्ते अल्लाह तआला के, पीछे इस इमाम के, मुँह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर।”

Eid Ki Namaz Ka Tarika Step By Step

ईद की नमाज़ दो रकात है। इसमें अज़ान या इक़ामत नहीं होती, जैसा कि सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम में आया है।

पहला क़दम: नीयत और तकबीर ए तहरीमा

क़िब्ले की तरफ़ खड़े होकर नीयत करें। दोनों हाथ कानों तक उठाएँ, अल्लाहु अकबर कहें और हाथ नाफ़ के नीचे बाँध लें।

दूसरा क़दम: सना पढ़ें

सना दिल में आहिस्ता पढ़ें।

अरबी

سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ وَتَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعَالَى جَدُّكَ وَلَا إِلَهَ غَيْرُكَ

Roman Transliteration

Subhanakal lahumma wa bihamdika wa tabarakasmuka wa ta’ala jadduka wa la ilaha ghairuk.

हिंदी उच्चारण

सुब्हानकल्लाहुम्मा व बिहम्दिका व तबारकस्मुका व तआला जद्दुका व ला इलाहा ग़ैरुक।

हिंदी मतलब

ऐ अल्लाह, तू पाक है और सब तारीफ़ तेरी है। तेरा नाम बरकत वाला है, तेरी शान बुलंद है और तेरे सिवा कोई माबूद नहीं।

तीसरा क़दम: तीन ज़ाइद तकबीरें कहें

सना के बाद तीन बार अल्लाहु अकबर कहें। हर बार हाथ कानों तक उठाएँ। पहली और दूसरी तकबीर के बाद हाथ छोड़ दें, और तीसरी के बाद बाँध लें।

इमाम तकबीरें बुलंद आवाज़ से कहता है, और मुक़्तदी आहिस्ता दोहराते हैं।

चौथा क़दम: सूरह फ़ातिहा और दूसरी सूरह

इमाम अऊज़ु और बिस्मिल्लाह के बाद सूरह फ़ातिहा और दूसरी सूरह पढ़ता है। हनफ़ी मसलक में मुक़्तदी ख़ामोश रहता है।

नबी ﷺ ने सूरह अल आला और सूरह अल ग़ाशिया, या सूरह क़ाफ़ और सूरह अल क़मर पढ़ी है (सहीह मुस्लिम)। इसके बाद रुकू और दो सज्दे मामूल के मुताबिक़ होते हैं।

पाँचवाँ क़दम: दूसरी रकात के लिए खड़े हों

अल्लाहु अकबर कहते हुए खड़े हों। बिस्मिल्लाह के बाद सूरह फ़ातिहा और दूसरी सूरह पढ़ें।

क़िरात के बाद तीन ज़ाइद तकबीरें कहें, हर बार हाथ उठाएँ और हर तकबीर के बाद छोड़ दें। फिर चौथी तकबीर हाथ उठाए बिना कहकर रुकू में जाएँ।

छठा क़दम: नमाज़ मुकम्मल करें

रुकू और दो सज्दे करें। तशह्हुद के लिए बैठें, दरूद इब्राहीम और दुआ पढ़ें, फिर दाएँ और बाएँ सलाम फेरें।

सातवाँ क़दम: ख़ुत्बा सुनें

ख़ुत्बा नमाज़ के बाद होता है, जैसा कि सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम में आया है। हनफ़ी मसलक में दो ख़ुत्बे होते हैं और ख़ामोशी से सुनना वाजिब है। आख़िर में दुआ करें और एक दूसरे को मुबारकबाद दें।

ज़ाइद तकबीरों में मसलकों का फ़र्क़

हनफ़ी तरीक़े में हर रकात में तीन ज़ाइद तकबीरें हैं, जो इब्ने मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु की रिवायतों पर आधारित है।

शाफ़ई, मालिकी और हंबली उलेमा ज़्यादा तकबीरें कहते हैं: पहली रकात में छह या सात और दूसरी में पाँच, सूरह फ़ातिहा से पहले। यह आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा की रिवायतों पर आधारित है, जो अबू दाऊद और इब्ने माजा में आई हैं।

हर तरीक़े के पीछे उलेमा की दलील है। नमाज़ी इमाम की पैरवी करता है।

Eid Ki Namaz Ka Tarika For Ladies

उम्मे अतिय्या रज़ियल्लाहु अन्हा बयान करती हैं कि नबी ﷺ ने औरतों को ईद के लिए निकलने का हुक्म दिया, जिनमें जवान लड़कियाँ और हैज़ वाली औरतें भी शामिल थीं। हैज़ वाली औरतें नमाज़ नहीं पढ़तीं और नमाज़ की जगह से अलग रहती हैं, मगर मुसलमानों की भलाई और दुआ में शरीक होती हैं (सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम)।

Eid Ki Namaz Ka Tarika For Ladies मर्दों जैसा ही है, बस पर्दे और हया का ख़ास ख़याल रखा जाता है। औरतें मर्दों के पीछे सफ़ों में खड़ी होती हैं और इत्र से बचती हैं।

आज के दौर में हाज़िरी पर उलेमा की राय अलग है। कुछ उलेमा हदीस की बुनियाद पर इसकी हौसला अफ़ज़ाई करते हैं। कुछ सिर्फ़ उसी जगह की इजाज़त देते हैं जहाँ महफ़ूज़ और अलग इंतज़ाम हो। बहनें अपने भरोसेमंद आलिम से पूछ लें।

जो औरत हाज़िर न हो सके, वह घर में नमाज़ के बारे में आलिम से पूछे। हनफ़ी उलेमा ईद की नमाज़ के लिए जमात ज़रूरी मानते हैं, जबकि शाफ़ई उलेमा अकेले पढ़ने की इजाज़त देते हैं।

Bakra Eid Ki Namaz Ka Tarika

Bakra Eid Ki Namaz Ka Tarika हर क़दम में ईद उल फ़ित्र जैसा ही है। सिर्फ़ चंद बातें बदलती हैं।

  1. नीयत में ईद उल फ़ित्र की जगह ईद उल अज़हा का नाम लिया जाता है।
  2. नमाज़ जल्दी पढ़ी जाती है।
  3. खाना नमाज़ के बाद तक टाला जाता है।
  4. क़ुर्बानी नमाज़ के बाद होती है। बरा बिन आज़िब रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि नबी ﷺ ने फ़रमाया कि दिन का पहला काम नमाज़ पढ़ना है, फिर लौटकर क़ुर्बानी करना (सहीह बुख़ारी)।

Bakra Eid Ki Namaz के बाद हर फ़र्ज़ नमाज़ पर तकबीर ए तशरीक़ पढ़ी जाती है।

तकबीर ए तशरीक़

तकबीर ए तशरीक़ नौ ज़िलहिज्जा की फ़ज्र से तेरह ज़िलहिज्जा की अस्र तक हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद पढ़ी जाती है। मर्द इसे बुलंद आवाज़ से और औरतें आहिस्ता पढ़ें।

अरबी

اللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُ أَكْبَرُ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَاللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُ أَكْبَرُ وَلِلَّهِ الْحَمْدُ

Roman Transliteration

Allahu Akbar, Allahu Akbar, La ilaha illallahu wallahu Akbar, Allahu Akbar wa lillahil hamd.

हिंदी उच्चारण

अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर व लिल्लाहिल हम्द।

हिंदी मतलब

अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं। अल्लाह सबसे बड़ा है और सब तारीफ़ अल्लाह के लिए है।

नमाज़ के बाद की दुआ और मुबारकबाद

सूरह अल बक़रह (2:201) की जामे दुआ इस मौक़े के लिए मुनासिब है।

अरबी

رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ

Roman Transliteration

Rabbana atina fid dunya hasanatan wa fil akhirati hasanatan wa qina adhaban nar.

हिंदी उच्चारण

रब्बना आतिना फिद्दुनया हसनतंव व फिल आख़िरति हसनतंव व क़िना अज़ाबन्नार।

हिंदी मतलब

ऐ हमारे रब, हमें दुनिया में भलाई दे, आख़िरत में भी भलाई दे और हमें आग के अज़ाब से बचा।

ईद की मुबारकबाद

सहाबा एक दूसरे को एक छोटी दुआ से मुबारकबाद देते थे।

अरबी

تَقَبَّلَ اللَّهُ مِنَّا وَمِنْكُمْ

Roman Transliteration

Taqabbalallahu minna wa minkum.

हिंदी उच्चारण

तक़ब्बलल्लाहु मिन्ना व मिन्कुम।

हिंदी मतलब

अल्लाह हमसे और आपसे क़बूल फ़रमाए।

ईद की नमाज़ की फ़ज़ीलत

अल्लाह का शुक्र

ईद रमज़ान के ख़ात्मे और हज के दिनों की निशानी है। नमाज़ ख़ुशी को शुक्र में बदल देती है।

उम्मत की एकता

अमीर और ग़रीब, बूढ़े और जवान एक ही सफ़ में खड़े होते हैं। यह इज्तिमा मुस्लिम उम्मत की ताक़त दिखाता है।

ग़रीबों का ख़याल

सदक़ा ए फ़ित्र और क़ुर्बानी का गोश्त ज़रूरतमंद घरों तक पहुँचता है, ताकि कोई ईद की ख़ुशी से महरूम न रहे।

आम ग़लतियाँ जिनसे बचना चाहिए

  1. ईद की नमाज़ के लिए अज़ान या इक़ामत कहना।
  2. ईदगाह में ईद की नमाज़ से पहले नफ़्ल पढ़ना, जो नबी ﷺ ने नहीं किया (सहीह बुख़ारी)।
  3. ख़ुत्बे के दौरान बातें करना।
  4. सलाम के फ़ौरन बाद ख़ुत्बा सुने बिना उठकर रवाना हो लेना।
  5. सदक़ा ए फ़ित्र को नमाज़ के बाद तक टालना।

निष्कर्ष (Conclusion)

ईद की नमाज़ छोटा सा अमल है, मगर इसका मतलब गहरा है। दो रकात, ज़ाइद तकबीरें और ख़ुत्बा दिन की शुरुआत शुक्र से करते हैं।

Eid Ki Namaz Ka Tarika, नीयत, वक़्त और हर क़दम का इल्म इत्मीनान देता है। अल्लाह हर मुसलमान के रोज़े, क़ुर्बानी और नमाज़ को क़बूल फ़रमाए।

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? अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs): Eid Ki Namaz

Eid Ki Namaz में कितनी रकात होती हैं?

ईद की नमाज़ दो रकात है, जिसमें ज़ाइद तकबीरें होती हैं। यह जमात के साथ पढ़ी जाती है।

Eid Ki Namaz Ka Time क्या है?

यह सूरज निकलने के लगभग 15 से 20 मिनट बाद शुरू होता है और ज़वाल से पहले ख़त्म हो जाता है।

Eid Ki Namaz Ki Niyat क्या है?

दिल में अल्लाह के लिए इमाम के पीछे ईद की दो रकात पढ़ने का इरादा करें। अल्फ़ाज़ बोलना ज़रूरी नहीं है।

क्या ईद की नमाज़ के लिए अज़ान होती है?

नहीं। ईद की नमाज़ के लिए न अज़ान दी जाती है और न इक़ामत।

क्या औरतें ईदगाह में नमाज़ पढ़ सकती हैं?

जहाँ महफ़ूज़ इंतज़ाम हो, वहाँ हाँ। उम्मे अतिय्या की हदीस औरतों को हाज़िर होने की तरग़ीब देती है।

क्या बक़रा ईद की नमाज़ ईद उल फ़ित्र से अलग है?

तरीक़ा एक ही है। सिर्फ़ नीयत, वक़्त और खाने और क़ुर्बानी की तरतीब अलग है।

Written by: Ahmad Raza

Credentials: Islamic Studies Content Writer

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